धनतेरस के साथ ही देशभर में पांच दिवसीय दीपोत्सव पर्व का आगाज हो चुका है। लोग उत्साह के साथ दिवाली की तैयारियों में जुटे हैं। तीज त्यौहारों की रौनक मंदिरों में एक अनूठा रंग भरती है और अगर मौका दिवाली की हो तो फिर इसकी बात ही कुछ और है। मध्यप्रदेश के हजारों मंदिरों में इस मौके पर आकर्षक विद्युत साज सज्जा जाती है, तो वहीं भगवान की विशेष पूजा और श्रृंगार भी किए जाते हैं। आइए आपको बताते हैं प्रदेश के तीन प्रसिद्ध मंदिरों में किस तरह से दीपावली का पर्व मनाया जाता है।
बाबा महाकाल के दर से दीपोत्सव का आगाज
उज्जैन के राजा बाबा अवंतिकानाथ के धाम से हर साल दीपोत्सव की शुरुआत होती है। हर साल देश में सबसे पहले दिवाली महाकाल मंदिर में ही मनाई जाती है। इस साल भी धनतेरस की पूजा के साथ ही बाबा महाकाल की फुलझड़ियों से आरती की गई, इसके साथ ही देशभर में दीपोत्सव की शुरुआत हो चुकी है। दिवाली के मौके पर बाबा महाकाल का विशेष श्रृंगार किया जाता है। मंदिर में दीप जलाए जाते हैं। बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने मंदिर पहुंचते हैं। इस मौके पर बाबा महाकाल को 56 भोग भी लगाए जाते हैं।
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खजराना गणेश, इंदौर
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खजराना गणेश मंदिर
देश के प्रसिद्ध गणेश मंदिरों में शुमार खजराना गणेश मंदिर में भी हर साल काफी धूमधाम से दिवाली का पर्व मनाया जाता है। इस मौके पर हर साल की तरह इस साल भी आकर्षक विद्युत साज सज्जा की गई है। दिवाली पर मंदिर प्रबंधन की ओर से 151 दीप जलाए जाते हैं। षोडशोपचार पूजन विधि से खजराना गणेश का पूजन किया जाता है। दीवाली के अगले दिन भगवान गणेश को 56 भोग लगते हैं लेकिन इस साल ग्रहण के चलते भाईदूज के दिन खजराना गणेश को 56 भोग लगाए जाएंगे। हर साल दीवाली के अगले दिन अन्नकूट महोत्सव मनाया जाता है लेकिन सूर्य ग्रहण के चलते इस बार भाईदूज पर मनाया जाएगा।
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राम राजा सरकार मंदिर, ओरछा
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ओरछा राम राजा दरबार
दीपावली का पर्व भगवान राम के अयोध्या आगमन के मौके पर मनाया जाता है। ओरछा में स्थित राम राजा सरकार मंदिर देश का इकलौता मंदिर है जहां, भगवान राम का पूजन राजा के रूप में किया जाता है। ओरछा राम राजा सरकार मंदिर में दिवाली का पर्व काफी उत्साह के साथ मनाया जाता है। मंदिर में सैंकड़ों दीप प्रज्जवलित कर भगवान के घर आगमन की खुशी मनाई जाती है। बड़ी संख्या में भक्त इस दिन दर्शन करने मंदिर पहुंचते हैं। इस मौके पर मंदिर में नयनाभिराम सजावट की गई है।