मध्यप्रदेश अजब है और गजब भी। ताजा मामला रीवा का है। दो मालिकों के दावे के चलते चार दिन तक एक भैंस को लॉकअप में रहना पड़ा। रीवा की पुलिस भी इस भैंस की खातिरदारी में लगी रही। आखिर में एक साल पुराने फोटो देखने के बाद पुलिस ने फिलहाल एक दावेदार को भैंस सौंप दी है।
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रीवा का जनेह थाना, जहां का यह विवाद है।
- फोटो : सोशल मीडिया
दो परिवारों में था विवाद
मामला यूं है कि जनेह थाना क्षेत्र में दो परिवारों के बीच एक भैंस के मालिकाना हक को लेकर विवाद है। लल्लू आदिवासी ने पुटौधा गांव के बहादुर सिंह के खिलाफ भैंस चोरी करने का आरोप लगाया है। झगड़ा सुलझाने के लिए भैंस को पुलिस थाने ले आई और लॉकअप के बाहर बांध दिया। चार दिन तक पुलिसवाले ही उसकी खातिरदारी करते रहे। जब विवाद शांत नहीं हुआ तो एक साल पुराने फोटो को आधार मानकर पुलिस ने फिलहाल बहादुर सिंह को यह भैंस सौंप दी है।
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रीवा के पुलिस थाने में भैंस
- फोटो : सोशल मीडिया
चार दिन तक पुलिस ने की खातिरदारी
लल्लू आदिवासी का आरोप है कि यह भैंस उसकी है। एक साल पहले अचानक यह भैंस गायब हो गई थी। खूब तलाशा लेकिन नहीं मिली। कुछ दिन पहले किसी ने लल्लू को बताया कि उसकी भैंस तो बहादुर सिंह के घर बंधी है। बस फिर क्या था, लल्लू पहुंच गए अपना दावा जताने। बहादुर सिंह का दावा है कि यह भैंस उसके एक साल पहले से है। यानी यह लल्लू की नहीं है। झगड़ा सुलझाने ही पुलिस इस भैंस को थाने ले आई थी। जांच के दौरान बहादुर सिंह ने एक साल पुरानी तस्वीरें भी दिखाई। ऐसे साक्ष्य भी प्रस्तुत किए, जिससे पुलिस को यकीन हो गया कि यह भैंस लल्लू की नहीं बल्कि बहादुर की है। इसके बाद पुलिस ने फिलहाल यह भैंस बहादुर को सौंप दी है। हालांकि, अगर लल्लू ने कोर्ट केस किया या औपचारिक शिकायत दर्ज की तो पुलिस के सामने समस्या खड़ी हो सकती है और भैंस फिर लॉकअप में आ जाएगी।