अटारी रोड स्थित बीएसएफ खासा हेडक्वार्टर की मेस में रविवार की सुबह रोज की तरह सामान्य ही थी। नाश्ते की तैयारी चल रही थी। ड्यूटी पर जाने से पहले सैनिक नाश्ता करने पहुंचे थे। मेजों कुर्सियों पर बैठकर आपस में बातें कर रहे थे। इस बात से अंजान कि अगले कुछ पलों में उनके साथ क्या गुजरने वाला है। करीब 9.30 बजे हाथ में रायफल लिए सतेप्पा वहां पहुंचा और अंधाधुंध गोलियां बरसाने लगा। पूरा कैंपस गोलियों की आवाज से गूंज उठा। किसी को कुछ समझ नहीं आया। बचने के लिए जवान इधर-उधर भागे। कुछ ने मेजों के नीचे छिपकर जान बचाई। इसके बाद वह कुछ समय के लिए रुका, फिर अपनी ही रायफल से खुद को भी गोली मार ली। गंभीर हालत में उसे अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन वह बच नहीं सका। घटना की सूचना मिलते ही वरिष्ठ अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर हालात का जायजा लिया। साथ ही बीएसएफ कर्मचारियों के अतिरिक्त किसी के भी भीतर जाने पर पाबंदी लगा दी। यहां तक कि मीडिया को भी दूर रखा गया।
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घायल साथी को अस्पताल ले जाते जवान।
- फोटो : एएनआई
घटना की जानकारी मिलते ही कई जवानों के परिजन भी मौके पर पहुंचे।अस्पताल में घायलों का हाल जानने पहुंचे बीएसएफ के आईजी जलाल मोहम्मद एक दो मिनट के लिए मीडिया से मुखातिब हुए और कहा कि इसमें कोर्ट आफ इंक्वायरी मार्क कर दी गई है। पुलिस को भी जांच दे दी गई है। वहीं दूसरी तरफ पुलिस के सीनियर अधिकारियों ने भी घटनास्थल का दौरा कर मौके का मुआयना किया। बीएसएफ खासा हेडक्वार्टर में रहने वाली उमा देवी ने बताया कि आज सुबह उनका बेटा राहुल नाश्ता करने गया था। पता नहीं क्यों सतेप्पा आया और उसने हर तरफ गोलियां चलाई। इसमें उनका बेटा गंभीर रूप से जख्मी हो गया।
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विलाप करतीं महिलाएं।
- फोटो : एएनआई
परिवार से दूरी और काम के दबाव से बढ़ रही आत्महत्या की प्रवृत्ति: डॉ. राहुल
कॅरिअर का चुनाव करते समय युवाओं को लाइमलाइट और किसी के दबाव में आकर निर्णय नहीं लेना चाहिए। ऐसे निर्णय कई बार खुद की जिंदगी जोखिम में डाल देते हैं। कई बार आत्महत्या जैसे कदम उठाने पड़ते हैं। यह कहना है पीजीआई मनोरोग विभाग के सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर राहुल चक्रवर्ती का। उनका कहना है कि काम का दबाव और परिवार से दूरी के कारण बढ़ते तनाव से आत्महत्या जैसी प्रवृत्ति बढ़ रही है। सैन्य क्षेत्रों से जुड़ी घटनाएं तो चिंता का विषय हैं।
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बीएसएफ खासा हेडक्वार्टर
- फोटो : एएनआई
राहुल का कहना है कि कॅरिअर का चुनाव करते समय युवाओं को सावधानी बरतनी चाहिए। विशेषकर सैन्य क्षेत्र में जाने वाले युवाओं को पूरी कार्यप्रणाली के बारे में पता होता है। नौकरी के दौरान अवकाश न मिलना या ज्यादा ड्यूटी से तनाव पैदा होने पर वह सामंजस्य नहीं बैठा पाते हैं। इसके बाद वह कभी खुद को तो कभी दूसरों को नुकसान पहुंचा बैठते हैं। ऐसे में उन अभिभावकों को भी बेहद सचेत रहने की जरूरत है, जो बच्चों पर अपना निर्णय थोपने का प्रयास करते हैं।
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बीएसएफ खासा हेडक्वार्टर
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
इससे बचाव के लिए स्कूल और कॉलेज स्तर पर जागरुकता की जरूरत है, ताकि युवा अपनी क्षमता के आधार पर कॅरिअर चुन सकें।डॉक्टर राहुल युवाओं को सलाह देते हैं कि अपने तनाव को दूसरों से साझा करने की प्रवृत्ति अपनाई जानी चाहिए। किसी भी तरह की मानसिक पीड़ा होने पर उसे स्टिग्मा समझकर दबाने के बजाय मनोचिकित्सक के पास जाएं। इलाज में देरी आत्महत्या जैसी घटनाओं के बढ़ने का एक मुख्य कारण बनता जा रहा है।