केजीएमयू की डायलिसिस यूनिट में मरीजों में संक्रमण का खतरा है। यहां बेड के बगल में पानी टपक रहा है तो फॉल्स सीलिंग में सीलन से फंगस लग चुका है। यह सीलन डायलिसिस उपकरणों के लिए भी खतरनाक बताया जाता है। डायलिसिस यूनिट की ओर से निर्माण इकाई को शिकायती पत्र भी भेजा जा चुका है। इसके बाद अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। केजीएमयू के शताब्दी फेज वन में नेफ्रोलॉजी विभाग में 17 डायलिसिस मशीनें हैं। यहां रोजाना 45 से 50 मरीजों की डायलिसिस की जाती है। यहां एचआईवी व असाध्य मरीजों की डायलिसिस मुफ्त होती है। डायलिसिस यूनिट के गेट से प्रवेश करते ही पानी टपक रहा है। यहां बाल्टी लगा दी गई है। अंदर बने वार्ड में मरीजों के लिए लगाई गई टीवी स्क्रीन के पास भी अब पानी टपकने लगा है।
जानलेवा लापरवाहीः केजीएमयू की डायलिसिस यूनिट में संक्रमण का खतरा, शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं
सीलन होने से एनर्जी, काला पीलिया, त्वचा का संक्रमण, निमोनिया, वायरल इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा तमाम ऐसे फंगस विकसित होने का डर रहता है, जो जानलेवा होते हैं।
तीन मशीनों पर डायलिसिस बंद
बताया जाता है कि फॉल्स सीलिंग से पानी सीधे बेड पर गिर रहा है। बेड संख्या आठ, 10 व 11 के आसपास पानी टपकने से बिस्तर भीग जाता है। ऐसे में इन बेडों पर डायलिसिस नहीं की जा रही है। रविवार को धूप होने पर बेड बदलवाए गए हैं। दोबारा बारिश नहीं हुई तो इस बेड पर डायलिसिस शुरू की जाएगी।
बढ़ रहा है फंगस का खतरा
फॉल्स सीलिंग में लगातार सीलन से फंगस लग रहे हैं। इसकी सफाई के लिए केजीएमयू प्रशासन को कई बार पत्र भेजा गया, लेकिन सफाई नहीं की गई। इससे फंगस बने हुए हैं। यूनिट के टेक्नीशियनों ने अपने स्तर पर सफाई का प्रयास किया। लेकिन लगातार बारिश के बाद फिर से फंगस लग गया है।
संक्रमण से हो चुकी है मौत
केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर में संक्रमण से दो मरीजों की मौत भी हो चुकी है। उस वक्त ट्रॉमा सेंटर के आईसीयू में खतरनाक फंगस कैंडिडा आरिस पाया गया था। इसके बाद इंफेक्शन कंट्रोल कमेटी बनी और नियमित तौर पर वार्ड, आईसीयू सहित अन्य स्थानों पर फंगस व बैक्टीरिया की जांच शुरू की गई, लेकिन अब लापरवाही बरती जा रही है।
इसलिए है सीलन से खतरा
आयुर्विज्ञान संस्थान के डॉ. विक्रम सिंह का कहना है कि बारिश के मौसम में फंगस और बैक्टीरिया तेजी से बढ़ता है। डायलिसिस के मरीजों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है। ऐसे में वार्ड में सीलन होने से उन्हें गले, फेफड़े के संक्रमण संबंधी बीमारियों का खतरा रहता है। एलर्जी और वायरल इंफेक्शन भी हो सकता है।
कहां कितनी डायलिसिस मशीनें
नेफ्रोलॉजी 17
मेडिसिन 05
ट्रॉमा सेंटर 08
डायलिसिस का खर्चा- केजीएमयू में 1200 रुपया, निजी अस्पताल में पहली बार 4 से पांच हजार, दोबारा करीब तीन हजार।
डायलिसिस यूनिट में पानी टपकने की समस्या दूर करने के लिए संबंधित कार्यदायी इकाई को लिखा गया है। जहां तक फंगस का सवाल है तो बारिश कम होने के बाद सभी वार्र्डों की सफाई कराई जाएगी। - डॉ. एसएन शंखवार, सीएमएस, केजीएमयू