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Rajasthan: 19वीं सदी में बनी सुनहरी कोठी, 5600 साल पुराना कल्याण जी मंदिर यहां है, देखें तस्वीरें
राजस्थान के टोंक को प्रदेश का लखनऊ भी कहा जाता है। यह शहर पूर्व में एक रियासत भी रहा है। 1948 में यह प्रदेश का हिस्सा बना था। यह शहर पुरानी हवेलियों, बड़ी मस्जिद और मीठे खरबूजों के लिए प्रसिद्ध है।
बनास नदी के किनारे पर बसे इस शहर को पश्तून मूल के नवाब मोहम्मद अमीर खान ने 1746 - 1834 में बसाया था। यह शहर मुस्लिम नवाबों की रियासत रहा है, इसीलिए यहां उर्दू, फारसी अदब और तहजीब का बोलबाला है।
इसे राजस्थान का लखनऊ, रोमांटिक शायर अख्तर शीरानी का शहर, मीठे खरबूजों के लिए प्रसिद्ध है। इसके अलावा भी टोंक की कई ऐसी खासियत हैं, जो आपको जाननी चाहिए। आज हम आपको शहर के यहां के 8 प्रमुख पर्यटन स्थल और शहर के इतिहास के बारे में बताएंगे, आइए जानते हैं...
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सुनहरी कोठी
- फोटो : सोशल मीडिया
सुनहरी कोठी
शहर में मुख्य आकर्षण का केंद्र 19वीं सदी में बनी सुनहरी कोठी है। इसे गोल्डन मेंशन भी कहा जाता है। यह इमारत अपने बाहरी रूवरूप से साधारण लगती है, लेकिन अंदर स्वर्ण रंगों की शाही झलक इसके नाम से मेल खाती है। 7 मार्च 1996 में प्रदेश सरकार ने सुनहरी कोठी को ऐतिहासिक स्मारक घोषित किया गया था।
अरेबिक एंड पर्शियन रिसर्च इंस्टीट्यूट
इसका निर्माण 2002 में किया गया था। यहां रियासत के समय में विद्वानों द्वारा हस्तलिखित पांडुलिपियां, धार्मिक पुस्तकें, ऐतिहासिक पुस्तकें, पेंटिंग सहित अन्य चीजों को संग्रहीत किया गया है। यहां मौजूद कुछ प्राचीन किताबें सोने, पन्ना, मोती और माणक से सुशोभित की गई हैं।
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हाथी भाटा
- फोटो : सोशल मीडिया
हाथी भाटा
यह पर्यटन स्थल सवाई माधोपुर राजमार्ग पर स्थित है। इसे पत्थर-चट्टान से तैयार किया गया एक विशाल हाथी का रूप है। इसे सवाई राम सिंह के शासनकाल के दौरान बनाया गया था।
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बीसलदेव मंदिर
- फोटो : सोशल मीडिया
बीसलदेव मंदिर
इस मंदिर की स्थापना 12वीं शताब्दी में चव्हाण शासक विग्रहराजा चतुर्थ ने की थी। इसे 'गोकर्णेश्व' के मंदिर की वजह से महत्वपूर्ण माना जाता है, जिसे बीसलदेव जी के मंदिर के रूप में जाना जाता है। मंदिर के अंदर एक पवित्र शिवलिंग भी है।
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