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Wolf Attack: आदमखोर होने के बाद नहीं सुधरता भेड़िया... 15 दिन अलग रखने पर भी नहीं होता कोई असर, ये है वजह

Sat, 14 Sep 2024 01:47 PM IST
शाहरुख खान गौरी त्रिवेदी, संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
गौरी त्रिवेदी, संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ Published by: शाहरुख खान Updated Sat, 14 Sep 2024 01:47 PM IST
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wolf does not improve even after becoming a man-eater even if kept separately for 15 days there is no effect
Wolf Attack - फोटो : अमर उजाला
अवध क्षेत्र में वन विभाग की टीमों ने कुछ भेड़िये पकड़ लिए हैं। इसके बाद भी भेड़ियों के इंसानों पर हमले जारी हैं। इस बीच सियार, बाघ और तेंदुओं के हमले भी बढ़ गए हैं। विशेषज्ञ जंगली जानवरों के आक्रामक व्यवहार के अलग-अलग कारण बता रहे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या आदमखोर जानवर को पकड़ने के बाद 15 दिन के लिए क्वारंटाइन कर छोड़ देना ठीक है? क्या इससे वे आदमखोर नहीं रहते हैं? 
wolf does not improve even after becoming a man-eater even if kept separately for 15 days there is no effect
Wolf attack in Bahraich - फोटो : istock
उत्तर प्रदेश वन विभाग के पूर्व मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक रविंद्र सिंह भदौरिया ने बताया कि इंसानी आबादी में पहुंचे वन्यजीवों को रेस्क्यू किया जाता है। इसके बाद उन्हें चिड़ियाघर में रखा जाता है। इनमें आदमखोर या हिंसक जानवरों को 15 दिन के लिए क्वारंटाइन किया जाता है। 

 
wolf does not improve even after becoming a man-eater even if kept separately for 15 days there is no effect
Wolf attack in Bahraich - फोटो : istock
इसके बाद सामान्य वन्यजीवों की तरह उन्हें भी जंगल में छोड़ दिया जाता है। दरअसल, वन विभाग के पास आदमखोर जानवरों को सुधारने का कोई उपाय नहीं है। उन्हें इंसानों की सुरक्षा को देखते हुए 15 दिन के लिए क्वारंटाइन किया जाता है। 
 
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wolf does not improve even after becoming a man-eater even if kept separately for 15 days there is no effect
Wolf attack in Bahraich - फोटो : istock
ऐसे में सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि उन्हें घने वनक्षेत्र में ही छोड़ा जाए। वहीं, बहराइच के डीएफओ अजीत प्रताप सिंह का कहना है कि भेड़ियों को जंगल में शिकार नहीं मिल पा रहे हैं। कई बार उन्हें 15 दिन से ज्यादा इंतजार करना पड़ रहा है। ऐसे में वे इंसानी आबादी का रुख कर रहे हैं।

 
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wolf does not improve even after becoming a man-eater even if kept separately for 15 days there is no effect
Wolf Attack - फोटो : अमर उजाला
नियमों की अनदेखी कर रहा वन विभाग
भदौरिया के दूसरे पहलू पर बात करते हुए कहा कि वन्यजीव संरक्षण कानून 1972 के मुताबिक, किसी भी जंगली जानवर को रेस्क्यू कर वनक्षेत्र में छोड़ा जाना चाहिए। इसके उलट वन विभाग मनमानी कर रहा है। लखनऊ चिड़ियाघर में ही कई साल पहले रेस्क्यू कर लाए गए जंगली जानवरों को मुजरिमों की तरह कैद करके रखा गया है।

 
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