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ड्रोन से खोजकर लखनऊ लाया गया बाघ, जानिए कैसे बन जाते हैं ये आदमखोर

Mon, 13 Feb 2017 12:21 PM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ Updated Mon, 13 Feb 2017 12:21 PM IST
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wild tiger in lucknow zoo
यही आदमखोर बाघ पहुंचा जू - फोटो : amar ujala

पीलीभीत से ट्रैंकुलाइज कर पकड़ा गया आदमखोर बाघ शनिवार रात नवाब वाजिद अली शाह प्राणि उद्यान ले आया गया है। लखनऊ चिड़ियाघर में उसे चिकित्सकों की निगरानी में रखा गया है, जहां उसके व्यवहार पर लगातार नजर रखी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि बाघ जब आदमखोर हो जाता है, तब उसे सामान्य होने में बहुत वक्त लगता है। पकड़ा गया आदमखोर बीते वर्ष नवंबर से ही पीलीभीत में आतंक मचाए हुए है। कई दिनों उसे पकड़ने की कोशिश की जा रही थी, लेकिन सफलता शनिवार को मिली। रात को उसे ट्रेंकुलाइज किया गया, फिर ड्रोन की मदद से उसे ढूंढा गया। लखनऊ जू के निदेशक अनुपम गुप्ता ने बताया कि आदमखोर बाघ ने पिछले चार महीने में छह लोगों को मौत के घाट उतारा है।

wild tiger in lucknow zoo
यही आदमखोर बाघ पहुंचा जू - फोटो : amar ujala

राज्य भर में आतंक का पर्याय बने आदमखोर बाघों के तेवरों को लखनऊ जू में ढीला कर दिया जाता है। पीलीभीत से पकड़कर शनिवार रात लाए गए बाघ से पहले भी कई आदमखोरों को लखनऊ जू लाया जा चुका है। जू के निदेशक अनुपम गुप्ता कहते हैं कि जो भी जो भी आदमखोर बाघ पकड़े जाते हैं, उन्हें लखनऊ लाया जाता है और उनके बर्ताव पर नजर रखी जाती है। लेकिन उन्हें दोबारा जंगल में नहीं छोड़ते। ताकि इंसानों पर दोबारा हमला न कर सके।

wild tiger in lucknow zoo
यही आदमखोर बाघ पहुंचा जू - फोटो : amar ujala

वर्ष 2009 में किशनगंज में आदमखोर बाघ किशन ने करीब आठ महीने तक आतंक मचाया। पांच लोगों का शिकार किया था। उसे भी लखनऊ जू लाया गया था। चार साल के बाद आज किशन दर्शकों की पसंद बन गया है। अगस्त, 2016 में छेदीपुर में बाघ छेदीलाल ने तीन महीने तक आतंक मचाया। तीन लोगों को अपना शिकार बनाया था। लखनऊ जू के अस्पताल में वह बंद है और अभी भी हिंसक है।

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यही आदमखोर बाघ पहुंचा जू - फोटो : amar ujala

वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन सोसाइटी ऑफ इंडिया (डब्ल्यूपीएसआई) की माने तो वर्ष 1994 से लेकर 2016 तक 22 साल में 1,142 बाघों का शिकार हो चुका है। शिकारियों के खौफ से बाघ जंगल छोड़कर बाहर निकलते है। शहरीकरण, इंसानों का दखल जंगल में बढ़ना और जंगलों मं बढ़ना और जंगलों की कटाई होने से बाघ रिहायशी इलाको में रुख कर रहे हैं और आदमखोर बनते जा रहे हैं।

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