समाजवादी सेकुलर मोर्चा के संयोजक शिवपाल सिंह यादव ने दावा किया कि पूर्व विधायक हमारे साथ हैं और यादव महासभा भी हमारे पक्ष में है। शिवपाल ने कहा कि वो लोकसभा चुनाव के लिए सपा-बसपा व कांग्रेस से भी बात कर सकते हैं। राजनीति में किसी से दुश्मनी नहीं होती। हमें गठबंधन में लेंगे तो ठीक, नहीं लेंगे तो उनके बीच सीट बंटवारे के बाद हमें प्रत्याशी उतारने में सहूलियत होगी।
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शिवपाल ने मीडिया से बातचीत में कहा कि इस समय हमारा ध्यान संगठन बनाने पर है। हमें बूथ स्तर तक संगठन खड़ा करना है। इसी बीच प्रदेश का दौरा करेंगे। रविवार को फैजाबाद जा रहा हूं। समान विचारधारा वाले दलों, खासतौर से गांधी, लोहिया व चौधरी चरण सिंह के अनुयायियों से बातचीत कर रहे हैं। उन्हें एकत्र करके 2019 का लोकसभा चुनाव लड़ेंगे।
अब पीछे नहीं हटेगा कदम
शिवपाल ने कहा, मैंने लंबा इंतजार करने के बाद बहुत सोच-समझकर मोर्चा बनाया है। नेताजी का आशीर्वाद हमारे साथ है। मुझे न तो सपा की किसी बैठक में, न ही विधानमंडल दल की बैठक में बुलाया जाता था। राज्यसभा चुनाव के दौरान बुलाया गया तो मैं दोनों दावतों में शामिल हुआ। जया बच्चन को वोट दिया। राष्ट्रपति के चुनाव में न तो सपा और न ही कांग्रेस ने मुझसे बात की। रामनाथ कोविंद ने दो बार वोट मांगा, मुख्यमंत्री का भी फोन आया। मैंने डंके की चोट पर कोविंद को वोट दिया। अब जो कदम बढ़ाया है, वह पीछे नहीं हटेगा।
भाजपा ने वादे पूरे नहीं किए, इसका लाभ मिलेगा
शिवपाल ने भाजपा से गठबंधन की संभावना से इनकार किया। कहा, भाजपा समान विचारधारा वाली पार्टी नहीं है। उसने वादे पूरे नहीं किए। अच्छे दिन नहीं आए। नोटबंदी, जीएसटी से व्यापार तबाह हो गया, उद्योग-धंधे बंद हो गए। बेरोजगारी बढ़ी है। जनता परेशान है। भाजपा का जनाधार गिरने का हमें लाभ मिलेगा।
विधायक पद से इस्तीफे का प्रश्न नहीं
शिवपाल ने विधायक पद से इस्तीफे की अटकलों का खारिज किया। कहा, सपा का विधायक हूं। सेकुलर मोर्चा बनाया है लेकिन अभी सपा नहीं छोड़ी। जब पार्टी बनेगी, चुनाव लड़ना होगा तो देखा जाएगा। अतीक अहमद के सेकुलर मोर्चा में शामिल होने की संभावना पर कहा कि अभी बातचीत नहीं हुई। समय आने पर विचार करेंगे।
शिवपाल ने कहा कि नेताजी (मुलायम सिंह यादव) को मोर्चे के अध्यक्ष पद का ऑफर करेंगे। उन्होंने प्रस्ताव स्वीकार किया तो वह सेकुलर मोर्चे के राष्ट्रीय अध्यक्ष होंगे। वह मैनपुरी से मोर्चे के पहले प्रत्याशी होंगे। यदि वह मोर्चे से चुनाव नहीं लड़े तो भी उनका समर्थन किया जाएगा।