‘तीन तलाक मामले में सुप्रीम कोर्ट की ओर से ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड से मांगे गए जवाब से बोर्ड घबरा गया है। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड केंद्र सरकार के खिलाफ मुसलमानों को भड़का रहा है।’
यह बातें शनिवार को बज्म-ए-ख्वातीन लखनऊ की अध्यक्ष बेगम शहनाज सिदरत ने अमीनाबाद स्थित जनाना पार्क में तीन तलाक के विरोध में महिलाओं की एक रैली के पूर्व कही।
शहनाज ने कहा कि तीन तलाक अल्लाह का नहीं, मुल्ला का फरमान है जिससे पर्सनल लॉ बोर्ड के मौलवी घबराए हुए हैं और मुसलमानों को डरा रहें कि इससे धर्म खतरे में हैं।
उन्होंने कहा कि इस्लाम धर्म इंसानी प्रकृति पर आधारित है इसके सिद्धांत में कभी हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता। कुरान में तीन तलाक तीन माह में से कम अवधि में मान्य नहीं है। इसे लागू होना चाहिए। क्योंकि अल्लाह कुरान के माध्यम से परिवार को सुरक्षित रखना चाहता है, तोड़ना नहीं चाहता।
उन्होंने कहा कि इस्लाम में तलाक देना कठिन है, इस सूरत में लड़की की जान को खतरा हो सकता है, इसलिए इस्लाम लड़की को खुला लेने का हक देता है। लेकिन इसके लिए लड़की को आर्थिक कुर्बानी देनी पड़ती है। लेकिन हिंदुस्तान में उलमा ने तलाक को आसान कर दिया। तीन बार तलाक कह देने से तलाक माना जाता है यह न शरीयत के मुताबिक है न इस्लाम इसकी इजाजत देता है।