फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

सिविल सेवा परीक्षा में इन्होंने लिखी कामयाबी की इबारत, बोले- मेहनत, लगन के साथ त्याग भी जरूरी

Wed, 05 Aug 2020 12:57 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Wed, 05 Aug 2020 12:57 PM IST
विज्ञापन
UPSC qualifiers shared their success story
शुभांगी और शिवा सिंह - फोटो : amar ujala
आईएएस बनने के लिए मेहनत, लगन के साथ त्याग की भी जरूरत होती है। इसके बिना सफलता संभव नहीं। संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की सिविल सेवा परीक्षा-2019 में सफलता हासिल करने वालों ने यही मंत्र बताया। परीक्षा में 88वीं रैंक हासिल करने वाली लखनऊ की शुभांगी श्रीवास्तव ने सिविल की तैयारी के लिए पीएचडी तो यशलोक कुमार दत ने अपनी नौकरी छोड़ दी। ‘अमर उजाला’ से मेधावियों ने सफलता के सूत्र साझा किए। 


 
UPSC qualifiers shared their success story
शुभांगी - फोटो : amar ujala
खुद पर भरोसा सबसे जरूरी : शुभांगी 
मुझे चौथे प्रयास में सफलता मिली है। मैं बचपन से मां के साथ स्वयंसेवा को जाती थी। बीटेक करने के बाद एनजीओ ज्वाइन किया। इसके बाद यह बात समझ आई कि सेवा का सबसे अच्छा भाव सिविल सेवा में ही हो सकता है, इसलिए इसकी तैयारी शुरू की। इसमें बाधा बनने पर पीएचडी छोड़ दी। मेरे पिता एके सिंह सेतु निगम में एमडी और मां ममता श्रीवास्तव गृहिणी हैं। सिविल सेवा की परीक्षा में सफलता हासिल करने के लिए खुद पर भरोसा सबसे जरूरी है। साथ ही खुद से पढ़ने की आदत डालें और करंट अफेयर्स पर ध्यान दें। विश्लेषणात्मक सोच रखें। इससे आपको सवाल हल करने में मदद मिलेगी।  

 
UPSC qualifiers shared their success story
शिवा सिंह - फोटो : amar ujala
सीमित किताबों से की तैयारी : शिवा सिंह
हमेशा ज्यादा पढ़ने का प्रयास न करें। लक्ष्य को पहचानें और जानकारी लें कि कितना पढ़ना है। मैंने सीमित किताबों से ही दो साल पहले तैयारी शुरू की। रोजाना पढ़ाई की। साथ ही जमकर रिवीजन और अभ्यास किया। मेहनत से ही सफलता मिलती है। मैंने अवध कॉलेजिएट से स्कूलिंग के बाद दिल्ली के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स से स्नातक की पढ़ाई की और तैयारी भी वहीं की। सफलता का श्रेय माता-पिता और शिक्षकों को देती हूं। शुरू से ही सिविल सेवा में जाने की इच्छा थी। स्कूल में भी अच्छी तरह से पढ़ाई की और स्नातक में सिविल सेवा को लक्ष्य बनाकर पढ़ाई की। जो अभ्यर्थी सिविल की तैयारी कर रहे हैं उनके लिए मेरी सलाह है कि फोकस होकर रोज पढ़ाई करें। ज्यादा पढ़ने की कोशिश न करें और न ही बाद के लिए कुछ छोड़ें।

 
विज्ञापन
विज्ञापन
UPSC qualifiers shared their success story
उर्वी वर्मा - फोटो : amar ujala
सेल्फ स्टडी से पाई सफलता : उर्वी वर्मा
मैंने सिविल सेवा को लक्ष्य बनाया। केंद्रीय विद्यालय से इंटर के बाद आईईटी लखनऊ से 2016 में बीटेक किया। फिर तैयारी में जुट गई। सेल्फ स्टडी पर पूरा ध्यान था। समय प्रबंधन के साथ नोट्स बनाए। लेखनी पर ध्यान दिया व जमकर रिविजन किया। सफलता का श्रेय माता-पिता और शिक्षकों को देती हूं। पिता कमल कुमार एलआईसी में और मां राजी गृहिणी हैं। 



 
विज्ञापन
UPSC qualifiers shared their success story
यशलोक कुमार दत्त - फोटो : amar ujala
सच किया पिता का सपना : यशलोक कुमार दत्त
मुझे पांचवें प्रयास में सफलता मिली। 2013 में ग्रेजुएशन के बाद सिविल की तैयारी की थी। सफलता न मिलने पर दिल्ली में बैंक की नौकरी कर ली, पर दिल में पिताजी का सपना पूरा करने की चाह थी, इसलिए नौकरी छोड़कर वापस लखनऊ आकर तैयारी शुरू कर दी। निरंतरता और खुद पर भरोसा जरूरी है। सफलता का श्रेय मेरे पिताजी के साथ शिक्षक विजय प्रताप सिंह को जाता है।

इरिटम के 19 अधिकारी हुए सफल
यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा में भारतीय रेलवे परिवहन प्रबंधन संस्थान (इरिटम) के 19 अधिकारी भी सफल हुए हैं। इनमें से चार 2017 बैच के हैं। बरेली के हिमांशु गुप्ता ने 588वीं रैंक हासिल की है। यह अधिकारी इरिटम में रेलवे की पढ़ाई और प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। 
अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed