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बदलते मौसम में खानपान में बदलाव से रहेंगे स्वस्थ, शहद समेत इन चीजों को करें शामिल व इनसे बनाएं दूरी

Wed, 28 Oct 2020 11:55 AM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Wed, 28 Oct 2020 11:55 AM IST
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tips for healthy health by doctor vandana pathak
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : social media
बरसात समाप्त हो गई है और जाड़े की शुरुआत हो गई है। मौसम के इस बदलाव में थोड़ी सी लापरवाही सेहत बिगाड़ सकती है। इस समय मौसमी बीमारियां घेरने लगती हैं। जरा सी सावधानी यानी दिनचर्या, ऋतुचर्या, आहार-विहार का पालन करते हुए इन सभी बीमारियों से हम बच सकते हैं।
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डॉ वंदना पाठक - फोटो : अमर उजाला
आयुर्वेदिक चिकित्सक व पंचकर्म विशेषज्ञ डॉ. वंदना पाठक बताती हैं कि शरद ऋतु का आगमन हो चुका है। शरद ऋतु आश्विन और कार्तिक यानी सितंबर से नवंबर के बीच पड़ती है। इस मौसम में हमारे ऋषियों ने पित्त को काबू करने और भूख बढ़ाने वाली आहार विहार की व्यवस्था की है। भोजन में बढ़े पित्त को शांत करने वाले मधुर तिक्त, कषाय रस या स्वाद के साथ ही पचने में हल्की चीजोें को शामिल कर बहुत भूख लगने पर ही इनके सेवन करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने बताया कि इस मौसम में अम्ल (शराब, सिरका, अधिक खट्टा), लवण (अधिक नमक वाले खाद्य पदार्थ) और कटुरस (मिर्च और गरम मसाले) का सेवन नहीं करना चाहिए। इनके इस्तेमाल से गले-छाती में जलन, खट्टी डकार, त्वचा रोग, खूनी बवासीर, नाक से खून आना, बाल झड़ना, बालों का पकना, पेशाब में जलन जैसी बीमारियां हमें घेर लेती हैं।

 
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- फोटो : अमर उजाला
शहद, दूध, केला खाना फायदेमंद
डॉ. वंदना ने कहा कि इस मौसम में मधुर तिक्त, कसाय रस का सेवन करना लाभकारी है। जैसे शहद, शक्कर, मिश्री, दूध, केला, नारियल, अखरोट, फालसा, शतावरी, घी, किशमिश, ईंख, मुलेठी का सेवन फायदेमंद है। तिक्त द्रव्यों का सेवन इस ऋतु में बढ़े पित्त को शांत कर दाह, ज्वर, मूर्छा और प्यास को शांत करता है। ये शरीर के टॉक्सिंस को बाहर निकालने में मदद करता है। करेला, चंदन, नीम, चिरैता, हल्दी, गिलोय, खस, वसा तिक्त रस युक्त द्रव्य हैं। 


 
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- फोटो : अमर उजाला
पित्त विकारों से बचाएगा घी 
डॉ. पाठक ने बताया कि इस मौसम में तिक्त घी का सेवन पित्त विकारों से बचाता है। यह गाय के घी और तिक्त औषधि जैसे नीम की छाल, गिलोय, अडूसा की जड़, परवल की पत्ती और छोटी कटेरी से बनाया जाता है। इसके साथ ही कषाय रस का सेवन स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है। यह पित्त का शमन करता है। फोड़े-फुंसी से बचाव कर हमारी त्वचा को स्वस्थ और निर्मल भी बनाता है। कषाय रस हरड़, बहेड़ा, शहद, कच्ची खजूर, कमल ककड़ी, आंवला में होता है।


 
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मुनक्का के फायदे - फोटो : Pixabay
जानिए, शरद ऋतु में क्या खाएं
सब्जियां : लौकी, निनुआ, तोरई, कद्दू, अत्यंत कोमल सफेद पेठा, परवल, करेला, गिलकी, छोटी चौराई, करेला, कच्चे केले की फली, कुंदरू। 
सूखे फल यानी मेवा : मुनक्का, किशमिश, अंजीर, सूखा नारियल, खजूर।
फल : कच्चा हरा नारियल, सीता फल, चीकू, अमरूद, द्राक्षा, आंवला, मौसमी, ताजा अंजीर, पका केला, पका पपीता।
अनाज : जौ, सफ़ेद शालि चावल, गेहूं, ज्वार, रागी।
दाल : मूंग, मसूर, मोठ।
मसाले : धनिया, इलायची, जीरा।

 
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