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Omkareshwar: ओंकारेश्वर में भूतड़ी सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या का विराट मेला, नर्मदा नदी के घाटों पर उमड़ी भीड़
Sun, 21 Sep 2025 10:17 AM IST
खंडवा ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ओंकारेश्वर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ओंकारेश्वर
Published by: खंडवा ब्यूरो
Updated Sun, 21 Sep 2025 10:17 AM IST
सार
सोमवती सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या पर ओंकारेश्वर में लाखों श्रद्धालुओं ने नर्मदा स्नान, ज्योतिर्लिंग दर्शन और परिक्रमा की। भीड़ से भक्तों को कठिनाइयाँ हुईं, प्रशासनिक इंतजाम नाकाफी रहे। पेयजल, रोशनी, सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी से श्रद्धालु परेशान हुए। श्रद्धालुओं ने तर्पण कर पितृमोक्ष की कामना की।
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सर्वपितृ अमावस्या पर नर्मदा घाटों पर उमड़ी भीड़
- फोटो : अमर उजाला
सोमवती सर्वपितृ मोक्ष भूतड़ी अमावस्या पर ओंकारेश्वर में आस्था और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला। लाखों महिला-पुरुष श्रद्धालु नर्मदा तट पर पहुंचे और देशी ओझाओं व तांत्रिकों के साथ बाहरी बाधाओं को दूर करने की क्रियाओं में लीन रहे। कोटीतीर्थघाट, गोमुखघाट, नागरघाट, अभयघाट, चक्रतीर्थघाट, श्मशानघाट, ब्रह्मपुरीघाट और नर्मदा-कावेरी संगम घाट पर आध्यात्मिक अनुष्ठानों के दृश्य अद्वितीय रहे।
सर्वपितृ अमावस्या पर नर्मदा घाटों पर उमड़ी भीड़
- फोटो : अमर उजाला
प्रशासन के दावे और श्रद्धालुओं की परेशानियां
भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने पुराने बस स्टैंड से वाहनों की आवाजाही बंद कर दी थी। दोपहिया वाहनों को बालवाड़ी, छोटे वाहनों को कुबेर भंडारी मंदिर के पास और बसों को गणेश नगर में रोककर अस्थायी बस स्टैंड बनाया गया। इससे श्रद्धालुओं को लंबी दूरी पैदल तय करनी पड़ी। बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को विशेष कठिनाई का सामना करना पड़ा।
नर्मदा घाटों पर प्रशासन की तैयारियां ऊंट के मुंह में जीरे जैसी साबित हुईं। घाटों पर रोशनी, पेयजल, शौचालय और सुरक्षा इंतजाम नदारद रहे। नर्मदा-कावेरी घाट पर स्नान के दौरान बड़े पत्थरों से कई श्रद्धालु घायल हो गए। रातभर अंधेरा रहा और कोई गोताखोर मौजूद नहीं था। नागरघाट और अभयघाट पर हजारों श्रद्धालुओं ने खुले आसमान के नीचे रात बिताई। महिला सुरक्षा कर्मियों की अनुपस्थिति से असुरक्षा का माहौल रहा।
बस स्टैंड से मंदिर तक अतिरिक्त पेयजल की व्यवस्था नहीं थी। गंदगी और अंधेरे से श्रद्धालु बेहाल रहे। कुबेर भंडारी मंदिर पार्किंग में पानी की कोई सुविधा न होने से लोगों ने सीधे नर्मदा का जल पिया। ओंकार पर्वत परिक्रमा मार्ग बाढ़ से क्षतिग्रस्त होने के कारण नर्मदा कावेरी संगमघाट तक भारी भारी परेशानियां का सामना करना पड़ा। स्वास्थ्य विभाग की ओर से चिकित्सा सुविधा का अभाव रहा।
ओंकारेश्वर मंदिर ट्रस्ट के सीईओ डिप्टी कलेक्टर मुकेश काशिव, ओंकारेश्वर तहसीलदार उदय मंडलोई मैं बताया कि बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान ओंकारेश्वर करने पहुंचे थे। मंदिर के पट एक घंटे पहले ही खोल दिए गए थे, सभी श्रद्धालुओं को आसानी से दर्शन करवाएंगे।
ये भी पढ़ें- एम्स की बड़ी उपलब्धि, मात्र 30 मिनट में स्टेंट से बंद किया दिल का छेद, नहीं लगाना पड़ा बड़ा चीरा
पुलिस और यातायात व्यवस्था
ओंकारेश्वर थाना प्रभारी अनोख सिंधिया ने बताया 200 पुलिस जवानों को खंडवा, खरगोन, बड़वानी, बुरहानपुर से बुलाया गया था। जिन्होंने अनेक पुलिस अधिकारियों के साथ चाक-चौबंद व्यवस्था बनाई रखी। पुल पर ट्रैफिक को सख्ती से नियंत्रित किया। इससे खंडवा-इंदौर मार्ग पर कहीं भी जाम की स्थिति नहीं बनी।
सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या शास्त्रों के अनुसार यह तिथि पितरों के तर्पण और मोक्ष के लिए सर्वोत्तम मानी जाती है। श्रद्धालुओं ने पिंडदान और तर्पण कर अपने पितरों का ऋण चुकाया। जो लोग गया नहीं जा पाते, वे ओंकारेश्वर में नर्मदा-कावेरी संगम पर स्थित गया शिला मंदिर में पूजा-अर्चना कर पितृमोक्ष की कामना करते हैं। मान्यता है कि यहां तर्पण करने से पितरों की आत्मा को शांति और मुक्ति मिलती है।
भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने पुराने बस स्टैंड से वाहनों की आवाजाही बंद कर दी थी। दोपहिया वाहनों को बालवाड़ी, छोटे वाहनों को कुबेर भंडारी मंदिर के पास और बसों को गणेश नगर में रोककर अस्थायी बस स्टैंड बनाया गया। इससे श्रद्धालुओं को लंबी दूरी पैदल तय करनी पड़ी। बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को विशेष कठिनाई का सामना करना पड़ा।
नर्मदा घाटों पर प्रशासन की तैयारियां ऊंट के मुंह में जीरे जैसी साबित हुईं। घाटों पर रोशनी, पेयजल, शौचालय और सुरक्षा इंतजाम नदारद रहे। नर्मदा-कावेरी घाट पर स्नान के दौरान बड़े पत्थरों से कई श्रद्धालु घायल हो गए। रातभर अंधेरा रहा और कोई गोताखोर मौजूद नहीं था। नागरघाट और अभयघाट पर हजारों श्रद्धालुओं ने खुले आसमान के नीचे रात बिताई। महिला सुरक्षा कर्मियों की अनुपस्थिति से असुरक्षा का माहौल रहा।
बस स्टैंड से मंदिर तक अतिरिक्त पेयजल की व्यवस्था नहीं थी। गंदगी और अंधेरे से श्रद्धालु बेहाल रहे। कुबेर भंडारी मंदिर पार्किंग में पानी की कोई सुविधा न होने से लोगों ने सीधे नर्मदा का जल पिया। ओंकार पर्वत परिक्रमा मार्ग बाढ़ से क्षतिग्रस्त होने के कारण नर्मदा कावेरी संगमघाट तक भारी भारी परेशानियां का सामना करना पड़ा। स्वास्थ्य विभाग की ओर से चिकित्सा सुविधा का अभाव रहा।
ओंकारेश्वर मंदिर ट्रस्ट के सीईओ डिप्टी कलेक्टर मुकेश काशिव, ओंकारेश्वर तहसीलदार उदय मंडलोई मैं बताया कि बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान ओंकारेश्वर करने पहुंचे थे। मंदिर के पट एक घंटे पहले ही खोल दिए गए थे, सभी श्रद्धालुओं को आसानी से दर्शन करवाएंगे।
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पुलिस और यातायात व्यवस्था
ओंकारेश्वर थाना प्रभारी अनोख सिंधिया ने बताया 200 पुलिस जवानों को खंडवा, खरगोन, बड़वानी, बुरहानपुर से बुलाया गया था। जिन्होंने अनेक पुलिस अधिकारियों के साथ चाक-चौबंद व्यवस्था बनाई रखी। पुल पर ट्रैफिक को सख्ती से नियंत्रित किया। इससे खंडवा-इंदौर मार्ग पर कहीं भी जाम की स्थिति नहीं बनी।
सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या शास्त्रों के अनुसार यह तिथि पितरों के तर्पण और मोक्ष के लिए सर्वोत्तम मानी जाती है। श्रद्धालुओं ने पिंडदान और तर्पण कर अपने पितरों का ऋण चुकाया। जो लोग गया नहीं जा पाते, वे ओंकारेश्वर में नर्मदा-कावेरी संगम पर स्थित गया शिला मंदिर में पूजा-अर्चना कर पितृमोक्ष की कामना करते हैं। मान्यता है कि यहां तर्पण करने से पितरों की आत्मा को शांति और मुक्ति मिलती है।
