उत्तर प्रदेश सरकार के आखिरी बजट में घातक बीमारियों से बचाव, इलाज और चिकित्सा शिक्षा को बढ़ावा देने पर जोर रहा। चिकित्सा स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा के मद में 21 हजार करोड़ रुपये से अधिक की व्यवस्था की गई है।
स्वास्थ्य का बुनियादी ढांचा विकसित करने के लिए खर्च होंगे 1073 करोड़ रुपये, हर नागरिक की बनेगी हेल्थ आईडी
यूपी सरकार ने लगभग एक साल से कोरोना महामारी से जूझ रहे प्रदेश वासियों के मन में फ्री टीकाकरण को लेकर उठ रहे संशय का जवाब अपने बजट में दे दिया है। हालांकि अभी तय नहीं है कि इस रकम को कैसे और किन लाभार्थियों पर खर्च किया जाएगा, लेकिन बजट आवंटित होने से प्रदेश की जनता के मन में एक सकारात्मक संदेश जाएगा।
स्वास्थ्य विभाग में रीढ़ की हड्डी की तरह काम करने वाले राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) को 5365 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। इससे स्वास्थ्य विभाग की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी। खासतौर से प्रशिक्षित मानव संसाधन की कमी को पूरा करने में इससे मदद मिलेगी।
प्रदेश में प्रत्येक नागरिक का हेल्थ आईडी बनाया जाएगा। इस योजना के तहत उनका पूरा डाटा इकठ्ठा करके इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकार्ड (ईएचआर) के रूप में संरक्षित किया जाएगा। वर्ष 2021-22 में इस योजना के किय्रान्वयन के लिए 2.5 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन (एनडीएचएम) के अंतर्गत यह पूरी व्यवस्था होगी।
चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के जारी गाइडलाइन के अनुसार नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन (एनडीएचएम) शुरू किया जाना है। इसमें व्यक्ति की सहमति के बाद ही अस्पतालों में डॉक्टर उस व्यक्ति का सम्पूर्ण हेल्थ डाटा इकठ्ठा करके इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकार्ड के रूप में संरक्षित करेगा।
इसके अलावा राज्य डिजिटल स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में सूचना प्रौद्योगिकी के माध्यम से बेहतर स्वास्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए 20 करोड़ की व्यवस्था की गई है।
चिकित्सा शिक्षा एवं स्वास्थ्य के लिए मिला कुल बजट
चिकित्सा स्वास्थ्य-- 10432 करोड़
चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण-- 8711 करोड़
आयुर्वेद एवं यूनानी-- 1366 करोड़
होम्योपैथी-- 568. करोड़