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लखनऊः खूबसूरत यादें संजोए है कॉल्विन ताल्लुकेदार कॉलेज, जावेद अख्तर का है खास नाता

Mon, 22 Jul 2019 05:26 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Mon, 22 Jul 2019 05:26 PM IST
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story of colvin taluqdars' college
कॉल्विन ताल्लुकेदार कॉलेज - फोटो : अमर उजाला

एक दौर था जब लोग मुल्क के किसी भी हिस्से में इल्म और तालीम की बात करते थे तो लखनऊ का जिक्र जरूर आता था। इसमें कॉल्विन ताल्लुकेदार कॉलेज भी शुमार था। बेहद हसीन और खुशगवार अतीत वाला ये कॉलेज आज शहर के प्रमुख स्कूलों में से एक है। अमर उजाला ने कॉलेज प्रिंसिपल, कुछ इतिहासकारों से बात कर जाना कॉलेज के वैभवशाली इतिहास के बारे में, पेश है रिपोर्ट...

story of colvin taluqdars' college
कॉल्विन ताल्लुकेदार कॉलेज - फोटो : अमर उजाला
कॉल्विन ताल्लुकेदार कॉलेज हिंदुस्तान के सबसे पुराने स्कूलों में होता है। इस स्कूल को सर ऑकलैंड कॉल्विन ने स्थापित किया, जो उस वक्त अवध और आगरा के उपराज्यपाल थे। कॉलेज के पूर्व छात्र और वर्तमान प्रिंसिपल अनूप राज बताते हैं कि 1889 में इस स्कूल की नींव रखी गई। वास्तव में विद्यालय वर्ष 1892 में प्रारंभ हुआ। विद्यालय को बनाने का मकसद अंग्रेजों, रजवाड़ों और ताल्लुकेदारों के बच्चों को तालीम देना था। इतिहासकार योगेश प्रवीन बताते हैं कि उस दौर में इसमें प्रवेश की सबसे पहली और प्रमुख शर्त थी कि एडमिशन लेने वाला बच्चा राजघराने का होना चाहिए।
story of colvin taluqdars' college
कॉल्विन ताल्लुकेदार कॉलेज - फोटो : अमर उजाला

इसमें पढ़ने वाले बच्चों की संख्या भी बहुत ज्यादा नहीं सिर्फ 50 के आसपास ही रहती थी। जिस वर्ष इस की छात्र संख्या ने 100 का आंकड़ा छुआ उस दिन मारे खुशी के विद्यालय में एक दिन का अवकाश घोषित किया गया। राजघराने का पाल्य होने की शर्त को 1933 में हटा लिया गया। 1945 में कॉलेज में इंटरमीडिएट तक की शिक्षा आरंभ की गई। 1965 में इस विद्यालय को भारत सरकार द्वारा देश के प्रमुख विद्यालयों के रूप में चिह्नित करते हुए मेधावी छात्रों को शिक्षित करने के लिए अधिसूचित किया गया।

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कॉल्विन ताल्लुकेदार कॉलेज - फोटो : अमर उजाला

कॉलेज के बारे में
कॉलेज आंशिक रूप से आवासीय है। इसमें दो बोर्डिंग हाउस अवध और अंजुमन हैं, जिसमें 150 छात्र बैठ सकते हैं। वर्तमान में कॉलेज इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट परीक्षा नई दिल्ली से संबद्ध है। दूसरे स्कूलों की तरह यहां भी हाउस सिस्टम है। स्कूल में पांच हाउस अजंता, नालंदा, सांची, तक्षशिला और उज्जैन हैं। इस स्कूल में वार्षिक खेल दिवस और पुराने छात्रों के मिलने के लिए एक दिन तय होता है, जो दिसंबर में ‘दरबार डे’ के नाम से मनाया जाता है।

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जावेद अख़्तर
जावेद अख्तर का नाता
लखनऊ को अपने दिल में समेटे फिल्मी जगत के गीतकार, लेखक जावेद अख्तर अपनी आत्मकथा में इस कॉलेज का जिक्र करते हैं। वे लिखते हैं ‘मेरा दाखिला लखनऊ के मशहूर स्कूल कॉल्विन ताल्लुकेदार में छठीं क्लास में करा दिया जाता है। पहले यहां सिर्फ ताल्लुकेदारों के बेटे पढ़ सकते थे अब मेरे जैसे कमजातों को भी दाखिला मिल जाता है। अब भी बहुत महंगा स्कूल है, मेरी फीस 17 रुपये महीना है। मेरी क्लास में कई बच्चे घड़ी बांधते हैं। वो सब बहुत अमीर घरों के हैं। उनके पास अच्छे-अच्छे स्वेटर हैं। एक के पास फाउंटेन पेन भी है। ये बच्चे इंटरवल में स्कूल की कैंटीन में आठ आने की चॉकलेट खरीदते हैं। अब मुझे भगवती की चाट अच्छी नहीं लगती। कल क्लास में राकेश कह रहा था कि उसके डैडी ने कहा है कि उसे पढ़ने के लिए इंग्लैंड भेजेंगे। कल मेरे नाना कह रहे थे, अरे कमबख्त! मैट्रिक पास कर ले तो किसी डाकखाने में मोहर लगाने की नौकरी तो मिल जाएगी। इस उम्र में जब बच्चे इंजन ड्राइवर बनने का ख्वाब देखते हैं मैंने फैसला कर लिया कि बड़ा होकर अमीर बनूंगा।
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