दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है। बुधवार की सुबह स्मॉग की चादर में लिपटी नजर आ रही है। विजिबिलिटि 100 मीटर से भी कम हो गई है। आज सुबह दिल्ली-एनसीआर में जिस तरह की धुंध छाई वो दिवाली के अगले दिन से भी ज्यादा थी। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र वायु प्रदूषण के इस साल के सबसे खराब दौर से गुजर रहा है। अधिकांश विशेषज्ञों ने इस धुंध को स्मॉग बताया है। हालांकि, दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि यह वास्तव में धुंध है। मौसम विभाग के मुताबिक, अगर हवा का बहाव बहुत तेज नहीं हुआ तो दिल्ली को कम से कम तीन दिनों तक इस भीषण प्रदूषण की मार झेलनी पड़ सकती है। बड़ी मात्रा में धूल, ह्यूमिडिटी ज्यादा होने और हवा का बहाव बेहद कम होने के कारण एयर क्वॉलिटी खराब हुई है।
दिल्ली-एनसीआर में 3 दिन और झेलनी होगी जहरीली हवा, आज बंद रहेंगे 5वीं तक के स्कूल
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दिल्ली के प्राइमरी स्कूल आज बंद
बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए दिल्ली सरकार ने पांचवीं तक के सभी स्कूलों को बुधवार को बंद करने का फैसला किया है। स्कूलों में मार्निंग व आफ्टर नून असेंबली के साथ बच्चों की आउटडोर एक्टिविटी पर अस्थायी तौर पर रोक लगा दी गई है। इसके अलावा दिल्ली सरकार ने लोगों को सैर पर नहीं निकलने की सलाह दी है।
दिल्ली के प्रदूषण को देखते हुए मंगलवार को मेट्रो की सुरक्षा में तैनात सीआईएसएफ जवानों को 8000 मास्क वितरित किए गए। 5000 मास्क एयरपोर्ट सिक्योरिटी में लगे सुरक्षाकर्मियों को और 1000 अन्य को बांटे गए। इसके साथ ही एनजीटी ने कहा कि दिल्ली में इस वक्त इमरजेंसी की स्थिति है। ट्रिब्यूनल ने यूपी, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली सरकार से बचाव के लिए क्या किया जा रहा है इस पर जवाब मांगा है। यह जवाब सरकारों को 9 नवंबर तक देना है।
केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने दिल्ली में प्रदूषण कम करने के लिए हेलीकॉप्टर से पानी के छिड़काव को लेकर दिल्ली सरकार को जवाब दिया है। उन्होंने कहा है कि प्रदूषक तत्वों को कम करने के लिए सरकार को पानी छिड़काव के सस्ते माध्यमों के बारे में सोचना चाहिए। इस संबंध में उन्होंने कहा कि यदि हेलीकॉप्टर से पानी छिड़काव दिल्ली सरकार को सस्ता लगता है तो ऐसा करने के लिए वे पूरी तरह स्वतंत्र हैं।
आईएमए की अपील
स्कूलों में आउटडोर स्पोर्ट्स , मैराथन और अन्य आउटडोर गतिविधियों पर रोक लगा देनी चाहिए। खेलते वक्त बच्चों को ज्यादा ऑक्सीजन की जरूरत पड़ती है और ऐसे में सांस के जरिए प्रदूषित हवा फेफड़े तक पहुंचेगी जो बेहद नुकसानदेह है। गर्भवती महिलाओं और नौनिहालों के लिए यह खतरनाक स्थिति है। इसकी वजह यह है कि मां के पेट में बच्चा उसी के जरिए सांस लेता है। अगर मां ही प्रदूषण युक्त ऑक्सीजन ग्रहण करती है तो उस नन्हीं सी जान के लिए भी ये प्रदूषित ऑक्सीजन खतरा बन सकती है।