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मां के आखिरी शब्द सुनकर विदेश की नौकरी छोड़ी, जैविक खेती से शुरू किए कैंसर की रोकथाम के प्रयास

Sun, 05 Feb 2023 09:02 PM IST
अर्जुन रिछारिया न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: अर्जुन रिछारिया Updated Sun, 05 Feb 2023 09:02 PM IST
सार

यह कहानी है वैशाली मालवीया की जो इथोपिया में एक शानदार कॅरियर बना चुकीं थी। मां को कैंसर हुआ तो भारत आईं और फिर यहीं जैविक खेती शुरू की। 
 

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वैशाली मालवीया - फोटो : अमर उजाला, इंदौर
वैशाली मालवीया इथोपिया में एचआर फील्ड में प्रोफेशनल थीं। साल 2014 में उन्हें पता चला कि मां को कैंसर है। यह सुनते ही वे भारत आईं और मां की सेवा में लग गईं। बहुत प्रयास के बाद भी वे उन्हें नहीं बचा पाईं। मां ने उन्हें जाने से पहले कहा था कि आज दुनिया में कैंसर का सबसे बड़ा कारण पेस्टीसाइड है और तुम कुछ ऐसा करो कि जो तकलीफ मुझे हुई है वह दूसरों को न हो। इसके बाद उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ देश में ही जैविक खेती शुरू करने का निर्णय लिया। खंडवा के पास उनकी पुश्तैनी जमीन पर वह खेती करती हैं जिसमें उनका भाई राहुल मालवीया पूरा काम बराबरी से संभालता है। 
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राहुल मालवीया - फोटो : अमर उजाला, इंदौर
भाई ने भी छोड़ी सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग की नौकरी
राहुल मालवीया ने बताया कि इसके बाद उन्होंने मां रेणुका फूड्स प्रा. लि. की स्थापना की और किसानों को भी खुद के काम से जोडऩा शुरू किया। राहुल ने सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग की नौकरी छोडक़र यह काम शुरू किया और आज वे इसे एक सफल बिजनेस के रूप में बदल चुके हैं। 

हर काम पैसे के लिए नहीं किया जाता
बहुत कम उम्र में नौकरी छोडऩे के विषय में राहुल कहते हैं कि हर काम पैसे के लिए नहीं किया जाता। सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग की नौकरी छोडक़र मैं खेती में बहुत खुश हूं। यदि आप खेती सही तरीके से करें तो उससे भी अच्छा फायदा कमा सकते हैं। 
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जैविक महोत्सव से दिया किसानों को मंच
राहुल और वैशाली ने इंदौर में जैविक महोत्सव आयोजित किया है जिसमें किसानों को सीधे ग्राहकों से जोडऩे का प्लेटफॉर्म दिया जा रहा है। यह इस महोत्सव का तीसरा साल है। राहुल ने  बताया कि किसान यदि सीधे बाजार में प्रोडक्ट बेचने लगे तो उसका लाभ तीन गुना से अधिक हो जाता है। हम किसानों को जैविक खेती करने और उससे अधिक से अधिक लाभ कमाने के गुर भी सिखाते हैं। 
 
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