हवस, रंगीनियां, बेशर्मी ये वो शब्द है जिससे किसी साधू-संत-बाबा-संन्यासी का दूर-दूर तक लेना देना नहीं हो सकता, लेकिन ठहरिए साल 2017 में भी ऐसे बाबाओं का भांडाफोड़ हुआ जो हवस अय्याशियों में इस कदर डूबे कि उनकी करतूतें देख विश्वास की डोर टूटने लगी है। जिनमें सबसे पहली बात करेंगे नई एंट्री वीरेंद्र देव दीक्षित की। अगली स्लाइड में जानिए किस तरह लड़कियों को लोहे के पिंजरे नूमा आश्रम में बंद कर रखा जाता था...
वीरेंद्र देव दीक्षित- दिल्ली के रोहिणी के विजयविहार इलाके में अध्यात्मिक विश्वविद्यालय के नाम पर आश्रम चलाने वाले इस ढोंगी बाबा ने खुद का कलयुग का कृष्ण घोषित कर रखा था। इस वहशी बाबा ने 16000 महिलाओं के साथ संबंध बनाने का लक्ष्य रखा, लेकिन इसी की एक अनुयायी महिला को जब अपनी 4 बेटियों के साथ बाबा की घिनौनी करतूत का पता चला। तो उसने भी वहशी बाबा की पोल खोलने की ठान ली। वीरेंद्र देव पर अब तक अलग-अलग थानों में रेप समेत 10 से ज्यादा एफआईआर दर्ज हो चुकी है।
ऐसे ही घिनौने बाबाओं की लिस्ट में एक नाम तब सामने आया जब जोधपुर के हाई प्रोफाइल बाबा महंत सुंदर दास महाराज पर उन्हीं की एक पूर्व साध्वी ने बलात्कार का आरोप लगाया। लड़की का कहना था कि बाबा अपने कमरे में किसी न किसी बहाने से बुलाता और फिर वो करता जो बताया नहीं जा सकता। आरोप लगाने वाली शिष्या की शिकायत पर दिल्ली के सब्जी मंडी थाने में बाबा के खिलाफ केस भी दर्ज हो गया।
राजधानी दिल्ली ही नहीं उत्तरप्रदेश में भी बाबाओं का सत्संग के नाम पर यौन शोषण का खेल चला। जिसका साल 2017 के अंत से पहले ही अंत हो गया। ये खुलासा था यूपी के बस्ती के बलात्कारी बाबा का। बाबा सच्चिदानंद का खुलासा तब हुआ जब बाबा के आश्रम की चार शिष्या वहां से भागने में कायमाब रहीं। चार साध्वियों के साथ बलात्कार करने का मामला सामने आया हैा।
धर्म के इस ठेकेदार यानी बाबा कौशलेंद्र उर्फ फलाहारी बाबा पर भी शिष्या से रेप का आरोप लगा। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर की रहने वाली युवती इसे अपना गुरु मानती थी। जिसे फलाहारी बाबा ने पहले प्रसाद में नशीला पदार्थ मिलाकर धोखे से खिलाया। फिर उसका रेप किया। सुबह होने पर युवती ने हिम्मत दिखाई और सुबह पुलिस के पास जाकर बाबा के खिलाफ रेप का केस दर्ज करवाया।