जिंदगी की पहेली समझना मुश्किल है। जब यह नाराज होती है तो अपने पीछे गम और आंसू छोड़ जाती है। सुदामापुर गांव में भी यह हालात है। शिक्षक और उसके परिवार के जनाजे निकले तो हर आंख भर आई। 72 घंटों से गांव में मातम और उदासी पसरी हुई है। गोला घाट में भी जब शवों का अंतिम संस्कार हो रहा था तो गंगा तट के पास खड़ी जिंदगियां नियति के खेल के सारे सिर झुकाने को मजबूर हुईं। शायद यही जिंदगी का फलसफा है।
अमेठी हत्याकांड: गांव में छाई वीरानी, शिक्षक व परिजनों का हुआ अंतिम संस्कार, घरों से बाहर नहीं निकल रहे लोग
अमर उजाला नेटवर्क, रायबरेली
Published by: ishwar ashish
Updated Sat, 05 Oct 2024 04:17 PM IST
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