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'बुढ़ापे के लिए मेरे पास वक्त नहीं, मुझे जीने का जुनून है'

Thu, 01 Oct 2015 08:41 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ Updated Thu, 01 Oct 2015 08:41 PM IST
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Shekhar Suman in Lucknow.

गुरूवार को एक निजी चैनल के कार्यक्रम के प्रमोशन के सिलसिले में लखनऊ आए शेखर सुमन से जब कहा गया कि इंडस्ट्री में अनिल कपूर और शेखर सुमन कभी बूढ़े नहीं हो सकते। इस सवाल उन्होंने हंसते हुए कहा कि बुढ़ापे के लिए मेरे पास वक्त नहीं है।


 

'बुढ़ापे के लिए मेरे पास वक्त नहीं, मुझे जीने का जुनून है'

Shekhar Suman in Lucknow.

बूढ़ा वो होता है जो मानसिक रूप से खुद को बूढ़ा मान लेता है। मुझमें तो जीने का जुनून है। मैं जब भी एमएफ हुसैन को देखता था, एक ऊर्जा से भर जाता था। शेखर ने बताया कि बेटे अध्ययन सुमन के लिए फिल्म ‘एयरपोर्ट’ बना रहे हैं, जो जल्द रिलीज होगी।

'बुढ़ापे के लिए मेरे पास वक्त नहीं, मुझे जीने का जुनून है'

Shekhar Suman in Lucknow.

शेखर बताते हैं कि साहिर लुधियानवी व अमृता प्रीतम की लवस्टोरी से जुड़े किस्से साहित्य व शायरी में रुचि रखने वाला हर शख्स सुनना चाहता है। वे जानना चाहते हैं कि आखिर अमृता व साहिर के बीच कैसी बातें होती थीं, किन बातों पर बहस होती थी और कब एक-दूसरे पर प्यार उमड़ता था। इसी कहानी पर आधारित नाटक ‘एक मुलाकात’ फरवरी में होने वाले रेपटवा थियेटर फेस्ट में मंचित होने की उम्मीद है। यह जानकारी अभिनेता शेखर सुमन ने दी।

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'बुढ़ापे के लिए मेरे पास वक्त नहीं, मुझे जीने का जुनून है'

Shekhar Suman in Lucknow.

नाटक में साहिर का किरदार निभा रहे शेखर ने बताया कि अमृता व साहिर के संबंधों को समझने के लिए उन्हें कड़ी मेहनत करनी पड़ी। हालांकि, प्ले के तमाम शो हो चुके हैं। चूंकि, लखनऊ में साहित्य व शायरी के कद्रदानों की कमी नहीं है, इसलिए नाटक यहां काफी पसंद किए जाने की उम्मीद है।
 

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'बुढ़ापे के लिए मेरे पास वक्त नहीं, मुझे जीने का जुनून है'

Shekhar Suman in Lucknow.

यहां तो कुत्ते को भी इज्जत से डांटते हैं
लखनवी तहजीब के सवाल पर शेखर सुमन ने एक किस्सा सुनाते हुए कहा कि बहुत समय पहले धारावाहिक की शूटिंग के दौरान मैं लखनऊ में था। देखा कि एक मोहतरमा बड़े सलीके से शीरीन उर्दू में गालियां दे रही थीं, जो सुनने में गालियां नहीं लग रही थीं। थोड़ी देर बाद जब देखा तो पता लगा कि मोहतरमा कुत्ते को फटकार रही थीं और वह भी मोहब्बत से उन्हें सुन रहा था। यही है लखनऊ की तहजीब।

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