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ऑपरेशन मिड नाइट: सोच-समझकर ही रात में निकलें घर से बाहर, नहीं तो पुलिस बना देगी 'अराजक तत्व'

Tue, 06 Aug 2019 04:59 PM IST
ishwar ashish इंद्र भूषण दुबे/अमर उजाला, लखनऊ
इंद्र भूषण दुबे/अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Tue, 06 Aug 2019 04:59 PM IST
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operation midnight in lucknow
ऑपरेशन मिड नाइट - फोटो : अमर उजाला

अगर रात 12 बजे आपकी तबीयत खराब हो जाए और अस्पताल जाना पड़े या कोई बेहद जरूरी काम आ जाए तो सोच-समझकर ही घर से निकलें। रास्ते में पुलिस मिल गई तो आपको ‘अराजक तत्व’ घोषित कर देगी। जी हां, 10 दिनों से चल रहे ‘ऑपरेशन मिड नाइट’ में लखनऊ पुलिस कुछ ऐसा ही कर रही है। इस दौरान 15,976 लोगों को अराजक तत्व माना गया है। पुलिस रात को घर से निकलने वालों से पूछताछ कर रही है। उनके पहचान पत्र देख रही है, लेकिन व्यक्ति के बारे में कोई रिकॉर्ड नहीं रखा जा रहा है। न ही पूछताछ का ब्योरा कहीं दर्ज हो रहा है। कार्रवाई के नाम पर सिर्फ चालान व वाहन सीज कर ‘अराजक तत्व’ का आंकड़ा बढ़ाया जा रहा है।

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ऑपरेशन मिड नाइट - फोटो : अमर उजाला

राजधानी में अपराध पर अंकुश लगाने को एसएसपी कलानिधि ने 25 जुलाई से यह विशेष अभियान शुरू किया। यह प्रमुख चौराहों के साथ भीड़-भाड़ व शराब की दुकानों, स्टैंड व सुनसान स्थानों पर भी रोजाना रात 12 से 2 बजे तक चलाया जा रहा है। इसके लिए विशेष तौर पर अपर पुलिस अधीक्षक और क्षेत्राधिकारी को मौजूद रहने के निर्देश दिए गए हैं।

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ऑपरेशन मिड नाइट - फोटो : अमर उजाला
रोज 1600 लोग बनाए जा रहे अराजक
पुलिस रोजाना औसतन 1600 लोगों को अराजक बना रही है। अभियान के दौरान रात में सड़कों पर निकलने वाले को रोक लिया जाता है। संदिग्ध मानकर तलाशी लेने के साथ उसका परिचय पत्र देखा जाता है। इसके बाद अराजक तत्व में आंकड़ा बढ़ाकर उसे छोड़ दिया जा रहा है। दस दिनों में 1258 स्थानों पर चेकिंग में 15976 लोगों को अराजक बनाया जा चुका है।


 
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ऑपरेशन मिड नाइट - फोटो : अमर उजाला
कार्रवाई के नाम पर सिर्फ चालान
अभियान में वाहनों की चेकिंग के दौरान जिसके पास से परिचय पत्र या पहचान का कोई प्रमाण नहीं मिल रहा, उसे हिरासत में ले लिया गया। कार्रवाई के नाम पर सिर्फ चालान काट वाहन सीज किए गए। इस दौरान 1113 का चालान काटा गया, वहीं 66 वाहनों को सीज किया गया।
 
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ऑपरेशन मिड नाइट - फोटो : अमर उजाला

पहले भी चला अभियान
पूर्व एसएसपी दीपक कुमार के कार्यकाल में जब राजधानी में डकैतियों का सिलसिला शुरू हुआ तो विशेष अभियान चलाया जाने लगा। हालांकि उस समय लोगों को अराजक तत्व नहीं बनाया जाता था। जो पुलिसकर्मी गश्त पर रहते थे वे इसमें पूछताछ और व्यक्ति का पूरा ब्योरा दर्ज किया जाता था। 
 

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