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अभावों से नहीं मानी हार : अच्छे अंक पाने वाली इन छात्राओं के आगे समस्याओं ने टेके घुटने

Sun, 28 Apr 2019 12:00 AM IST
Amulya Rastogi न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ Published by: Amulya Rastogi Updated Sun, 28 Apr 2019 12:00 AM IST
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up board result : these girls get good marks despite tough challenges
पास होने के बाद खुशी मनाती छात्राएं - फोटो : amar ujala
जब मन में लक्ष्य पाने का हौसला और लक्ष्य को पाने की इच्छा हो तो कई बार समस्याएं व बाधाएं भी बौनी हो जाती हैं। शनिवार को घोषित यूपी बोर्ड हाईस्कूल व इंटर के परिणाम में राजधानी के मेधावियों ने अपनी सफलता से यह साबित कर दिखाया है।


किसी ने उधार पैसा लेकर पढ़ाई की तो कोई पहले कोचिंग पढ़ाकर फिर अपनी पढ़ाई पूरी की। ऐसे जीवट युवाओं ने परीक्षा में अच्छे परिणाम लाकर कामयाबी की दास्तां लिखी है तो अपने लक्ष्य के प्रति एक कदम और बढ़ाया है। खास ये कि ये युवा अपना लक्ष्य प्राप्त कर शिक्षा की अलख जगाना चाहते हैं, ताकि आगे आने वाली पीढ़ी को इस तरह की समस्या न उठानी पड़े।

उधार लेकर कराया प्रवेश, जिले में लाया चौथा स्थान

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सुनीता - फोटो : amar ujala
राजधानी के कटी बगिया निवासी सुनीता के पिता जगदीश प्रसाद किसान हैं। परिवार में चार बेटियां ही हैं। जिसमें सुनीता तीसरे स्थान पर है। किंतु जगदीश प्रसाद अपनी सभी बेटियों को पढ़ाकर आगे बढ़ाना चाहते हैं।

सबसे बड़ी बेटी सोनम डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय से एमए व छोटी रूबी बीए कर रही है। अब जब तीसरे नंबर की सुनीता को पढ़ाने की बारी आई तो जगदीश प्रसाद की आर्थिक स्थिति थोड़ी खराब हुई। सुनीता का जब क्लास 9 में प्रवेश कराने की बारी आई तो पैसे नहीं थे।

जगदीश ने उधार लेकर बेटी का प्रवेश अवध कॉलिजिएट में कराया। सुनीता ने भी पिता के सपनों को पूरा करने के लिए जी तोड़ मेहनत की और न सिर्फ 10वीं में 92.83 फीसदी अंक प्राप्त किया बल्कि जिले में चौथा स्थान भी पाया।

सुनीता ने कहा कि मैं आईएएस बनकर अपने पापा को वह हर सुविधा देना चाहती हूं जो वे चाहेंगे। सुनीता ने कहा कि मैं आईएएस बनकर उपेक्षित व कमजोर वर्ग के लोगों को सहायता करने का प्रयास करूंगी। बहुत सारे लोगों को आज भी सरकारी सेवाओं का लाभ नहीं मिल पाता या उनका हक भी मारा जाता है।

कोशिश होगी कि ऐसे लोगों को उनका हक दिलाऊं। अभी मुझे दिन रात मेहनत कर इंटर व स्नातक की पढ़ाई करनी है। मेरी सफलता में पूर्व के शिक्षक संजीव सिंह व हीरालाल यादव गर्ल्स इंटर कॉलेज के शिक्षकों व मां कृष्णावती का भी पूरा योगदान है।

पिता की मृत्यु के बाद मां ने उठाया परवरिश का जिम्मा

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अदिति निगम - फोटो : amar ujala
मातृ शक्ति से बड़ी कोई शक्ति नहीं है। लखनऊ पब्लिक कॉलेज के हाईस्कूल की छात्रा अदिति निगम के पिता मनीष निगम की मृत्यु तीन साल पहले वर्ष 2015 में हो गई थी। वे घर के एकमात्र कमाऊ सदस्य थे। आशियाना स्थित बंगला बाजार में उनकी पूजा सामग्री की दुकान थी। उनकी मृत्यु के बाद अदिति की मां एएस निगम पर दोनों बच्चों की परवरिश का जिम्मा आ गया।

उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और घर की जिम्मेदारी के साथ दुकान की भी जिम्मेदारी अपने कंधों पर ले ली। बच्चों को हमेशा आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उनके प्रोत्साहन का ही नतीजा है कि अदिति ने हाईस्कूल बोर्ड परीक्षा परिणाम में 91 प्रतिशत अंकों के साथ सफलता हासिल की।

अदिति ने बताया कि उसकी इस सफलता में मम्मी का बड़ा हाथ है। जीवन के संघर्षों से उन्होंने कभी हार नहीं मानी और हमें हमेशा आगे बढ़ने के लिए प्ररित करती रहीं। अदिति ने बताया कि उसकी पढ़ाई में मां का सबसे बड़ा योगदान है, वह हमेशा मोटिवेट करती है। छोटा भाई चित्रांश निगम कक्षा छह में पढ़ता है। वह खुद पढ़ने के साथ उसको पढ़ाने में भी मदद करती है।
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कोचिंग पढ़ाकर, लोगों से सहयोग लेकर की पढ़ाई, बनना है आईएएस

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शिवानी यादव - फोटो : amar ujala
अवध कॉलिजिएट की छात्रा शिवानी यादव ने 12वीं की परीक्षा में 78.8 फीसदी अंक लाकर अपने शिक्षकों व अभिभावकों का नाम रोशन किया है। चुन्नू खोड़ा पारा निवासी किसान नंदू यादव की आर्थिक स्थिति बहुत ठीक नहीं है।

परिवार में दो बेटे, दो बेटियां हैं। बड़ा बेटा सौरभ यादव बीए तो बेटी सोनी यादव बीकॉम की पढ़ाई कर रहे हैं। तीसरे नंबर की शिवानी भी जब 11वीं में पहुंची तो नंदू के पास पैसों का अभाव था।

उन्होंने आस-पास के लोगों से उधार व बैंक से लोन लेकर बेटी का प्रवेश कराया और उसकी पढ़ाई को ब्रेक नहीं लगने दिया। पिता की स्थिति देख शिवानी ने भी स्कूल के बाद के समय में स्कूली बच्चों को कोचिंग पढ़ाना शुरू किया।

11वीं में ही शिवानी बच्चों को कोचिंग पढ़ाने लगी। इसके बाद बचे समय और रात को देर-देर तक जगकर शिवानी ने अपनी तैयारी को पूरा किया और सफलता पाई। पिता के साथ मां श्रवण कुमारी व बड़े भाई-बहनों ने भी शिवानी का सहयोग किया।

शिवानी आईएएस बनना चाहती है। आईएएस बनकर अपने पिता को प्राउड फील कराना है और उनके लिए हर संभव सुविधाएं उपलब्ध कराऊंगी। शिवानी ने कहा कि आईएएस बनकर ऐसे लोगों को शिक्षित करना चाहती हैं जो अभाव की वजह से पढ़ाई नहीं कर पाते हैं। शिवानी कहती हैं कि किसी भी व्यक्ति के विकास के लिए शिक्षा जरूरी है।
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सिलाई करके पढ़ा रही मां, डॉक्टर बनकर पूरी करूंगी सपना

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अनुष्ठा गुप्ता - फोटो : amar ujala
देश भारती पब्लिक इंटर कॉलेज, राजाजीपुरम की अनुष्ठा गुप्ता ने 10वीं की परीक्षा में 88 फीसदी अंक प्राप्त कर सफलता पाई है। अनुष्ठा की पढ़ाई थोड़ी आर्थिक समस्या के बीच चल रही है लेकिन न तो अनुष्ठा न ही उनके परिवार ने हार मानी है। वे अपने सपने को पूरा करने के लिए दिन-रात मेहनत कर रहे हैं।

मुनेश्वर पुरम, आलमनगर निवासी अनुष्ठा के पिता एक दुकान में मुंशी का काम करते और परिवार चलाते हैं। वहीं मां पूनम सिलाई का काम करती हैं। पूनम बेटी अनुष्ठा को पढ़ाने के लिए यह काम करती हैं। ताकि उनकी बेटी अपना सपना पूरा कर सके।

पूनम ने कहा कि बेटी पढऩे में काफी तेज है और वह डॉक्टर बनना चाहती है। उसकी फीस थोड़ी ज्यादा होगी, इसलिए मैं अभी से इसके लिए तैयारी कर रही हूं।

वहीं अनुष्ठा कहती हैं कि हमारी आर्थिक स्थिति थोड़ी कमजोर है लेकिन मां-पिता दिन-रात मेहनत कर मुझे आगे बढ़ाने में सहयोग कर रहे हैं। मैं डॉक्टर बनना चाहती हूं और डॉक्टर बनकर अपने मां-पिता के सपने को पूरा करूंगी और उन्हें हर संभव सुविधा उपलब्ध कराऊंगी।
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