शहर में शनिवार को रुपये-पैसे और सोने-चांदी, कपड़े, खिलौनों की बारिश हुई। झूमते-नाचते लोग अपनी आंखों के सामने ये सब होता देख रहे थे और ये सामग्री लूटने के लिए लालायित थे। दस साल का बालक रथ पर बैठा था और सांसारिक वैभव लुटा रहा था।
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वरुण रथ पर सवार सिद्धम
- फोटो : सोशल मीडिया
दरअसल इंदौर में दस वर्षीय बालक सिद्धम जैन दीक्षा ले रहा है। वह संसार से विरक्त होकर वैराग्य में जा रहा है। बाल संत बनने की ओर उसके कदम बढ़े हैं। इसके चलते शनिवार को सिद्धम का वर्षीदान वरघोड़ा निकाला गया। रेसकोर्स रोड स्थित उपाश्रय से निकले वरघोड़ा में सिद्धम जैन सज-धजकर आया और वरुण रथ पर सवार हुआ। समाजजनों ने उसे कंधे पर उठाया और रथ तक ले गए। इस रथ पर बैठकर सिद्धम सोने, चांदी और आर्टिफिशियल गहने, कपड़े, खिलौने, बर्तन लुटा रहा था। बरकत का प्रतीक मानकर इन्हें लूटने के लिए समाजजजन लालायित थे।
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साधु वेश धारण करने से पहले सज धजकर आया सिद्धम
- फोटो : सोशल मीडिया
थे। वर्षीदान वरघोड़ा में महिलाएं और आदिवासियों का दल नृत्य करते हुए चल रहा था। धूमधाम से ये वरघोड़ा निकला। इस यात्रा में 26 मई को रतलाम में दीक्षा लेने वाले दीक्षार्थी दस वर्षीय ईशान कोठारी खुली जीप में सवार था जबकि 14 वर्षीय जुड़वां बहनें पलक और तनिष्का चाणोदिया रथनुमा बग्घी में सवार थीं। 15 मई को सिद्धम की दीक्षा हिंकारगिरी पर होगी। वह साधुवेश धारण करेगा और उसे नया नाम मिलेगा। दीक्षा समारोह में शामिल होने के लिए अन्य प्रदेशों के समाजजन भी आएंगे।