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Navratri 2022: इस मंदिर में माता को चढ़ाई जाती है ढाई प्याला शराब, डाकुओं ने कराया था निर्माण

Mon, 26 Sep 2022 09:14 AM IST
रोमा रागिनी न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, नागौर
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, नागौर Published by: रोमा रागिनी Updated Mon, 26 Sep 2022 09:14 AM IST
सार

Navratri 2022: इस मंदिर में माता को चढ़ाई जाती है ढाई प्याला शराब, डाकुओं ने कराया था निर्माण

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Navratri 2022 All you need to know about Bhanwal Mata Temple of Nagaur of Rajasthan
भंवाल माता मंदिर, राजस्थान - फोटो : Social Media

आज से शारदीय नवरात्रि 2022 की शुरुआत हो चुकी है। नौ दिनों तक माता के नौ रूपों की उपासना की जाएगी। देश भर के देवी मंदिरों में भक्तों का जमावड़ा लगेगा। इस पावन पर्व पर श्रद्धालु मां के दर्शन के लिए मंदिर में जाएंगे और तरह-तरह के भोग लगाएंगे लेकिन कभी आपने शराब का भोग सुना है। हम आज आपको बता रहे हैं राजस्थान के एक ऐसे देवी मंदिर के बारे में, जहां माता को ढाई प्याला शराब चढ़ाई जाती है। जानिए माता को शराब अर्पित करने की वजह और कहां स्थित है यह अद्भुत देवी मंदिर।

Navratri 2022 All you need to know about Bhanwal Mata Temple of Nagaur of Rajasthan
भंवाल माता मंदिर, राजस्थान - फोटो : Social Media

राजस्थान के नागौर जिले में मां भंवाल काली माता का मंदिर स्थित है। दूसरे देवी मंदिरों में माता को भोग में लड्डू, पेड़े, हलवा चना और नारियल आदि का भोग लगता है लेकिन भंवाल काली माता मंदिर में भक्त देवी को शराब को भोग लगाते हैं। मान्यता है कि यहां माता ढाई प्याला शराब ही ग्रहण करती हैं। इसके बाद बचे हुए प्याले की शराब को भैरव पर चढ़ाया जाता है।

Navratri 2022 All you need to know about Bhanwal Mata Temple of Nagaur of Rajasthan
शराब का भोग लगाने के भी हैं नियम - फोटो : Social Media

डाकुओं ने कराया था मंदिर का निर्माण
मंदिर निर्माण की बात करें तो इस मंदिर का निर्माण डाकूओं ने करवाया था। मंदिर के शिलालेख से पता चलता है कि मंदिर का निर्माण विक्रम संवत् 1380 को हुआ था। मंदिर के चारों और देवी-देवताओं की सुंदर प्रतिमाएं और कारीगरी की गई है। मंदिर के ऊपरी भाग में एक गुप्त कक्ष भी बनाया गया था, जिसे गुफा कहा गया था।

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Navratri 2022 All you need to know about Bhanwal Mata Temple of Nagaur of Rajasthan
भंवाल माता मंदिर - फोटो : Social Media

खेजड़ी के पेड़ के नीचे प्रकट हुई थीं
स्थानीय लोग बताते हैं कि भुंवाल माता एक खेजड़ी के पेड़ के नीचे पृथ्वी से स्वयं प्रकट हुई थीं। इस स्थान पर डाकुओं के एक दल को राजा की फौज ने घेर लिया था। मृत्यु को निकट देखकर डाकुओं ने मां दुर्गा को याद किया। मां ने अपनी शक्ति से डाकूओं को भेड़-बकरी के झुंड में बदल दिया। इस प्रकार डाकूओं के प्राण बच गए। इसके बाद डाकुओं ने मां के मंदिर का निर्माण करवाया।

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भंवाल माता - फोटो : Social Media

चांदी के प्याले में शराब रख लगाते हैं भोग
श्रद्धालुओं ने बताया कि वे मंदिर में मदिरा लेकर आते हैं। फिर पुजारी चांदी के ढाई प्याले में भरते हैं। इसके बाद पुजारी देवी के होठों तक प्याला लगाते हैं। मदिरा का भोग लगाते समय माता को देखना वर्जित है। प्याले में एक बूंद भी बाकी नहीं रहती।

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