देर रात आए पीसीएस-2015 के परिणामों में राजधानी के मेधावियों ने प्रतिभा का लोहा मनवाया। संघर्ष की राह पर चलकर इन होनहारों ने ऊंचा मुकाम हासिल किया। कोई आर्थिक रूप से कमजोर हालात से लड़कर तो कोई शादी के बाद फिर से जुझारू जज्बे के साथ तैयारी करता रहा और सफलता का परचम लहराया। ऐसे ही मेधावियों से पीसीएस का रिजल्ट भरा हुआ है। खास बात यह है कि इन सभी का सपना प्रदेश को बुलंदियों पर ले जाने का है।
यूपी पीसीएस में इन्होंने लहराया लखनऊ का परचम, तस्वीरें
यूपी पीसीएस में इन्होंने लहराया लखनऊ का परचम, तस्वीरें
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यूपी पीसीएस में इन्होंने लहराया लखनऊ का परचम, तस्वीरें
नाम- अनूप कुमार श्रीवास्तव
पदनाम- असिस्टेंट कमिश्नर आफ इंडस्ट्रीज
अनूप का कहना है कि ग्रास रूट पर जो लोग हैं उनकी मदद करना चाहता हूं। मैं खुद ग्रामीण पृष्ठभूमि से रहा हूं, इसलिए मूलभूत सुविधाओं को गांवों तक पहुंचाया जाए, इसके लिए प्रयासरत रहूंगा।
सक्सेस मंत्रा: धैर्य न खोएं और संयम बनाए रखें। मैंने एक गोल तय किया और उसे हासिल करने के लिए जी-जान से जुट गया। तीसरे प्रयास में मैंने क्वालिफाई कर लिया।
प्रेरणा: पिताजी पहले ही गुजर गए थे, इसलिए मां राजरानी श्रीवास्तव जोकि सचिवालय में सहायक समीक्षा अधिकारी हैं, उन्होंने मुझे बहुत प्रेरित किया। यह सफलता उनको समर्पित है।
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पहले प्रयास में ही चखा सफलता का स्वाद
नाम- स्वेच्छा सिंह
पदनाम- नायब तहसीलदार
स्वेच्छा का कहना है कि मेरा उद्देश्य भारतीय प्रशासनिक सेवाओं में जाना है। यूपीपीसीएस मेरी प्राथमिकताओं में शामिल नहीं रहा है। इसलिए आईएएस के लिए तैयारी जारी रहेगी।
सक्सेस मंत्रा: यूपी पीसीएस में पहला प्रयास था और सक्सेसफुल रही। मैंने सेल्फ स्टडी की और इंटरव्यू के लिए कोचिंग जॉइन की। इसके अलावा मैग्जीन आदि पढ़ीं, जिनके जरिये सफलता मिली।
प्रेरणा: मेरी प्रेरणा मेरे पैरेंट्स हैं। पापा अयोध्या प्रसाद एनटीपीसी में सीनियर मैनेजर हैं और मां रीता हाउसवाइफ हैं, जिन्होंने हमेशा मुझे प्रोत्साहित किया।
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हिम्मत हारे बिना करें मेहनत, मिलेगी सफलता
नाम- विपिन तिवारी
पदनाम- असिस्टेंट कमिश्नर कॉमर्शियल टैक्स
विपिन ने बताया कि बिट्स पिलानी से बीटेक करने के बाद बंगलुरु में एक साल जॉब भी की। मगर, आंखों में सिविल सेवा में जाने का सपना था। इसलिए जॉब छोड़कर लखनऊ आया और तैयारी करने लगा। वर्ष 2013 से लगातार इंटरव्यू तक पहुंचने के बावजूद सफलता नहीं मिल पा रही थी। इस बार सपना पूरा हुआ।
प्रेरणा- विपिन तिवारी सिविल सेवा में आने के लिए पिता स्वर्गीय हरि प्रसाद तिवारी को अपनी प्रेरणा मानते हैं। उनके अनुसार पिता एसडीएम थे इसलिए हमेशा से सिविल सेवा में जाने का ख्वाब देखता था। उनके देहांत के बाद परीक्षा की तैयारी में लग गया। अपनी सफलता के लिए वे अपनी मां माधुरी तिवारी, बहन रोली ओर रजनी के साथ ही अपने गुरु डॉ. पवन मिश्रा को सबसे ज्यादा श्रेय देते हैं।
सक्सेस मंत्रा- बिना हार माने लगातार मेहनत करते रहें। सफलता जरूर मिलेगी।
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प्रशासनिक अफसर बनने का था सपना
नाम- दीक्षा सिंह
पदनाम- असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ इंडस्ट्रीज
दीक्षा का कहना है कि मैं हमेशा से प्रशासनिक अधिकारी बनना चाहती थी। दरअसल, गरीबी व भ्रष्टाचार को मैं समस्याओं की जड़ मानती हूं, इसलिए इन्हें कम करना चाहती हूं। मैं चाहती हूं कि मेरे मातहत काम करने वाले भ्रष्ट न हों और व्यवस्था को आम आदमी के लिए सुलभ बनाएं।
सक्सेस मंत्रा: काम के प्रति पूर्ण समर्पण ही मेरी सफलता का राज है। इसके अलावा सोशल नेटवर्किंग साइटों से पूरी तरह दूर रहती हूं और लक्ष्य फिक्स है, इसलिए भटकाव पैदा नहीं हुआ। दूसरे प्रयास में यह रिजल्ट रहा है।
प्रेरणा: मेरे पिता डॉ. ज्ञानेंद्र सिंह चिकित्सक हैं, जबकि मां ममता सिंह हाउसवाइफ हैं, जिनका मुझे बहुत सपोर्ट मिला। मेरी सफलता का श्रेय उन्हें ही जाता है।