भोपाल से पीथमपुर आए जहरीले कचरे को लेकर जारी विरोध शनिवार को थम गया। पीथमपुर में रात को धरना समाप्त हो गया और प्रदर्शनकारी अपने घरों की तरफ लौट गए। अफसरों ने आश्वासन दिया है कि कचरा फिलहाल नहीं जलाया जाएगा।
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पीथमपुर में हालात सामान्य
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शनिवार को पीथमपुर में बाजार और फैक्टरियां खुली नजर आई। व्यापारियों ने दुकानें खोली और सड़कों पर भी सामान्य आवाजाही नजर आई। शुक्रवार को विरोध प्रदर्शन का केंद्र रहे बस स्टैंड पर शनिवार को यात्री नजर आए। उपनगरीय बसों की आवाजाही भी स्टैंड पर शुरू हो गई। यहां पुलिस बल जरूर तैनात रहा, लेकिन हालत सामान्य दिखे।
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ट्रक से पीथमपुर जाता जहरीला कचरा
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क्यों हो रहा विरोध
बता दें कि भोपाल गैस त्रासदी के 40 साल बाद यूनियन कार्बाइड कारखाने का 337 टन जहरीला कचरा गुरुवार तड़के इंदौर के पास स्थित पीथमपुर की एक औद्योगिक अपशिष्ट निपटान इकाई में पहुंचा दिया गया था। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था में ग्रीन कॉरिडोर बनाकर जहरीले अपशिष्ट को 12 सीलबंद कंटेनर ट्रकों में भोपाल से 250 किलोमीटर दूर धार जिले के पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र की अपशिष्ट निपटान इकाई में भेजा गया। एक निजी कंपनी द्वारा संचालित इस यूनिट के आस-पास बड़ी तादाद में पुलिस बल तैनात कर दिया था।
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लोगों ने किया विरोध
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इधर, स्थानीय नागरिक समूहों ने यूनियन कार्बाइड कारखाने के जहरीले कचरे को पीथमपुर में नष्ट नहीं किए जाने की मांग को लेकर इस औद्योगिक कस्बे में विरोध प्रदर्शन जारी रखने की घोषणा की थी। इसी को लेकर शुक्रवार को पीथमपुर में मामला बिगड़ गया। यहां के पावर हाउस चौराहे पर भीड़ ने पुलिस पर पथराव कर दिया। इसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज कर प्रदर्शनकारियों को खदेड़ा। इस दौरान पुलिसकर्मी एक महिला को घसीटते नजर आए।
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घटनास्थल पर तैनात पुलिस
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शाम को भी ही छत्र छाया चौराहे पर भी पुलिस ने लोगों पर लाठियां चलाई। वहीं दोपहर में पीथमपुर के ही गुडलक चौराहे पर विरोध प्रदर्शन कर रहे लोगों पर भी पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर वाटर कैनन का इस्तेमाल कर उन्हें खदेड़ा। दरअसल, प्रदर्शनकारियों ने चौराहे पर चक्काजाम कर दिया। जिससे हाईवे पर करीब 7 किलोमीटर तक वाहन फंस गए।