बारिश के मौसम में भुट्टे खाना किसे पसंद नहीं। लेकिन जब बात कटनी के स्वीट कॉर्न की आती है तो लोगों के मुंह में पानी आ ही जाता है, क्योंकि कटनी के स्वीट कॉर्न न सिर्फ मीठे बल्कि बड़े नरम और दानेदार होते है। इन्हें बच्चे से लेकर बूढ़े भी बड़े चाव से खाते हैं। स्वीट कॉर्न के शौकीन मध्यप्रदेश ही, नहीं बल्कि देश के अलग-अलग हिस्सों में भी हैं जो अक्सर ऑर्डर देकर मंगवाया करते हैं।
कटनी मुख्यालय से 35 किमी दूर स्थित तेवरी ग्राम जिसकी पहचान स्वीट कॉर्न बना हुआ है। यहां के किसानों ने परंपरागत खेती को छोड़कर स्वीट कॉर्न की खेती ओर अपना रुख कर लिया है। वजह कम वक्त में ज्यादा मुनाफा जो दे रही है। हालांकि स्वीट कॉर्न की खेती शुरू से इतनी प्रचलित नहीं थी। इसके लिए कृषि विभाग ने किसानों के बीच जाकर महीनों प्रशिक्षण दिया। फसल से निकले स्वीट कॉर्न का प्रचार-प्रसार पूरे मध्यप्रदेश के साथ-साथ देश भर में करवाते हुए अपनी अहम भूमिका निभाई।
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स्वीट कॉर्न की खेती करने वाले कृषक
- फोटो : अमर उजाला
कृषि अधिकारी मनीष मिश्रा बताते हैं कि शुरू में हम लोगों ने स्वीट कॉर्न की खेती के लिए बहुत मेहनत की। लेकिन किसानों को जैसे-जैसे फायदा मिलने लगा तो उन्होंने परंपरागत खेती छोड़ इसकी खेती करने लगे। स्वीट कॉर्न की खेती कटनी जिले के तेवरी ग्राम से शुरू हुई थी। उसके बाद आस-पास के ग्राम सहित बाकी विकास खंडों में होने लगी है। जो अब मध्यप्रदेश, हैदराबाद, तेलंगाना और मुंबई सहित देश के कई राज्यों में जा रहे हैं। इससे किसानों को ज्यादा मुनाफा हो रहा है। अभी कृषि विभाग उनकी फसल को और बेहतर बनाने के लिए नैनो डीएपी के माध्यम से बीज का उपचार करा रहा है। ताकि स्वीट कॉर्न की उत्पादकता और बढ़े, जिससे किसानों को लाभ मिल सके।
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हाईवे पर स्वीट कॉर्न की दुकान
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तेवरी के किसान तीरथ प्रसाद कुशवाहा बताते हैं कि शुरू में वे पांच एकड़ में स्वीट कॉर्न की खेती करते थे। लेकिन मुनाफा देखते हुए अब 10 एकड़ में करने लगे हैं। इसे बेचने के लिए उन्हें ज्यादा मशक्कत भी नहीं करनी पड़ती, क्योंकि ज्यादातर भुट्टे (स्वीट कॉर्न) हाईवे में हमारे द्वारा लगाई गई दुकानों से बिक जाते हैं। उसका स्वाद लेने शहर के लोग प्रतिदिन आते हैं।
खेती के फायदे बताते हुए मझगवां के किसान शालिग्राम कुशवाहा ने कहा कि स्वीट कॉर्न की खेती महज दो महीने की होती है। एक एकड़ में तकरीबन 10 से 12 हजार भुट्टे होते हैं। उन्हें थोक मंडी में सात रुपये नग से बचते है। वहीं, फुटकर में 25 से 30 रुपये भूनकर देते हैं।
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स्वीट कॉर्न की दुकान पर बैठीं कृषक रुकमणी
- फोटो : अमर उजाला
हाईवे किनारे भुट्टे की दुकान पर बैठी महिला रुकमणी कुशवाहा ने बताया कि वह खुद अपने पति के साथ स्वीट कॉर्न की खेती करने के साथ मुख्य मार्ग पर फुटकर दुकान लगाने का काम करती हैं। रुकमणी बताती हैं कि वे पिछले 13 साल से भुट्टे की खेती करती आ रही हैं। लेकिन स्वीट कॉर्न में बढ़ते मुनाफे को देखते हुए इसकी खेती बढ़ाई और अब छह एकड़ में स्वीट कॉर्न लगाते हुए 50 से 70 हजार रुपये महीने का कमा लेती हैं। हाइवे किनारे मेरी फुटकर दुकान से प्रतिदिन डेढ़ से दो सौ भुट्टे स्वीट कॉर्न सहित बिक जाते हैं। लेकिन रविवार के दिन बहुत ज्यादा भीड़ रहती है, जिससे बिक्री भी अच्छी होती है। रुकमणि बताती हैं कि वे स्वीट कॉर्न के भुट्टे 25 से 30 रुपये प्रति नग भूनकर बेचती हैं। बाकी यहां ट्रक वाले आकर एक साथ ले जाते हैं।
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स्वीट कॉर्न की खेती
- फोटो : अमर उजाला
दो माह में होने वाली स्वीट कॉर्न की खेती अब किसानों के साथ ही स्थानीय लोगों को रोजगार भी दे रही। इससे किसान कम वक्त में ज्यादा मुनाफा कमाते हुए अपना जीवन बेहतर कर रहा है। वहीं, स्वीट कॉर्न का स्वाद देश के कोने-कोने में पहुंचकर कटनी जिले को नई पहचान दिला रहा है।