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बेहद रोचक हैं महाकवि घाघ की कहावतें, इनमें है मौसम की सटीक भविष्यवाणी

Sun, 16 Oct 2016 06:24 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sun, 16 Oct 2016 06:24 PM IST
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proverbs of great poet Ghagh are guide for farmers.

अकबर के समकालीन रहे महाकवि घाघ भड्डरी की मौसम की से जुड़ी भविष्यवाणियां आज भी बेहद सटीक साबित होती हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में किसान आज भी इन्हें अपना गाइड मानते हैं। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

proverbs of great poet Ghagh are guide for farmers.

कहा जाता है कि उन्होंने अपने पूर्व भड्डर ऋषि के कृषि व मौसम विज्ञान से सम्बंधित ज्ञान को लोकभाषा में प्रस्तुत किया, जो कि किसानो के लिए फसल उत्पादन के लिए मददगार होती हैं। इनकी जन्मभूमि कन्नौज के पास चौधरी सराय नामक ग्राम बताई जाती है।

proverbs of great poet Ghagh are guide for farmers.

घाघ के कृषिज्ञान का पूरा-पूरा परिचय उनकी कहावतों से मिलता है। उनका यह ज्ञान खादों के विभिन्न रूपों, गहरी जोत, मेंड़ बाँधने, फसलों के बोने के समय, बीज की मात्रा, दालों की खेती के महत्व एवं ज्योतिष ज्ञान, शीर्षकों के अंतर्गत विभाजित किया जा सकता है। घाघ का अभिमत था कि कृषि सबसे उत्तम व्यवसाय है, जिसमें किसान भूमि को स्वयं जोतता है। उन्होंने अपनी इस बात को कहावत में इस तरह कहा- उत्तम खेती मध्यम बान, निकृष्ट चाकरी, भीख निदान।

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खादों के संबंध में घाघ के विचार अत्यंत पुष्ट थे। उन्होंने गोबर, कूड़ा, हड्डी, नील, सनई, आदि की खादों को कृषि में प्रयुक्त किए जाने के लिये वैसा ही सराहनीय प्रयास किया जैसा कि 1840 ई. के आसपास जर्मनी के सप्रसिद्ध वैज्ञानिक लिबिग ने यूराप में कृत्रिम उर्वरकों के संबंध में किया था। उनकी ये कहावतें खादों के सन्दर्भ में उनकी राय को बतलाती हैँ-

खाद पड़े तो खेत, नहीं तो कूड़ा रेत।
गोबर राखी पाती सड़ै, फिर खेती में दाना पड़ै।
सन के डंठल खेत छिटावै, तिनते लाभ चौगुनो पावै।
गोबर, मैला, नीम की खली, या से खेती दुनी फली।
वही किसानों में है पूरा, जो छोड़ै हड्डी का चूरा।

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घाघ ने गहरी जुताई को सर्वश्रेष्ठ जुताई बताया। यदि खाद छोड़कर गहरी जोत कर दी जाय तो खेती को बड़ा लाभ पहुँचता है -

छोड़ै खाद जोत गहराई, फिर खेती का मजा दिखाई।

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