बचपन, जीवन के उन खुशनुमा पलों में से एक होता है जब इंसान बेफिक्रियों के बादलों में घिरा होता है। इन पलों में बाल मजदूरी करना उनके लिए एक सजा है। देश में बाल मजदूरी को रोकने के लिए ढेरों नियम-कानून बनाए गए हैं, इसके बावजूद बाल मजदूरी आंकड़ों के आंकड़ों में कमी नहीं आई है।
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4 साल की उम्र के बच्चों से उठवाई जाती थी ईंटे, जुल्म के भट्टे से 200 मासूमों को बचाया
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
Updated Fri, 06 Jan 2017 10:02 AM IST
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डेली मेल की खबर के अनुसार ईंट के भट्टे में काम करने वाले मजदूर बच्चों में ज्यादातर 14 साल की उम्र से कम थे। मासूम बच्चों को छुड़ाने के लिए की गई छापेमारी के दौरान अधिकारियों ने पाया कि महज 7 साल की बच्ची 8 ईंट्टों को अपने सिर पर ढो रही थी। बच्चों को बाल मजदूरी से बचाने के लिए यादादीरी जिले और आस-पास के इलाकों में ऑपरेशन स्माइल चलाया गया है। जिनमें
200 बच्चों को छुड़ाया जाना भी इसी ऑपरेशन का एक हिस्सा था।
दरअसल, ऑपरेशन स्माइल उन बच्चों के लिए चलाया गया है, जो अगवा कर लिए गए हैं। पुलिस ने बताया कि ये बच्चे पूर्वी ओडिशा से यहां लाए जाते हैं और उनकी जान को खतरे में डाल कर ईंट भट्टे में काम लिया जाता था।
200 बच्चों को छुड़ाया जाना भी इसी ऑपरेशन का एक हिस्सा था।
दरअसल, ऑपरेशन स्माइल उन बच्चों के लिए चलाया गया है, जो अगवा कर लिए गए हैं। पुलिस ने बताया कि ये बच्चे पूर्वी ओडिशा से यहां लाए जाते हैं और उनकी जान को खतरे में डाल कर ईंट भट्टे में काम लिया जाता था।
चौंका देने वाली बात है कि जांच के दौरान वहां काम करने वाले मजदूर उन्हें अपना बच्चा बताते थे और कहते थे कि ये यहां खेल रहे हैं।आपको बता दें कि अंतरराष्ट्रीय मजदूर संगठन ने साल 2015 में एक आंकड़ा जारी किया था। इस आकंड़े के मुताबिक विश्व के 168 मिलियन बच्चों में से 5.7 मिलियन बच्चे बाल मजदूर की मार झेल रहे हैं।
इन बच्चों की उम्र 5 से 17 साल के बीच होती है। बच्चों की आधे से ज्यादा संख्या ऐसी हैं जो एग्रीकल्चर सेक्टर में बाल मजदूरी करने पर मजबूर हैं, जबकि एक-चौथाई बच्चे निर्माण के सेक्टर में फंसे हुए हैं।
इन बच्चों की उम्र 5 से 17 साल के बीच होती है। बच्चों की आधे से ज्यादा संख्या ऐसी हैं जो एग्रीकल्चर सेक्टर में बाल मजदूरी करने पर मजबूर हैं, जबकि एक-चौथाई बच्चे निर्माण के सेक्टर में फंसे हुए हैं।
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बच्चों के अधिकारों की लड़ाई करने वाले पी अचुत्या राव का कहना है कि आंध्र प्रदेश और तेलंगाना बाल मजदूरी का केंद्र बन गए हैं। राव ने बताया कि पिछले साल 3000 से ज्यादा बच्चे इन ईंट के भट्टों से छुड़ाए गए थे। इन सभी में बच्चे पूर्वी राज्यों से लाए गए थे।
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हालांकि, कुछ बच्चे ऐसे भी होते हैं जो गरीब होने की वजह से अपने माता-पिता के साथ मजदूरी शुरू कर देते हैं। अधिकारियों ने बताया है कि वे बच्चों को बचाने की हर कोशिश कर रहे हैं और उन्हें नजदीक के स्कूलों में दाखिले दिला रहे हैं।