आज अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस है। महिलाओं के सम्मान, महिलाओं के अभिवादन का दिन। अब वह समय बीत गया जब महिलाएं घर के भीतर सीमित रहती थी, अब खुले आकाश में पंख पसारे महिलाओं हौसलों की उड़ान भर रहीं हैं। चाहे कोई भी क्षेत्र हो, महिलाओं ने अपनी काबिलियत से खुद को साबित किया है। ऐसे अनेक उदाहरण हैं जिनसे महिलाओं के जज्बे को समझा जा सकता है।
महिला दिवस के मौके पर ऐसी ही कुछ महिलाओं की हम बात करेंगे, जिन्होंने घर की चौखट पार कर एक अलग मुकाम पाया है। देवास जिले की करीब 210 महिलाएं उनमें से ही हैं जिन्होंने बांस की खेती से भविष्य संवारने का संकल्प लिया है। दरअसल देवास जिले में एक जिला एक उत्पाद के तहत बांस की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके तहत 21 समूहों की 210 महिलाओं को बांस की खेती के लिए प्रेरित किया गया। ये महिलाएं 210 हेक्टेयर में रोपे गए बांस की देखरेख कर रहीं हैं। निंदाई, गुड़ाई, सिंचाई के लिए उन्हें मनरेगा के तहत निर्धारित राशि भी मिल रही है। तीन साल बाद जब बांस की कटाई होगी तो इन महिलाओं को अच्छा मुनाफा भी मिलेगा। बांस की खेती से ज्यादा से ज्यादा महिलाएं जुड़ सके इसलिए जिले के कानकुंड, गुर्जर बापच्या, जामगोद में बांस के पौधों का रोपण किया गया। इनकी भी जिम्मेदारी महिलाओं को सौंपी गई।
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बांस के रोपण के साथ ही निंदाई, गुड़ाई और सिंचाई की व्यवस्था भी महिलाएं संभाला रहीं हैं
- फोटो : सोशल मीडिया
नई क्रांति के रूप में आगे बढ़ रहीं
जिले में बनाए गए 21 स्वसहायता समूहों में 10 से 12 महिलाएं काम कर रही है। बांस की खेती से जुडऩे के बाद उन्हें रोजगार भी मिल रहा है और तीन साल बाद जब कंपनी उनसे बांस खरीदेगी तो अच्छा मुनाफा भी होगा। इसी तरह ग्रामीण क्षेत्र में बांस रोपण मनरेगा के तहत एवं अंकुर अभियान के तहत कार्यक्रम में ग्रामीण आजीविका मिशन की स्वयं सहायता समूह की महिलाएं बढ़चढ़कर हिस्सा ले रहीं है। देवास में 4000 से अधिक स्वयं सहायता समूह के सदस्य विभिन्न प्रकार की आजीविका गतिविधियां कर रहीं है जिसमें मुख्य रुप से पौधारोपण, कृषि कार्य, पशुपालन, एमईडी गतिविधियां इस प्रकार विभिन्न क्षेत्रों में पुरुषों को पीछे छोड़ते हुए आजीविका मिशन जिला पंचायत की महिलाएं जिले में नई क्रांति के रूप में आगे बढ़ चुकीं हैं।
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कंपनी से अनुबंध करतीं महिलाएं
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आर्टिजन कंपनी से हुआ समूहों का अनुबंध
देवास जिले के जामगोद में बांस से विभिन्न उत्पाद बनाने के लिए आर्टिजन कंपनी ने प्लांट डाला है। यहां बांस से फर्नीचर सहित अन्य उत्पाद बनाए जा रहे हैं। नवरात्रि के दौरान कंपनी ने माता टेकरी पर प्रसाद वितरित करने के लिए बांस से तैयार पैकेट उपलब्ध कराए थे। बांस से बनने वाले उत्पाद देवास ही नहीं बल्कि देश-विदेश तक भेजे जा रहे हैं। इससे बांस के उत्पादों से जिले को एक अलग ही पहचान मिल रही है और लोगों को रोजगार भी मिल रहा है। महिलाओं के पांच स्वसहायता समूहों का कंपनी से अनुबंध किया गया है जो बांस की पैदावार होने के बाद कंपनी को बांस उपलब्ध करवाएंगे। साथ ही अन्य समूहों के भी अनुबंध कराने की तैयारी की जा रही है। इससे महिलाओं को बांस बेचने के लिए कहीं दूसरी जगह जाने की जरूरत नहीं होगी। पिछले साल बारिश के सीजन में जिले में बांस का रोपण किया गया था। इनकी देखरेख से लेकर सिंचाई तक का जिम्मा महिलाओं को सौंपा गया है। हर महिला को एक एकड़ की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उम्मीद जताई जा रही है कि प्रति एकड़ 1.40 हजार रुपये मुनाफा होगा। पौधों की देखरेख व सिंचाई के लिए महिलाओं को मनरेगा के तहत मजदूरी करने पर 193 रुपये प्रतिदिन भुगतान किया जा रहा है। 100 दिन तक उन्हें रोजगार भी मिल रहा है।