Ram Temple: बैतूल के चंदेल ने सीताराम और ॐ अक्षरों को जोड़कर लिखा 1200 पन्नों का ग्रंथ, लग गए आठ साल
Ram Temple In Ayodhya: अयोध्या में रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा को लेकर पूरे देश में उत्साह का माहौल है। ऐसे में रामभक्तों की चर्चा जरूरी है। बैतूल के केदार सिंह चंदेल ने आठ साल की मेहनत में अपनी रामभक्ति प्रदर्शित की है।
केदार सिंह की राम भक्ति की बहुत ही अलग झलक उनके घर में दिखती है। घर के मुख्य द्वार पर "मंगलम" और पीछे "जय जय श्री राम" लिखा हुआ है। इसके बाद प्रकृति प्रेम को दर्शाता हुआ एक सुंदर बगीचा है। उसमें पौधों की हरियाली है। केदार सिंह के घर में मुख्य आकर्षण का केंद्र उनकी दीवारों पर रामायण की लिखी चौपाइयां हैं, जो कुछ न कुछ सीखने को प्रेरित करती हैं।
मानस की एक प्रति अयोध्या भेजना चाहते हैं
सीता राम और ॐ अक्षरों से रामचरित मानस लिखने वाले केदार सिंह चंदेल बताते हैं कि अवधी में रामचरित मानस को लिखा गया है। 1200 पेज की इस किताब को पूरा लिखने में आठ साल लग गए। मैं चाहता हूं कि इसकी और भी प्रतियां छापी जाएं। साथ ही एक कॉपी को अयोध्या भेजा जाए।
अब वाल्मीकि रामायण लिखेंगे केदार
केदार सिंह यह भी बताते हैं कि होश संभालने के बाद से ही उन्होंने राम कार्य जारी रखा, कभी राम नाम लिखकर कागजों को अयोध्या के श्री राम नाम बैंक भेजा। कभी ऐसे ही अक्षरों से अक्षरों को जोड़कर हनुमान चालीसा और सुंदरकांड लिखना, और फिर इसी तरह सीता में राम और राम में सीता लिखकर रामचरित मानस के सात कांड लिख दिए। अब, केदार सिंह का सपना है कि वह वाल्मीकि की रामायण को संस्कृत में भी लिखें।
खेती-किसानी करते रहे केदार सिंह चंदेल
केदार सिंह चंदेल बैतूल जिले के भोगीतेड़ॉ ग्राम के निवासी हैं। उन्होंने अपनी पढ़ाई बीकॉम और एलएलबी से पूरी की हैं। हालांकि, खेती-किसानी को उन्होंने अपना पेशा बनाया। इससे अपने परिवार का पालन-पोषण किया। केदार सिंह के परिवार में उनकी माताजी, पत्नी और पांच बच्चे हैं, जिनमें तीन बेटे और दो बेटियां हैं। अपनी राम भक्ति के साथ-साथ केदार सिंह ने अपने परिवार के मुखिया होने का कर्तव्य भी पूरी तरह निभाया है। उनका एक बेटा आज डेंटिस्ट है। दो बेटे खेती करते हैं।
बैतूल से कुलदीप भाटिया
