मैं मंदिर में हमेशा सेवा करता हूं और मेरा बेटा भी ईश्वर में बहुत विश्वास करता था। वह मंदिर के हर कार्यक्रम में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेता था। रामनवमी के दिन भी वह सुबह से ही नहाकर तैयार हो गया और गेट पर बैठा था। मेरे आते ही उसने कहा कि पापा मंदिर चलते हैं। मुझे कुछ काम था फिर भी मैं उसे समय निकालकर मंदिर ले गया। मंदिर में हवन चल रहा था। मुझे कुछ काम याद आ गया और मैं उसे यह बोलकर मंदिर से बाहर आया कि बस आ रहा हूं, अच्छे से पूजा करना। जैसे ही मैं मंदिर से बाहर निकला वह हमेशा के लिए मेरी आंखों से ओझिल हो गया। यह बातें कमल खत्री ने चर्चा में कही जिनका 11 साल का मासूम बेटा सोमेश इंदौर में हुए बावड़ी हादसे में उनसे हमेशा के लिए दूर चला गया। गौरतलब है कि जूनी इंदौर के स्नेह नगर के बेलेश्वर मंदिर में 30 मार्च रामनवमी के दिन बावड़ी धंसने से 36 श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी। सभी लोग मंदिर में रामनवमी की पूजा कर रहे थे और वे जहां पर बैठे थे वह जगह बावड़ी की छत थी। जैसे ही छत गिरी सभी लोग गहरी बावड़ी में गिर गए और हादसा हो गया।
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कमल
- फोटो : न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
कमल ने बताया कि वह हमेशा से मंदिर में सेवा कार्य करते हैं और गार्डन में भी काम करते हैं। बेटा सोमेश बहुत ही चंचल है। वह हमेशा अपनी शरारतों से कालोनी के लोगों के चेहरे पर मुस्कान बिखेरता रहता था। आसपास के लोग हमेशा कहते थे कि उसकी शरारतें सभी को खुश रखती हैं। गार्डन में बच्चों के साथ खेलना हो या फिर किसी कार्यक्रम में भाग लेना हो। सोमेश हमेशा आगे रहता था। उस दिन भी रामनवमी थी। वह सुबह से तैयार होकर बैठा था कि उसे मंदिर जाकर पूजा करना है। उसने मुझे कहा कि पापा सबसे पहले मंदिर चलेंगे फिर बाकी काम करेंगे। मुझे नहीं पता था कि मैं उसे आखिरी बार मंदिर ले जा रहा हूं।
समय पर सेना बुला लेते तो बच सकती थी कई जानें
कमल के छोटे भाई रवि ने कहा कि कालोनी के लोगों ने प्रशासन को शाम को लिस्ट सौंपी कि कितने लोग मिसिंग हैं। प्रशासन शाम तक यह बात मानने को ही तैयार नहीं था कि अभी भी बड़ी संख्या में लोग अंदर फंसे हैं। इस लिस्ट के बाद प्रशासन ने सेना को बुलाया। यदि सुबह ही सेना को बुला लिया जाता तो बहुत सी जानें बच सकती थी।