श्रावस्ती जिले में शुक्रवार को मध्य रात से शुरू हुई आफत की बरसात रुक रुक कर रविवार को भी जारी रही। इस दौरान जहां राप्ती नदी का जल स्तर खतरे का निशान पार कर 190 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गया। वहीं सिरसिया क्षेत्र के पहाड़ी नालों के उफान पर आने से भिनगा जंगल सहित भिनगा तेंदुआ व भुजंगा नव्वा नेवादा मार्ग जलमग्र हो गया है। राप्ती के बढ़े जलस्तर के कारण जहां आठ गांवों में नदी कटान कर रही है। वहीं 32 गांव पूरी तरह पूरी तरह बाढ़ से घिरे हुए हैं। जबकि अतिप्लावन के कारण करीब 20 गांव टापू बन गए हैं। इससे इन गांवों का एक दूसरे से संपर्क टूटा हुआ है।
Sharavasti: खतरे के निशान से 190 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच घटने लगी राप्ती नदी, बाढ़ से घिरे 50 गांव, संपर्क कटा
नदी अपने घटते बढ़ते जलस्तर के कारण अपने तट पर स्थित मनिका कोट, नरायनपुर, नासिरगंज, फत्तेपुर तनाजा, दत्तनगर, अमवा, जोगिया व भगवानपुर गांव में कटान कर रही है। इसके साथ ही नदी का पानी जोगिया, लक्ष्मनपुर, पोदला, पोदली, लक्ष्मनपुर खुर्द, सर्रा, अशरफ नगर, खर्च, दत्त नगर, अमवा, नारायनपुर, कोटवा, दहावरकला व मोहम्मदपुर कला, सलारू पुरवा, बरंगा, हरिहरपुर, करनपुर, गुरूआ, गुरुदत्त पुरवा, लाहौर कला, लक्ष्मणपुर सेमरहनिया, असरफा बाजार, भीखमपुर जगरावलगड़ी सहित 32 गांवो में प्रवेश कर गया। जहां घरों में पानी आ जाने से लोग घर की छतों पर चारपाई व तखत पर पन्नी व तिरपाल तान कर डेरा जमाए हुए हैं।
तहसील, ब्लाक व अस्पताल में भी भरा बाढ़ का पानी
राप्ती नदी के बढ़े जलस्तर के कारण जमुनहा तहसील, ब्लाक परिसर व मल्हीपुर सीएचसी सहित पटना वीरगंज बाजार में लोगों के घरों व दुकानों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया। इतना ही नहीं मल्हीपुर के बैरियर चौराहे से मधवारपुर होते हुए भंगहा आने वाले मार्ग पर कई फिट पानी आ जाने से आवागमन रोक दिया गया है। वहीं, शिकारी चौड़ा के निकट बहराइच जमुनहा मार्ग पर बाढ़ का पानी आने से आवागमन प्रभावित है। इसके साथ ही बाढ़ से घिरे 36 गांवों का तहसील ब्लाक व जिला मुख्यालय से संपर्क पूरी तरह से कट गया है। यहां लोगों को सुरक्षित स्थन पर पहुंचाने के लिए एनडीआरएफ व फ्लड पीएसी के जवान मोटर बोट के सहारे लोगों को रेस्क्यू कर रहे हैं।
राप्ती नदी ही नहीं पहाड़ी नाले भी बरपा रहे कहर
जिले सहित पहाड़ों पर होने वाली बरसात के कारण सिरसिया क्षेत्र का सोहेलवा व भिनगा जंगल पानी से जलमग्र हो गया है। इससे जंगल में रहने वाले जीव जंतुओं के प्रकृतिवास पर खतरा मंडरा रहा है। एक तरफ जहां जंगल में रहने वाले गाय भैंस मुख्य मार्ग की पटरियों पर डेरा जमाए हुए हैं। वहीं दूसरी तरफ हिंसक जीव जंतु पेड़ व ऊंचे स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं। इतना ही नहीं सिरसिया क्षेत्र के डगमरा, सूरजकुंडा व भैंसाही सहित अन्य पहाड़ी नालों के उफान पर आ जाने से आसपास के खेत जलमग्र हो गए हैं। वहीं केन नाला के उफान पर आ जाने से भिनगा ताल बघौड़ा, भुजंगा नव्वा मार्ग पर पानी आने से आवागमन बाधित हो गया है। यदि इसी तरह जंगल में पहाड़ी नाले का जलस्तर बढ़ा तो भिनगा सिरसिया व भिनगा लक्ष्मनपुर मार्ग पर आवागमन बाधित हो सकता है।
और उग्र हुई राप्ती तो मचेगी तबाही
राप्ती बैराज पर नदी का जलस्तर भले ही घट रहा हो लेकिन उसका पानी अब गिलौला व इकौना क्षेत्र की ओर बढ़ रहा है। नदी के बढ़ते जलस्तर के कारण बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती सहित करीब 144 गांवों पर बाढ़ व कटान का खतरा मंडराने लगा है। यदि नदी का जलस्तर और बढ़ा तो भिनगा इकौना मार्ग अवरुद्ध होने के साथ ही जमुनहा भिनगा व इकौना तहसील क्षेत्र के करीब 144 गांवों में राप्ती नदी अपना कहर बरपा सकती है। जिसे लेकर नदी के आसपास बसे गांवों के ग्रामीणों की धड़कने तेज हो गई हैं। तमाम ग्रामीण आफत से बचने के लिए सुरक्षित स्थान की तलाश में जुट गए हैं।