मध्य प्रदेश का इंदौर शहर स्वच्छता के मामले में पहली और दूसरी तीमाही के सर्वे में देश में पहले पायदान पर है। केंद्र सरकार ने मंगलवार को स्वच्छता सर्वे की पहली और दूसरी तीमाही की घोषणा की। इस सर्वे के मुताबिक इंदौर शीर्ष स्थान पर है।
साफ-सफाई में इंदौर देश का नंबर वन शहर, ये है इसके पीछे की कहानी
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इंदौर ने बहुत कुछ किया...
कूड़ेदानों की निगरानी के लिए 700 से अधिक नए कर्मचारी, शौचालयों और मूत्रालयों से लेकर 3,000 सड़क किनारे डिब्बे और लाइव ट्रैकिंग प्रणाली। हरे-पीले रंग की कचरा वैन इंदौर के बाहरी इलाके में जब अनुराधा नगर की झुग्गियों में पहुंचती है, तो यहां की संकीर्ण गलियां, आधी टूटी बाल्टी काफी कुछ बताती है। प्रतिदिन सुबह 7 बजे से, बॉलीवुड गायक शान की आवाज में वैन के लाउडस्पीकर के माध्यम से एक ही गूंज सुनाई देती है- इंदौर हुआ है नंबर एक, इंदौर रहेगा नंबर एक।
2019 में स्वच्छ भारत मिशन के तहत सबसे स्वच्छ शहर के लिए इंदौर ने हैट्रिक लगाई थी। इंदौर नगर निगम के जोनल प्रभारी मोनेश गावड़े के मुताबिक यहां बच्चों के दृष्टिकोण में बदलाव को लेकर काफी गंभीरता है। यदि उनके माता-पिता नहीं होते तो ये बच्चे खुद सूखे और गीले कचरे को फेंकने के लिए आते हैं। इससे पहले प्रतिदिन उत्पन्न होने वाले कचरे का अधिकांश भाग खुली नालियों या देवगुराड़िया लैंडफिल में फेंका जाता था, ये निजी सफाइकर्मियों पर निर्भर करता था कि वो कैसे इस गंदगी को साफ करें।
तीन वर्षों में शहर कुल डोर-टू-डोर अलग-अलग कचरे के संग्रह में बदल गया है और 1,150 मीट्रिक टन कचरा है जो शहर हर दिन ठिकाने लगाता है। हर रात, वैक्यूम क्लीनर सड़कों को पॉलिश करते हैं। यहां तक कि ऑटोमोबाइल शोरूम ग्राहकों को कार खरीदने के दौरान एक छोटे कूड़ेदान की पेशकश करते हैं। वहीं शहर के बाहरी इलाके में 148 एकड़ के देवगुराड़िया डंपिंग ग्राउंड की सफाई भी बरकरार है।
-इंदौर देश का पहला शहर है, जहां ट्रंचिंग ग्राउंड को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है। उसके स्थान पर लगातार नए प्रयोग किए जा रहे हैं।
-कचरे की 100 प्रतिशत प्रोसेसिंग, बिल्डिंग मैटेरियल और खराब निर्माण सामग्री का कलेक्शन तथा उसका निपटान।
-कचरा उठाने में लगे वाहनों की मॉनिटरिंग के लिए जीपीएस तथा कंट्रोल रूम, हर जोन के लिए अलग-अलग टीवी स्क्रीन।
-29 हजार से अधिक घरों में गीले कचरे से होम कंपोस्टिंग का कार्य।
-देश में पहला डिस्पोजल फ्री मार्केट ।
-पहला शहर जहां लाखों लोगों की मौजूदगी के दो जीरो वेस्ट इवेंट का हुआ आयोजन।
कुछ समय पहले तक मध्य प्रदेश के एसबीएम निदेशक मनीष सिंह को यकीन नहीं था कि स्वच्छता अभियान कायम रह सकता है। लेकिन यहां के लोगों की मदद से ये मुमकिन हो सका है। 2009 बैच के एक आईएएस अधिकारी, सिंह 2016 में नगर आयुक्त थे, जब इंदौर 73 स्वच्छ शहरों में "शर्मनाक" 25 वें स्थान पर था। उनका कहना है कि तभी से इंदौर की स्वच्छ बनाने का संकल्प लिया गया।
