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अयोध्या: सुस्त पड़ी राम मंदिर परिसर की निर्माण प्रकिया, चढ़ावा चोरी मामले के बाद बदला गया भुगतान का तरीका

Sat, 22 Aug 2026 06:40 PM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या
अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या Published by: रोहित मिश्र Updated Sat, 22 Aug 2026 06:40 PM IST
सार

 Ram Temple construction process: राम मंदिर परिसर में चल रहे निर्माण की प्रक्रिया धीमी पड़ गई है। हाल ही में हुई चढ़ावा चोरी की घटना का असर भुगतान की प्रक्रिया पर पड़ा है। 

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Ayodhya: Construction work on the Ram Temple complex has slowed, and payment procedures have been changed
राम मंदिर निर्माण प्रक्रिया। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

राम मंदिर परिसर में चल रहे निर्माण कार्यों पर भुगतान में देरी भारी पड़ती दिख रही है। निर्माण एजेंसियों का भुगतान लंबित होने से काम की रफ्तार सुस्त हो गई है। सबसे अहम बाउंड्रीवाल का निर्माण करीब दो माह में 10 फीसदी की प्रगति भी दर्ज नहीं कर सका। ऑडिटोरियम समेत अन्य परियोजनाओं की गति भी प्रभावित बताई जा रही है।

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राम मंदिर परिसर और उससे जुड़े निर्माण व व्यवस्थागत कार्यों में बड़ी संख्या में छोटी-बड़ी एजेंसियां लगी हैं। भुगतान समय पर नहीं मिलने से कई एजेंसियों को अपनी कार्यशील पूंजी से कर्मचारियों का वेतन और दूसरे खर्च उठाने पड़ रहे हैं। इसका सीधा असर निर्माण सामग्री की आपूर्ति पर भी पड़ा है। कई मामलों में समय पर भुगतान न होने से जरूरी सामग्री की खरीद प्रभावित हुई और काम धीमा पड़ा।
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निर्माण की सुस्ती के पीछे पुराने ठेकेदारों और कार्यदायी संस्थाओं के काम, अनुबंध और दावों की नए सिरे से समीक्षा को भी बड़ी वजह माना जा रहा है। नई व्यवस्था में भुगतान से पहले पुराने रिकॉर्ड की जांच ने प्रक्रिया लंबी कर दी है।
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चढ़ावा चोरी के बाद बदली व्यवस्था, भुगतान प्रक्रिया भी प्रभावित
चढ़ावा चोरी की घटना के बाद मंदिर ट्रस्ट की प्रशासनिक और वित्तीय व्यवस्था में हुए बदलाव का असर भी निर्माण कार्यों पर पड़ने की बात सामने आ रही है। ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और सदस्य डॉ. अनिल मिश्र के इस्तीफे के बाद नई व्यवस्था लागू हुई। डॉ. कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव बनाए जाने के बाद भुगतान प्रक्रिया और व्यवस्थाओं को नए सिरे से समझने में समय लगा। कंपनियों से भुगतान के लिए दोबारा आवेदन मांगे जाने से भी प्रक्रिया आगे खिंची।


एक दर्जन एजेंसियां दबाव में
सफाई, सीवरेज-ड्रेनेज और अन्य व्यवस्थाओं में करीब एक दर्जन एजेंसियां काम कर रही हैं। बताया जा रहा है कि बीवीजी के कर्मचारियों का अप्रैल से जुलाई तक का वेतन बकाया है। वहीं यूनी पॉइंट और जिलाजीत एजेंसियों के कर्मचारियों का मई से जुलाई तक का वेतन लंबित है। भुगतान में देरी से एजेंसियों पर आर्थिक दबाव लगातार बढ़ रहा है।

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