Sardool Sikander Death : जब पहली बार विदेश जाने के लिए सरदूल सिकंदर को 70 किलोमीटर चलानी पड़ी थी साइकिल
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1990 का समय इंडस्ट्री का सबसे बढ़िया समय था
सरदूल कहते थे कि साल 1990 का समय इंडस्ट्री का गोल्डन नहीं बल्कि प्लेटिनम पीरियड था। उस समय पैसा भी था, साथ ही सुकून भी था। सब कुछ था। लेकिन अब समस्या यह है कि समय ही नहीं है। उन्होंने बताया कि एक समय था, जब शो की जगह पर पहुंचने के लिए जल्दी निकलना पड़ता था। उनके फैंस दीदार के बिना उन्हें आगे नहीं बढ़ने देते थे।
सिंकदर के गीत 'हुसना दे मालिकों' गीत को लोगों ने काफी पसंद किया था। उस समय इस गाने की पचास लाख कापी सेल हुई थी। अब बिल्कुल अलग माहौल है। कलाकार आसानी से लोग तक पहुंच करते हैं। लोग आपको लाइक करते हैं। आपके वीडियो देखते हैं लेकिन शो में दिलचस्पी नहीं लेते।
सिंकदर कहते थे कि आप चाहे जितने बड़े स्टार बन जाएं लेकिन आपके अंदर का बच्चा कभी नहीं मरना चाहिए। टेंशन कभी नहीं लेनी चाहिए। धर्मेंद्र जी ने अली बाबा चालीस चोर फिल्म कई साल पहले बनाई थी। उस पर सोलह करोड़ रुपये लागत आई थी। फिल्म नहीं चली। जबकि एक फिल्म निकाह आई थी। उस पर अस्सी लाख रुपये लागत आई थी। उसने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। उन्होंने कहा कि गाना या फिल्म के हिट या फ्लॉप होने पर ज्यादा टेंशन नहीं लेनी चाहिए। बल्कि काम करते रहना चाहिए।
सरदूल के पास कनाडा की नागरिकता थी। वे जब भी गुरु घर जाते थे। उस समय वह एक ही दुआ करते थे कि हे मालिक इंडिया के हर नागरिक को यहां आने की ताकत बक्श दे। भले ही वह दस दिन बाद यहां से चला जाए। उसे पता चलना चाहिए कि जिंदगी क्या होती है। उन्होंने बताया कि इंडिया में हम जिंदगी जी नहीं रहे। बल्कि जिंदगी हमें जी रही है।