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Indore News: विदेश जाएंगे मप्र के बाघ, बदले में मिलेंगे दुर्लभ जानवर, कई देशों से आई डिमांड

Thu, 31 Jul 2025 08:06 PM IST
अर्जुन रिछारिया अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर Published by: अर्जुन रिछारिया Updated Thu, 31 Jul 2025 08:06 PM IST
सार

Indore News: मप्र में बाघों की लगातार बढ़ती संख्या अब संभावनाओं के नए द्वार खोल रही है, कई देशों ने बाघों को लेने के लिए आवेदन दिया है, सरकार इस पर विचार कर रही है। 

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Indore news: Madhya Pradesh tigers in global demand, rare animals to arrive in exchange program
इंदौर के चिड़ियाघर के बाघों की मौज मस्ती। फोटो- जयेश मालवीय - फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
मप्र में बाघों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। 2006 में मप्र में 300 बाघ थे जो 2022 तक 785 हो चुके हैं। मप्र के बाघों को लेने के लिए देश के अन्य राज्यों के साथ ही विदेशों से भी आवेदन आ रहे हैं। सरकार इन आवेदनों पर विचार कर रही है। एनीमल एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत बाघों को देकर सरकार उन दुर्लभ प्रजाति के जानवरों को प्रदेश में लाएगी जो अभी यहां पर नहीं हैं। कूनो में आए चीते भी इसी तरह के एक प्रोग्राम का हिस्सा थे। 
Indore news: Madhya Pradesh tigers in global demand, rare animals to arrive in exchange program
वन विभाग ने बाघों के संरक्षण पर कार्यक्रम आयोजित किया। - फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
दुनियाभर में नजर आएंगे भारत के बाघ
डीएफओ प्रदीप मिश्रा के मुताबिक बाघों की बढ़ती संख्या से सरकार बहुत उत्साहित है। हम बाघों के लिए और भी अधिक अनुकूल माहौल तैयार कर रहे हैं। इसके लिए जंगल, पहाड़ से लेकर हर स्तर पर उनके लिए अनुकूल परिवेश तैयार किए जा रहे हैं। भविष्य में बाघों की बढ़ती संख्या से प्रदेश के लिए संभावनाओं के कई द्वार खुलेंगे। सरकार एनीमल एक्सचेंज की नीति को आगे बढ़ाने पर विचार कर रही है। कई देशों ने भारत सरकार ने बाघों की डिमांड के लिए आवेदन किए हैं। इसके लिए अनुकूल नीतियां बनाई जा रही हैं। जल्द ही हमारे बाघ दुनियाभर के देशों में दिखाई पड़ सकते हैं। 

इंदौर रीजन में भी बढ़ रही बाघों की संख्या 
इंदौर-देवास और बड़वाह वन मंडल का जंगल आपस में जुड़ा हुआ है। वन विभाग के मुताबिक इन जंगलों में 5 से अधिक बाघ होने की संभावना है। 5 साल पहले इनकी संख्या तीन थी। यही नहीं मलेंडी में नजर आया बाघ रायसेन तक के जंगल में पहुंच गया था। तीन महीने पहले मानपुर में बाघ दिखा था। दरअसल, रालामंडल के पीछे से मानपुर, चोरल, महू तक 5 हजार हेक्टेयर का विशाल वन क्षेत्र बाघ के विचरने के लिए पर्याप्त है। इस वजह से शहरी क्षेत्र में नजर नहीं आ रहा है।

जहां बाघ वहां पर्यावरण संतुलन
वन विभाग ने इसी सप्ताह बाघों के संरक्षण पर एक कार्यक्रम भी आयोजित किया। सीसीएफ पीएन मिश्रा ने कहा कि जहां बाघ रहते हैं मतलब वहां का पर्यावरण संतुलित है। मप्र में बाघों के संरक्षण के लिए कई क्षेत्र हैं और वन विभाग का प्रयास है कि और भी जोन डवलप किए जाएं। इस कार्यक्रम में देवास की ग्रीन आर्मी समेत इंदौर की कई संस्थाओं ने भाग लिया। 
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