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पितृपक्ष के 15 दिनों में भूलकर भी न करें ये काम, नहीं तो सहने पड़ेंगे कष्ट

Mon, 24 Sep 2018 03:47 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Updated Mon, 24 Sep 2018 03:47 PM IST
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pitra paksha will start from 25 september
डेमो - फोटो : डेमो
पितरों के प्रति श्रद्धा और नमन का पर्व पितृपक्ष 25 सितंबर से शुरू हो रहा है। लेकिन सोमवार को भाद्रपद शुक्ल पक्ष पूर्णिमा का मान मिलने से पूर्णिमा को मृत्यु पाए पितरों का तर्पण-श्राद्ध कर्म करना सोमवार को ही श्रेयस्कर रहेगा। मंगलवार से आश्विन कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा लगने से पितृपक्ष में पितरों का पूजन-तर्पण उसी दिन से शुरू हो जाएगा। 
pitra paksha will start from 25 september
डेमो - फोटो : डेमो
गोमतीनगर निवासी आचार्य प्रदीप के मुताबिक, पितरों का श्राद्ध तर्पण मध्यान्ह में किया जाना ठीक रहता है। सोमवार सुबह 6:36 बजे के बाद से पूर्णिमा शुरू हो जाएगी, यह 25 की सुबह 7:41 बजे तक रहेगी। इसलिये षोडशी श्राद्ध करने वालों को सोमवार की दोपहर ही पूर्णिमा को मृत्यु पाये पितरों का श्राद्ध करना उत्तम रहेगा।
pitra paksha will start from 25 september
डेमो - फोटो : डेमो
25 सितंबर को प्रतिपदा से पितृपक्ष की तिथिवार तर्पण होगा। पितृपक्ष की जिन तिथियों में पितरों-पूर्वजों की मृत्यु होती है, जजमानों को उन्हीं तिथियों में अपने पितर का तर्पण करना चाहिये। इसके अलावा प्रतिदिन भी पितरों का श्राद्ध करना चाहिये। अकाल मृत्यु पाये, शस्त्रों से मृत्यु पाये या जिनका मृत्यु काल स्पष्ट न हो उन्हें अमावस्या को तर्पण करना चाहिये। 
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pitra paksha will start from 25 september
डेमो - फोटो : डेमो
अमावस्या का श्राद्ध 8 अक्तूबर को होगा। इस दौरान मंगल कार्यों से बचना चाहिये। 3 अक्टूबर को मातृनवमी का सुहागिन औरतों का तर्पण करना उत्तम रहेगा। सन्यासी, गृहस्थों का श्राद्ध द्वादशी के दिन 6 अक्तूबर को करना उत्तम रहेगा। पितृ विसर्जन 8 करना ठीक रहेगा, क्योंकि 9 को भौमवती अमावस्या के दिन स्नान दान की आमवस्या रहेगी। 
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pitra paksha will start from 25 september
- फोटो : डेमो
पं. राकेश पांडेय ने बताया, ऐसी मान्यता है कि देवताओं की पूजा में कदाचित भूल होने पर देवता क्षमा कर देते है। परन्तु पितृ कार्य में न्यूनता या आलस्य करने से पितर असंतुष्ट हो जाते हैं। जिससे हमें रोग, शोक आदि भोगने पड़ते हैं। सिर का मुंडन पितृ पक्ष के भीतर या तिथि पर नहीं करना चाहिये। क्योंकि पितृ पक्ष में सिर के जो भी बाल गिरते है वो पितरों के मुख में जाते हैं। अत: सिर के बाल पितृ पक्ष आरम्भ होने के एक दिन पूर्व बनवा लें। 
 
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