राजधानी के लोग भी आज दुर्लभ खगोलीय घटना के साक्षी बनेंगे और देख सकेंगे सुपर मून, ब्लू मून और चंद्रग्रहण एक साथ, वो भी 174 साल बाद। हालांकि 152 साल पहले ब्लू मून और चंद्रग्रहण एक साथ देखे गए थे।
इससे पहले 31 मई 1844 को ये तीनों एक साथ दिखे थे। इंदिरागांधी नक्षत्रशाला और रीजनल साइंस सिटी इस दुर्लभ खगोलीय घटना का नजारा राजधाविासियों को दिखाएंगे।
इंदिरागांधी नक्षत्रशाला के वैज्ञानिक अधिकारी सुमित श्रीवास्तव ने बताया कि सुपर मून के साथ चंद्रग्रहण होना एक सामान्य घटना है। इससे पहले ये दोनों एक साथ सितंबर 2015 में दिखे थे, पर ब्लूमून के साथ ऐसा होना दुर्लभ संयोग बनाता है।
हालांकि खराब मौसम इसमें विलेन बन सकता है। कोहरा बढ़ने पर खगोलीय घटना को नंगी आंखों के अलावा टेलीस्कॉप से भी देखना मुश्किल होगा।
तो खून के रंग में होगा सुपर मून
वैज्ञानिकों का कहना है कि बुधवार को लखनऊ में दिखने वाला सुपर मून खून के रंग में होगा। इसलिए इसे सुपर ब्लड मून कहा जाता है। सुपर ब्लड मून सूर्यास्त के समय होता है। इस समय चंद्रमा पृथ्वी के सबसे निकट होता है। सुपर मून में चंद्रमा अपने आकार से 14 प्रतिशत बड़ा और 30 प्रतिशत ज्यादा चमकदार दिखाई देता है। वहीं सूर्यास्त की वजह से यह तांबे के रंग का होता है। हवा में मौजूद कणों की वजह से लाल रंग ही पृथ्वी तक पहुंचता है। ऐसे में पृथ्वी से यह सुपर मून लाल रंग का ही दिखता है।