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Azadi Ka Amrit Mahotsav: मध्यप्रदेश के पहले शहीद थे गुलाब सिंह, आजादी के लिए 16 साल की उम्र में दी थी जान

Mon, 15 Aug 2022 07:57 AM IST
अंकिता विश्वकर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: अंकिता विश्वकर्मा Updated Mon, 15 Aug 2022 07:57 AM IST
सार

Azadi ka Amrit mahotsav: मध्यप्रदेश के पहले शहीद थे गुलाब सिंह, 16 साल की उम्र में आजादी के लिए दे दी थी जान

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Azadi ka Amrit mahotsav: Gulab Singh was the first martyr of Madhya Pradesh, gave his life for freedom
अमर शहीद गुलाब सिंह पटेल - फोटो : सोशल मीडिया
भारत इस साल आजादी की 75वीं वर्षगांठ मना रहा है। आजादी का ये अमृत महोत्सव हर हिन्दुस्तानी के लिए बेहद गर्व का क्षण हैं। 200 सालों की गुलामी की जंजीरों को तोड़कर ये आजादी हमें खून की नदियां बहाने के बाद मिली है। अपने वतन पर अपना तिरंगा लहराने के लिए हमने ना जाने कितने शीश कटाएं हैं। बिना जान की परवाह किए हमारे वीरों और शहीदों ने देश की आजादी का स्वप्न देखा था। ऐसे अनगिनत वीर हैं जो आजादी की जंग में शहीद हुए। मध्यप्रदेश के ऐसे कई वीर हैं, जिनका स्वप्न था आजाद भारत देखना और इस स्वप्न को साकार करने के लिए उन वीरों ने अपनी जान की बाजी लगा दी थी। जबलपुर के गुलाब सिंह पटेल का नाम मध्यप्रदेश के पहले शहीद के रूप में लिया जाता हैं। गुलाब सिंह महात्मा गांधी के भारत छोड़ो अभियान का हिस्सा बने थे और देश की आजादी के लिए प्राणों का उत्सर्ग किया था।

 
Azadi ka Amrit mahotsav: Gulab Singh was the first martyr of Madhya Pradesh, gave his life for freedom
कई स्वतंत्रता आंदोलनों का गवाह है कमानिया गेट - फोटो : सोशल मीडिया
16 साल की उम्र में हुए थे शहीद
गुलाम भारत को आजाद कराने के लिए देश के युवाओं ने अदम्य साहस दिखाया था। जब महात्मा गांधी ने 1942 में देश को आजाद कराने के लिए अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ 'भारत छोड़ो आंदोलन' शुरू किया तो देश के कोने-कोने से युवा इस आंदोलन से जुड़े। जबलपुर से गुलाब सिंह पटेल इस अभियान से जुड़े और हाथों में तिरंगा लेकर देशभक्ति का संचार किया। 

वो 14 अगस्त का ही दिन था,जब देश की आजादी का स्वप्न आंखों में लिए गुलाब सिंह पटेल ने अपनी आंखें मूंद ली थी, लेकिन आखिरी सांसें लेने से पहले उन्होंने कमानिया गेट पर तिरंगे को शान से लहराते देखा था। शहादत के समय गुलाब सिंह की उम्र महज 16 साल थी, शहीद होकर उन्होंने मध्यप्रदेश के पहले बलिदानी होने का गौरव प्राप्त किया था।
 
Azadi ka Amrit mahotsav: Gulab Singh was the first martyr of Madhya Pradesh, gave his life for freedom
गुलाब सिंह पटेल की आखिरी इच्छा कमानिया गेट पर तिरंगा फहराना थी - फोटो : सोशल मीडिया
सिर में खाई थी गोली
जब आठ अगस्त,1942 को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के मुंबई अधिवेशन में भारत छोड़ो आंदोलन का प्रस्ताव पारित हुआ। तो जबलपुर में स्वतंत्र भारत का सपना देखने वाले युवाओं में एक नई ऊर्जा का संचार हुआ। युवा जोश को देखकर डरी अंग्रेजी फौज ने नौ अगस्त को इलाके के सभी स्वतंत्रता सेनानियों को हिरासत में ले लिया। क्रांतिकारियों की गिरफ्तारी के बाद युवाओं ने अगस्त क्रांति को सफल बनाने की जिम्मेदारी अपने कंधों पर ली। अगले ही दिन 10 अगस्त 1942 को कमानिया गेट चारों ओर से स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों से खचाखच भर गया। घमंडी चौक से जब गुलाब सिंह के नेतृत्व में विद्यार्थियों का जुलूस पुलिस की घेराबंदी तोड़कर तिरंगा थामे आगे बढ़ा तो, वंदेमातरम के उद्घोष से पूरा आकाश गूंज उठा। वहां मौजूद सभी लोगों ने जब वंदे मातरम के नारे लगाए तो अंग्रेजी हुकूमत हिल गई। आनन फानन में तत्कालीन सिटी मजिस्ट्रेट देवबक्श सिंह ने कार्रवाई का निर्देश दिया, इसी दौरान एक पुलिसकर्मी ने गुलाब सिंह पर निशाना साधकर उन्हें गोली मार दी। गोली सीधा जाकर गुलाब सिंह के सिर में लगी उन्हें रक्त रंजित अवस्था में विक्टोरिया अस्पताल लेकर जाया गया।

गंभीर रूप से घायल अवस्था में गुलाब सिंह पटेल ने साथियों से सिर्फ यही कहा कि कमानिया गेट में तिरंगा फरहाकर मुझे बता देना। उनकी इच्छा को पूरा करने के लिए जैन बायज स्काउट्स एसोसिएशन के विद्यार्थियों ने कमानिया पर तिरंगा झंडा फहराया, जब ये खबर गुलाब सिंह को मिली तो उन्हें बहुत आत्मसंतुष्टि मिली। चार दिन गंभीर हालत में उन्होंने अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ी लेकिन 14 अगस्त 1942 के दिन उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया। 14 अगस्त के ही दिन गुलाब सिंह का जन्म हुआ था और इसी दिन वे दुनिया से रुखस्त हो गए।
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