अगर रात 12 बजे आपकी तबीयत खराब हो जाए और अस्पताल जाना पड़े या कोई बेहद जरूरी काम आ जाए तो सोच-समझकर ही घर से निकलें। रास्ते में पुलिस मिल गई तो आपको ‘अराजक तत्व’ घोषित कर देगी। जी हां, 10 दिनों से चल रहे ‘ऑपरेशन मिड नाइट’ में लखनऊ पुलिस कुछ ऐसा ही कर रही है। इस दौरान 15,976 लोगों को अराजक तत्व माना गया है। पुलिस रात को घर से निकलने वालों से पूछताछ कर रही है। उनके पहचान पत्र देख रही है, लेकिन व्यक्ति के बारे में कोई रिकॉर्ड नहीं रखा जा रहा है। न ही पूछताछ का ब्योरा कहीं दर्ज हो रहा है। कार्रवाई के नाम पर सिर्फ चालान व वाहन सीज कर ‘अराजक तत्व’ का आंकड़ा बढ़ाया जा रहा है।
ऑपरेशन मिड नाइट: सोच-समझकर ही रात में निकलें घर से बाहर, नहीं तो पुलिस बना देगी 'अराजक तत्व'
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राजधानी में अपराध पर अंकुश लगाने को एसएसपी कलानिधि ने 25 जुलाई से यह विशेष अभियान शुरू किया। यह प्रमुख चौराहों के साथ भीड़-भाड़ व शराब की दुकानों, स्टैंड व सुनसान स्थानों पर भी रोजाना रात 12 से 2 बजे तक चलाया जा रहा है। इसके लिए विशेष तौर पर अपर पुलिस अधीक्षक और क्षेत्राधिकारी को मौजूद रहने के निर्देश दिए गए हैं।
पुलिस रोजाना औसतन 1600 लोगों को अराजक बना रही है। अभियान के दौरान रात में सड़कों पर निकलने वाले को रोक लिया जाता है। संदिग्ध मानकर तलाशी लेने के साथ उसका परिचय पत्र देखा जाता है। इसके बाद अराजक तत्व में आंकड़ा बढ़ाकर उसे छोड़ दिया जा रहा है। दस दिनों में 1258 स्थानों पर चेकिंग में 15976 लोगों को अराजक बनाया जा चुका है।
अभियान में वाहनों की चेकिंग के दौरान जिसके पास से परिचय पत्र या पहचान का कोई प्रमाण नहीं मिल रहा, उसे हिरासत में ले लिया गया। कार्रवाई के नाम पर सिर्फ चालान काट वाहन सीज किए गए। इस दौरान 1113 का चालान काटा गया, वहीं 66 वाहनों को सीज किया गया।
पहले भी चला अभियान
पूर्व एसएसपी दीपक कुमार के कार्यकाल में जब राजधानी में डकैतियों का सिलसिला शुरू हुआ तो विशेष अभियान चलाया जाने लगा। हालांकि उस समय लोगों को अराजक तत्व नहीं बनाया जाता था। जो पुलिसकर्मी गश्त पर रहते थे वे इसमें पूछताछ और व्यक्ति का पूरा ब्योरा दर्ज किया जाता था।