कभी खुद नशे की गिरफ्त में रहा परविंदर झोटा जब इससे बाहर निकला तो उसने दूसरों को नशे से बचाने की ठान ली। करीब चार-पांच साल पहले उसने नशा तस्करों के खिलाफ आवाज उठानी शुरू की। मानसा के लोगों के मुताबिक, नशा बेचने वालों ने उसे पैसों का लालच देकर अपने पक्ष में करने की कोशिश की लेकिन वह नहीं झुका। आखिरकार, गोलियां मारकर उसकी हत्या कर दी गई। झोटा की जिंदगी संघर्ष की ऐसी कहानी है, जिसमें खेल के मैदान से लेकर नशे के खिलाफ लड़ाई तक कई पहलू जुड़े हैं।
झोटा को बचपन से ही क्रिकेट का शौक था। परिचितों के मुताबिक, वह टीम में ऑलराउंडर के तौर पर खेलता था। मानसा में जिला स्तरीय टूर्नामेंट के दौरान उसने युवराज सिंह की तरह छह गेंदों पर छह छक्के जड़े थे। 12वीं कक्षा में पढ़ाई के दौरान स्कूल के डीपी मास्टर ने उसे बॉक्सिंग के लिए प्रेरित किया। उसने स्कूली स्तर पर बॉक्सिंग में दो गोल्ड और एक सिल्वर मेडल जीता।
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परविंदर झोटा ने जीता बॉक्सिंग का मैच
- फोटो : संवाद/फाइल
युवाओं को सिखाए खेल के गुर
पढ़ाई पूरी करने के बाद झोटा मानसा लौट आया और स्थानीय युवाओं को क्रिकेट सिखाने लगा। उसके खेल कौशल को देखते हुए क्रिकेट एसोसिएशन ने उसे जिला कोच बनाया। कोचिंग के बदले उसे वेतन भी मिलता था। वह खुद भी क्रिकेट टूर्नामेंटों में हिस्सा लेता रहता था।
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बाक्सिंग के साथियों के साथ झोटा
- फोटो : संवाद/फाइल
मानसा के लोगों के मुताबिक, झोटा एक समय खुद नशा करता था लेकिन इससे बाहर निकलने के बाद उसने नशे के खिलाफ मुहिम शुरू कर दी। वह चिट्टा बेचने वालों और मेडिकल स्टोरों पर नशीले पदार्थ बेचने वालों का विरोध करता था।
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परविंदर सिंह झोटा
- फोटो : संवाद
लोगों का दावा है कि उसके खिलाफ कई पुलिस केस दर्ज करवाए गए लेकिन उसने संघर्ष जारी रखा। स्थानीय लोगों के मुताबिक, नशे के कारोबार से जुड़े अश्वनी ने उसे गोलियां मारकर मौत के घाट उतार दिया। मामले में आरोपों की पुष्टि पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होनी है।
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परविंदर सिंह झोटा
- फोटो : संवाद
मां ने कहा था- अपना ध्यान रखना
झोटा के परिचितों के मुताबिक, हत्या से कुछ दिन पहले उसने दोस्तों के सामने आशंका जताई थी कि उसे गोली मारी जा सकती है। उसकी मां ने भी बातचीत में बताया था कि एक सपना आने के बाद उन्होंने बेटे को चार-पांच दिन अपना ध्यान रखने के लिए कहा था।