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देवास: भाजपा में बवाल, जिलाध्यक्ष पर तानाशाही के आरोप, पदाधिकारी ने इस्तीफा देकर लिखा-परिवारवाद से भरी हुई है कार्यकारिणी
Tue, 29 Mar 2022 05:15 PM IST
चंद्रप्रकाश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देवास
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देवास
Published by: चंद्रप्रकाश शर्मा
Updated Tue, 29 Mar 2022 05:15 PM IST
सार
भाजपा में इन दिनों बवाल मचा हुआ है। भाजपा जिलाध्यक्ष पर तानाशाही के आरोप लगाए गए हैं। एक पदाधिकारी ने इस्तीफा देकर सोशल मीडिया पर दर्द बयां किया है। इसमें पार्टी पर परिवारवाद के आरोप लगाए हैं।
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भाजपा जिलाध्यक्ष खंडेलवाल और भाजयुमो जिलाध्यक्ष सोनी
- फोटो : सोशल मीडिया
भाजपा में इन दिनों खलबली मची हुई है। इसकी वजह है भाजपा का संगठन। नियुक्तियों में मनमानी और तानाशाही के आरोप लग रहे हैं। पार्टी के पदाधिकारी खुलकर मोर्चा खोल रहे हैं और भाजपा जिलाध्यक्ष निशाने पर हैं। जनप्रतिनिधियों से भी जिलाध्यक्ष तालमेल नहीं बैठा पा रहे हैं, नतीजतन भाजपा में गुटबाजी के साथ आक्रोश भी बढ़ रहा है।
भाजपा कार्यकर्ता की पीड़ा जो सोशल मीडिया पर हुई बयां
- फोटो : सोशल मीडिया
पद मिलने के बाद दिया इस्तीफा
अब तक तो सब अंदरूनी ही चल रहा था और जिला भाजपा के कुछ पदाधिकारियों की मनमानी की शिकायतें हो रही थी मगर सोमवार को जब भाजयुमो की कार्यकारिणी घोषित हुई तो बवाल मच गया। इस कार्यकारिणी में इतने पद बांट दिए कि सवाल उठने लगे। इतना ही नहीं नेतापुत्रों पर हद से ज्यादा मेहरबानी दिखाई गई। जिलाध्यक्ष ने अपनों को विशेष तरजीह दी। इसके बाद जिला उपाध्यक्ष बनाए गए पवन सैंधव ने सोशल मीडिया पर पोस्ट लिख दी। इसमें लिखा कि
जिला नेतृत्व ने जो जिला उपाध्यक्ष का दायित्व दिया उसका आभार प्रकट करता हूं लेकिन क्षमा चाहता हूं मैं इस दायित्व का निर्वहन नहीं कर पाउंगा। भाजपा जिलाध्यक्ष जी की तानाशाही, परिवारवाद को बढ़ावा, निष्ठावान कार्यकर्ताओं का हनन हुआ है। भाजपा का कार्यकर्ता बनकर काम करूंगा। इस पोस्ट पर कई लोगों के कमेंट आए और जिलाध्यक्ष खंडेलवाल का विरोध जताया।
इस तरह नेता पुत्रों दी गई कार्यकारिणी में जगह
- फोटो : सोशल मीडिया
नेता पुत्रों की दी गई कार्यकारिणी में जगह
यह सब चल ही रहा था कि एक पोस्ट और आई। इसे भी शेयर किया गया। इसमें लिखा कि मोदी जी ने 3 दिन पहले ही परिवारवाद का विरोध किया है जबकि भारतीय जनता युवा मोर्चा की कार्यकारिणी परिवारवाद से पूर्ण रूप से भरी हुई है। जिसमें रायसिंह सेंधव का भतीजा लोकेंद्र टांक, नंदकिशोर पाटीदार का बेटा मनीष पाटीदार, नरेंद्र सिंह राजपूत का भतीजा रजत राजपूत, निरंजन सेंगर का बेटा कुणाल सेंगर, महेश पाटीदार का भतीजा राजकुमार पाटीदार, बलराम दावठा का भतीजा राजकमल दावठा, पृथ्वीराज सिंह रजापुर का भतीजा पुष्पराज सिंह, गौतम राजपूत का भतीजा कृष्ण पाल सिंह राजपूत, राजेंद्र सिंह राजपूत के रिश्तेदार सुनील चावड़ा सभी का चयन मात्र परिवारवाद के अलावा कुछ नहीं। जबकि युवा मोर्चा का संगठन निष्ठ कार्यकर्ता रैलियों में भीड़ बढ़ाने व रोड पर नारेबाजी ही करता रहेगा।
जिला महामंत्री को लेकर खींचतान
जो कार्यकारिणी घोषित की गई है उसमें जिला महामंत्री का एक पद रिक्त है। बताया जा रहा है कि जिलाध्यक्ष अपने समर्थक को इस बद पर काबिज करना चाहते हैं तो देवास विधायक की ओर से दूसरा नाम दिया गया है। नाम में पेंच फंसा होने के कारण इस पद को रिक्त रखा गया। खबर यह भी है कि जिलाध्यक्ष सीधे भोपाल से ही नियुक्ति करवाएंगे, क्योंकि देवास विधायक से उनकी पटरी नहीं बैठ पा रही है। कई मौकों पर ये नजर आ चुका है। भाजपा में भी चर्चा है कि पूरी भाजपा को कुछ ही लोग ही चला रहे हैं जो खुद को संगठन का सर्वेसर्वा मान रहे हैं। इसके चलते पार्टी की स्थिति बिगड़ रही है और कार्यकर्ताओं में असंतोष पनप रहा है।
कांग्रेस ने भी साधा निशाना
भाजपा में चल रही गुटबाजी को लेकर कांग्रेस भी आक्रामक होने लगी है। अपने सोशल मीडिया अकाउंट से कांग्रेस भाजपा पर निशाना साध रही है कि कांग्रेस पर परिवारवाद का आरोप लगाने वाली भाजपा के घर में ही युवाओं का विरोध सामने आ रहा है। इधर सूत्रों का कहना है कि इस पूरे घटनाक्रम के पीछे कुछ बड़े नेता भी हैं जो पर्दे के पीछे से विरोध कर रहे हैं। कहा तो यह भी जा रहा है कि ऊपर तक मामले की शिकायत पहुंचाई जा रही है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद भाजपा की गुटबाजी और अंतर्कलह को लेकर पार्टी पदाधिकारी चर्चा कर रहे हैं।
यह सब चल ही रहा था कि एक पोस्ट और आई। इसे भी शेयर किया गया। इसमें लिखा कि मोदी जी ने 3 दिन पहले ही परिवारवाद का विरोध किया है जबकि भारतीय जनता युवा मोर्चा की कार्यकारिणी परिवारवाद से पूर्ण रूप से भरी हुई है। जिसमें रायसिंह सेंधव का भतीजा लोकेंद्र टांक, नंदकिशोर पाटीदार का बेटा मनीष पाटीदार, नरेंद्र सिंह राजपूत का भतीजा रजत राजपूत, निरंजन सेंगर का बेटा कुणाल सेंगर, महेश पाटीदार का भतीजा राजकुमार पाटीदार, बलराम दावठा का भतीजा राजकमल दावठा, पृथ्वीराज सिंह रजापुर का भतीजा पुष्पराज सिंह, गौतम राजपूत का भतीजा कृष्ण पाल सिंह राजपूत, राजेंद्र सिंह राजपूत के रिश्तेदार सुनील चावड़ा सभी का चयन मात्र परिवारवाद के अलावा कुछ नहीं। जबकि युवा मोर्चा का संगठन निष्ठ कार्यकर्ता रैलियों में भीड़ बढ़ाने व रोड पर नारेबाजी ही करता रहेगा।
जिला महामंत्री को लेकर खींचतान
जो कार्यकारिणी घोषित की गई है उसमें जिला महामंत्री का एक पद रिक्त है। बताया जा रहा है कि जिलाध्यक्ष अपने समर्थक को इस बद पर काबिज करना चाहते हैं तो देवास विधायक की ओर से दूसरा नाम दिया गया है। नाम में पेंच फंसा होने के कारण इस पद को रिक्त रखा गया। खबर यह भी है कि जिलाध्यक्ष सीधे भोपाल से ही नियुक्ति करवाएंगे, क्योंकि देवास विधायक से उनकी पटरी नहीं बैठ पा रही है। कई मौकों पर ये नजर आ चुका है। भाजपा में भी चर्चा है कि पूरी भाजपा को कुछ ही लोग ही चला रहे हैं जो खुद को संगठन का सर्वेसर्वा मान रहे हैं। इसके चलते पार्टी की स्थिति बिगड़ रही है और कार्यकर्ताओं में असंतोष पनप रहा है।
कांग्रेस ने भी साधा निशाना
भाजपा में चल रही गुटबाजी को लेकर कांग्रेस भी आक्रामक होने लगी है। अपने सोशल मीडिया अकाउंट से कांग्रेस भाजपा पर निशाना साध रही है कि कांग्रेस पर परिवारवाद का आरोप लगाने वाली भाजपा के घर में ही युवाओं का विरोध सामने आ रहा है। इधर सूत्रों का कहना है कि इस पूरे घटनाक्रम के पीछे कुछ बड़े नेता भी हैं जो पर्दे के पीछे से विरोध कर रहे हैं। कहा तो यह भी जा रहा है कि ऊपर तक मामले की शिकायत पहुंचाई जा रही है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद भाजपा की गुटबाजी और अंतर्कलह को लेकर पार्टी पदाधिकारी चर्चा कर रहे हैं।
