मध्य प्रदेश भाजपा में संगठन चुनाव चल रहे है। इस बीच, पार्टी में अंदरूनी विवाद लगातार सामने आ रहे हैं। पार्टी के नेता एक दूसरे के खिलाफ बोल रहे हैं। हाल ही में विंध्य में देवतालाब से विधायक गिरीश गौतम और मऊगंज विधायक प्रदीप पटेल आमने सामने हैं। इससे पहले भी अलग-अलग रीजनल में नेताओं के विवाद खुलकर सामने आ चुके हैं। पार्टी सूत्रों की माने तो इसकी शिकायत पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंच गई है। ऐसे में प्रदेश में चल रही खींचतान को सुलझाने के लिए प्रदेश प्रभारी महेंद्र सिंह, राष्ट्रीय सह-संगठन महामंत्री शिवप्रकाश और क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल को सक्रिय भूमिका निभाने के निर्देश दिए हैं।
2 of 5
गिरीश गौतम और प्रदीप पटेल
- फोटो : Amar Ujala
गौतम और पटेल में टकराव क्यों?
देवतालाब विधानसभा से विधायक गिरीश गौतम और मऊगंज से विधायक प्रदीप पटेल हैं। इसका कारण है कि देवतालाब विधानसभा क्षेत्र में एक नाबालिग के अपहरण के मामले में विधायक प्रदीप पटेल के दबाव में एक टीआई और एएसआई को सस्पेंड कर दिया गया। मऊगज विधायक पटेल की देवतालाब क्षेत्र में दखलंदाजी विधायक गिरीश गौतम को पसंद नहीं आई। उन्होंने पटेल पर तंज कसते हुए कहा कि लगता है कि उनके क्षेत्र में कोई समस्या नहीं है। इसलिए, देवतालाब विधानसभा में दखल दे रहे हैं। इस पर पटेल ने कहा कि वह पार्टी के वरिष्ठ नेता है। उन्होंने किस तारतम्य में ऐसा कहा, यह तो वहीं बता सकते हैं।
3 of 5
रीति पाठक और राजेंद्र शुक्ला।
- फोटो : Amar Ujala
रीति पाठक ने डिप्टी सीएम से क्या कहा?
सीधी से विधायक रीति पाठक ने कुछ दिन पहले ही उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। उन्होंने एक कार्यक्रम में मंच से डिप्टी सीएम को कहा कि वह रीवा के साथ ही सीधी का भी विकास करें। सीधी में अस्पताल के विकास के लिए आई सात करोड़ रुपये की राशि गायब हो गई। उन्होंने छह से सात बार पत्र लिखा, लेकिन उसका कोई जवाब नहीं दिया गया। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों पर उनके क्षेत्र की समस्याओं को नजरंदाज करने का भी आरोप लगाया था।
4 of 5
भूपेंद्र सिंह और गोविंद सिंह राजपूत
- फोटो : Amar Ujala
भूपेंद्र सिंह और गोविंद सिंह में टकराव जारी
उधर, बुंदेलखंड में पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह और मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के बीच टकराव जारी है। 2020 में गोविंद सिंह राजपूत ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ भाजपा में शामिल हुए। भूपेंद्र सिंह पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के करीबी हैं। वहीं, गोविंद राजपूत सिंधिया समर्थक हैं। भूपेंद्र सिंह का आरोप है कि गोविंद सिंह राजपूत ने भाजपा कार्यकर्ताओं को परेशान किया है। वह उनको दिल से कभी स्वीकार नहीं करेंगे। वहीं, राजपूत भी कई बार कह चुके हैं कि एक विधायक अपने आप को पार्टी से बड़ा मानता है। यह मामला भी केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंच चुका है।
5 of 5
ज्योतिरादित्य सिंधिया और नरेंद्र सिंह तोमर।
- फोटो : Amar Ujala
सिंधिया और तोमर समर्थकों में भी तकरार
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थकों और विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के गुटों के बीच भी तनाव की स्थिति बनी हुई है। सूत्रों का कहना है कि पार्टी की गुटबाजी का असर बीते चुनावों पर भी पड़ा है। रामनिवास रावत की विधानसभा उपचुनाव में हार को इसी का परिणाम माना जा रहा है।
ऐसे सुलझाया जाएगा विवाद?
पार्टी सूत्रों के अनुसार, असंतुष्ट नेताओं को संतुष्ट करने के लिए उन्हें विभिन्न पदों पर समायोजित किया जाएगा। मंत्रिमंडल में जगह नहीं पाने वाले विधायकों को बोर्ड और निगमों में स्थान दिया जाएगा। कुछ नेताओं को सरकार में महत्वपूर्ण भूमिकाएं दी जा सकती हैं।