पर्यटन नगरी में जहां इन दिनों संस्कृति का सैलाब सा आया हुआ है। नृत्य समारोह के बहाने भारतीय कलाओं का एक उदात्त स्वरूप यहां देखने को मिल रहा है। समारोह के छठे दिन की शाम भी अनूठी थी, फागुन के रंग में इठलाती और मदमाती सी, शाम के भुरकुटे में आसमान से झरते रजत कण सुखद अहसास करा रहे थे। खजुराहो नृत्य महोत्सव का आज छठा दिन था और आज का आगाज़ एक ऐसी नृत्यांगना ने किया जिसे समाज अलग नजरिये से देखता आ रहा है। देविका देवेंद्र एस मंगलामुखी एक ट्रांसजेंडर नृत्यांगना हैं। उन्होंने समाज का बहुत विरोध झेलकर आज जो मुकाम पाया है उस पर अब यही समाज फक्र भी करता है।
2 of 4
खजुराहो नृत्य समारोह का छठा दिन
- फोटो : अमर उजाला
जयपुर घराने से ताल्लुक रखने वाली देविका ने चलन से थोड़ा परे जाकर मुगलिया शैली में कथक की प्रस्तुति दी। "शाम ए रक़्स" नाम की इस पेशकस में उन्होंने प्रख्यात सूफी गायक खुसरो के कलाम "या रे मन बया बया" पर भावपूर्ण प्रस्तुति दी। एक ताल में बंधी इस प्रस्तुति में जयपुर घराने की देविका ने मानो लखनऊ को मंच पर ला उतारा। इसके बाद उन्होंने सरगम के अंग में सलाम की प्रस्तुति दी। सलाम मुगल दरबारों में किए जाने वाले कथक का एक खास अंग रहा है। जो तिस्त्र जाति में था। अगली पेशकश में देविका में तीनताल में पारंपरिक शुध्द नृत्य किया। इसमें उन्होंने उठान, ठाट, टुकड़े विविध परनें, और सवाल जवाब की सूरत में तत्कार पेश की। उन्होंने राधा कृष्ण की छेड़छाड़ पर गतभाव भी दिखाया। नृत्य का समापन उन्होंने बड़े गुलाम अली साहब की प्रसिद्ध ठुमरी "याद पिया की आए" पर अभिनय नृत्य से किया। कहरवा की विलंबित से द्रुत होती लय पर उन्होंने नृत भाव से कई रंग भरे और बिखेर दिए।
3 of 4
खजुराहो नृत्य समारोह का छठा दिन
- फोटो : अमर उजाला
दूसरी प्रस्तुति में भुवनेश्वर से तशरीफ़ लाए रुद्राक्ष फाउंडेशन के कलाकारों ने ओडिसी नृत्य के वैभव के दर्शन कराए। प्रसिद्ध ओडिसी नर्तक विचित्रनन्द स्वैन के शिष्यों में शुमार यज्ञदत्त प्रधान दिशानन साहू, विचित्र बेहरा, संतोष राम,समीर पाणिग्रही, सुरेंद्र प्रधान, संजीव कुमार जैन एवं रस्मरंजन ने इस प्रस्तुति में भागीदारी की। पहली प्रस्तुति कृष्ण और काली की थी। प्रस्तुति में कृष्ण और काली के तमाम रूपाकारों को नृतभावों में पिरोते हुए इन नर्तकों ने बताया कि कृष्ण काली में कोई भेद नहीं है वे एक ही हैं। अगली प्रस्तुति महाभारत से थी चक्रव्यूह नाम की इस प्रस्तुति में अभिमन्यु के शौर्य पराक्रम कौरवों की कुटिल चालों को नृत्यभावों में पेश किया। राग और ताल मालिका में निबद्ध इन प्रस्तुतियों में संगीत रामहरि का था जबकि रिदम धनेश्वर का था।
4 of 4
खजुराहो नृत्य समारोह का छठा दिन
- फोटो : अमर उजाला
कार्यक्रम का समापन नयनिका घोष के कथक नृत्य से हुआ। वे दिल्ली में निनाद फाउंडेशन भी चलाती हैं। उन्होंने अपने नृत्य का आगाज़ शिव की वंदना से किया। राग योग के सुरों और आड़ा चौताल की बंदिश - शिवशंकर कर डमरू बाजे" पर आपने नृत भावों से शिव के मूर्त अमूर्त या आकार निराकार स्वरूप को पेश किया। यह रचना उन्होंने कथक महाराज को समर्पित की। अगली प्रस्तुति शुद्ध नृत्य की रही। इसमें उन्होंने त्रिताल में उठान, परन, परन आमद, तोड़े, टुकड़े परमेलु की प्रस्तुति दी। आपने बिरजू महाराज द्वारा रचित एवं कंपोज की गई खमाज की ठुमरी- "ऐरी सखी का से कहूं" एवं सूफियाना ठुमरी- "ऐरी सखी मोसे" पर भावपूर्ण प्रस्तुति दी। अंत में तराने के साथ आपने नृत्य का समापन किया।