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Azadi Ka Amrit Mahotsav: सैनिकों का खान है राजस्थान का यह मुस्लिम बाहुल्य गांव, 18 बेटों ने दी है शहादत

Mon, 15 Aug 2022 08:33 AM IST
रोमा रागिनी न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, झुंझुनू
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, झुंझुनू Published by: रोमा रागिनी Updated Mon, 15 Aug 2022 08:33 AM IST
सार

Azadi Ka Amrit Mahotsav: सैनिकों का खान है राजस्थान का यह मुस्लिम बाहुल्य गांव, 18 बेटों ने दी है शहादत

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Many soldiers serves in Indian Army from Dhanuri Village of Jhunjhunu
हिंदुस्तान के इस जिले में जन्म लेते हैं 'देश के शहीद' - फोटो : Amar Ujala

पूरा देश 76वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। ऐसे में हम आपको बताते हैं, उस गांव के बारे में जहां के हर घर से वीर सूपत सेना में हंसते-हंसते जाते हैं। यह वही गांव है, जिसने सबसे अधिक फौजियों को भारत माता की सेवा के लिए सरहद पर भेजा है और यहीं से सबसे अधिक भारत माता के लाल देश के लिए हंसते-हंसते प्राण न्यौछावर कर चुके हैं।

Many soldiers serves in Indian Army from Dhanuri Village of Jhunjhunu
धनूरी गांव को 'सैनिकों का गांव' भी कहा जाता है - फोटो : Social Media

देश सेवा में 600 सैनिक गए
धनूरी गांव राजस्थान के झुंझुनू जिला मुख्यालय से करीब 14 किलोमीटर दूर है। यहां कायमखानी मुस्लिमों के सबसे अधिक परिवार हैं। पूरे गांव की आबादी लगभग साढ़े तीन हजार है। अकेले धनूरी गांव से देश की सेवा के लिए 600 से अधिक फौजी सरहद पर सेवा दे चुके हैं। जिनमें से 200 वर्तमान में देश की रक्षा के लिए विभिन्न जगहों पर तैनात हैं और 400 सेवानिवृत्त हो चुके हैं। यही कारण है कि इस गांव को 'आदर्श सैनिक गांव' और 'फौजियों की खान' के नाम से भी जाना जाता है।

Many soldiers serves in Indian Army from Dhanuri Village of Jhunjhunu
सबसे वृद्ध वीरांगना बसीर बानो - फोटो : Social Media

राजस्थान में सबसे अधिक धनूरी से शहीद
धनूरी के कई परिवारों में चार-चार पीढ़ियों के लोग भारतीय सेना में सेवाएं दे चुके हैं। यह परंपरा आज भी जारी है। विभिन्न युद्धों में इस गांव से 18 बेटे शहीद हुए हैं। ऐसे में सबसे अधिक शहीद पूरे राजस्थान में धनूरी से हुए हैं। प्रथम और दूसरे विश्व युद्ध से लेकर भारत-चीन युद्ध 1962, भारत-पाक युद्ध 1965, 1971 और 1999 के करगिल युद्ध तक में यहां के 18 बेटों ने देश के लिए शहादत दी है।

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Many soldiers serves in Indian Army from Dhanuri Village of Jhunjhunu
शहीद मेजर के नाम पर रखा गया स्कूल का नाम - फोटो : Social Media

शहीद के नाम पर स्कूल
भारत-पाक युद्ध 1971 में धनूरी के मेजर महमूद हसन खां, जाफर अली खां और कुतबुद्दीन खां शहीद हुए थे। 1999 के करगिल युद्ध में गांव धनूरी के मोहम्मद रमजान खां वीरगति को प्राप्त हुए थे। वहीं शहीद मेजर महमूद हसन खां के नाम पर स्कूल का नामांकरण भी किया हुआ है। कहते हैं कि राजस्थान में स्कूलों का नाम शहीदों के नाम पर रखे जाने के परंपरा धनूरी गांव से ही शुरू हुई थी।

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Many soldiers serves in Indian Army from Dhanuri Village of Jhunjhunu
गांव में वॉर मेमोरियल बनाने की तैयारी - फोटो : Social Media

आठ भाइयों में से सात देश सेवा में
इसी गांव के आठ भाइयों में से सात भाइयों ने फौज में अपनी सेवा दी थी। यहां के मो. इलियास खान साल 1962 की लड़ाई में शहीद हो गए थे। इनके भाई सुबेदार निसार अहमद खान, सरवर खां, कैप्टन नियाज माहम्मद खां, मो. इकबाल खां, शब्बीर अली खां और अब्दुल अजीज खां हैं। सभी ने देश सेवा को ही चुना था।

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