लोक सेवा आयोग ने पीसीएस 2017 का परिणाम बृहस्पतिवार देर शाम को जारी कर दिया। राजधानी के कई अभ्यर्थियों ने सफलता का स्वाद चखा है। ज्यादातर सफल अभ्यर्थी पहले से ही किसी न किसी प्रशासनिक पद पर कार्यरत हैं। सफल अभ्यर्थियों ने बताया कि इंटरनेट से पढ़ाई का चलन बढ़ गया है, लेकिन कितना पढ़ना है, इसको समझना बेहद जरूरी है। ज्यादा नहीं पर फोकस होकर पढ़ाई करें। साथ ही किताबों और पेपर का साथ न छोड़ें।
पीसीएस - 2017 में शहर का परचम लहराने वाले सफल अभ्यथियों ने बताए कामयाबी के गुर
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आशुतोष मिश्रा, डिप्टी एसपी
आशुतोष मिश्रा ने बताया कि वर्ष 2016 मैंने और मेरी पत्नी जयजीत मिश्रा ने पीसीएस क्वालीफाई किया। वो एसडीएम के पद पर सेलेक्ट हुईं और मैं असिस्टेंट कमिश्नर के पद पर। मैंने दोबारा में इस बार डिप्टी एसपी के पद पर सेलेक्ट हुआ हूं। इसमें मेरी पांचवी रैंक आई है। हम दोनों पति-पत्नी ने बीटेक और एमबीए किया। दोनों ने साथ मुंबई में नौकरी भी की। वर्ष 2015 में दोनों ने शादी कर ली उसके बाद नौकरी छोड़ प्रशासनिक सेवा में जाने का निर्णय लिया। पिता एसएस मिश्रा एडिशनल कमिशनर, सेल्स टैक्स से सेवानिवृत्त हैं। मेरी बहन पूजा मिश्रा 2011 बैच की पीसीएस अधिकारी हैं। मां अनुप्रिया गृहणी हैं। पिता और बहन पहले से ही अधिकारी रहे, इसलिए उनसे काफी प्रोत्साहन मिला। सफलता का श्रेय परिवार को देता हूं।
टिप्स- लेखन कौशल पर ज्यादा ध्यान दें। ऑनलाइन में कंटेंट का भंडार बहुत है। जरूरत के अनुसार लिमिट कंटेंट की पढ़ाई करें।
रितेश त्रिपाठी- डीएसपी, प्रज्ञा त्रिपाठी- जिला रोजगार अधिकारी
रितेश त्रिपाठी बताते हैं कि मैं डीएसपी और मेरी बहन प्रज्ञा त्रिपाठी का जिला रोजगार अधिकारी केपद पर चयन हुआ है। इससे पहले मेरा कॉमर्शियल टैक्स ऑफिसर के पद पर सेलेक्शन हो चुका है। मैंने नोएडा से बीटेक किया और दो साल टीसीएस में नौकरी के बाद तैयारी में लग गया। पिता मोहन चंद्र त्रिपाठी भी पीसीएस अधिकारी थे। वर्ष 2012 में उनकी कैंसर से मृत्यु हो गई। इसके बाद हम भाई-बहन ने पीसीएस अधिकारी बनने की ठानी। मां सावित्री गृहणी हैं। प्रज्ञा बताती हैं कि मैंने लखनऊ विवि से एमए किया। दूसरे प्रयास में सफलता मिली। सफलता का श्रेय मां को देते हैं।
टिप्स- हम दोनों ने सेल्फ स्टडी पर भरोसा किया। खुद के नोट्स बनाएं। करेंट अफेयर्स के लिए रोज अखबार पढ़ें।
नकारात्मक विचारों से दूर ही रहें
विनय कुमार सिंह
इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (आईईटी) से 2011 बैच में बीटेक कर असिस्टेंट कमिश्नर सेल्स टैक्स के रूप में काम करते हुए किसान नरेंद्र सिंह के बेटे विनय सिंह ने अपने दूसरे ही प्रयास में एसडीएम पद प्राप्त कर लिया। विनय ने कहा कि मेरा फोकस आईएएस पर था इसलिए कॉन्सेप्ट काफी क्लीयर था। नकारात्मक विचारों से दूर होकर पढ़ाई करने से सफलता जरूर मिलती है।
टिप्स- कंटेंट बहुत है, क्या पढ़ना है, यह चुनना पड़ेगा। असफलता से डरें नहीं, नियमित तैयारी करें।
बेसिक मजबूत करें, सफलता मिलेगी
प्रियंका बाजपेई
आईटी कॉलेज से स्नातक और लखनऊ विवि से पब्लिक एड में पीजी करने वाली प्रियंका बाजपेई ने अपने तीसरे प्रयास में डिप्टी एसपी का पद प्राप्त किया। प्रियंका कानपुर में एक्साइज इंस्पेक्टर के पद पर तैनात हैं। वे कहती हैं कि प्रतियोगी परीक्षा में सफलता के लिए अपना बेसिक मजबूत करना जरूरी है। जो पढ़ा मन लगाकर पढ़ा। पिता राकेश बाजपेई बिजनेसमैन और मां आशा गृहणी हैं।
टिप्स- असफलता पर घबराएं नहीं, निरंतर प्रयास करते रहें।