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अयोध्या मुद्दा: उलमा बोले, मस्जिद की जमीन हमेशा मस्जिद की ही रहेगी

Tue, 15 Aug 2017 01:01 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Tue, 15 Aug 2017 01:01 AM IST
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Muslim leaders react on over kalbe sadik's statement.

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने अपने ही उपाध्यक्ष मौलाना डॉ. कल्बे सादिक के बयान पर असहमति जताई है। बोर्ड से जुड़े उलमाओं का कहना है कि हम पहले ही साफ कर चुके हैं कि अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला सभी को मान्य होगा। ऐसे में मस्जिद की जमीन किसी को देने की बात कहना उचित नहीं है।



वैसे भी वक्फ एक्ट के मुताबिक मस्जिद की जमीन किसी नहीं दी जा सकती। कल्बे सादिक ने मुंबई में एक कार्यक्रम के दौरान कहा था कि अयोध्या मामले में फैसला हिन्दुओं के हक में न आए तो भी मुसलमानों को विवादित जमीन पर दावा छोड़ देना चाहिए।

मस्जिद की जमीन को बदला नहीं जा सकता
वहीं, शिया धर्मगुरू मौलाना कल्बे जव्वाद ने कहा कि उनकी बात वह जानें लेकिन, मस्जिद की जमीन हमेशा मस्जिद की ही रहती है। इसे न किसी को दिया जा सकता है और न इसका उपयोग बदला जा सकता है। इस जमीन को बेचा-खरीदा भी नहीं जा सकता है।

Muslim leaders react on over kalbe sadik's statement.

सुप्रीम कोर्ट का फैसला सभी को मान्य होगा
बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के संयोजक जफरयाब जिलानी का कहना है कि मौलाना ने दो बातें कहीं हैं, पहली बात खुद पर्सनल लॉ बोर्ड कह चुका है कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला ही मानेंगे। दूसरी बात कि मुसलमानों के हक में फैसला आने पर जमीन राममंदिर के लिए दे देना वक्फ एक्ट के खिलाफ है। वक्फ एक्ट 51 के मुताबिक वक्फ की जमीन लीज पर भी नहीं दी जा सकती है।

बेतुकी बयानबाजी से परहेज करें उलमा
सुन्नी धर्मगुरु मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली का कहना है कि अयोध्या मामला काफी संवेदनशील है। उलमा बेतुकी बयानबाजी से परहेज करें। सुप्रीम कोर्ट का फैसला मुसलमान ही नहीं, हर नागरिक के लिए सर्वोपरि है। पर्सनल लॉ बोर्ड पहले ही कह चुका है कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आखिरी होगा।

Muslim leaders react on over kalbe sadik's statement.

ऐसी मस्जिद नहीं चाहिए, जिससे किसी का दिल टूटे
आल इंडिया महिला मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की अध्यक्ष शाइस्ता अंबर का कहना है कि ऐसी मस्जिद या मंदिर से क्या फायदा जिससे किसी इंसान का दिल टूटे। मजहबी दूरियां पैदा हों नफरत बढ़े। अयोध्या का मामला सुप्रीम कोर्ट में है। जो भी फैसला होगा, उसे सभी मानेंगे। मौलाना डॉ. कल्बे सादिक का बयान सही है।

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आम मुसलमान चाहते हैं राम मंदिर बने : नृत्यगोपाल दास
महंत नृत्यगोपाल दास ने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए मुस्लिम भाई भी तैयार हैं। हर रोज सैकड़ों मुसलमान उन्हें पत्र भेजकर राममंदिर निर्माण का समर्थन करते हैं। लेकिन चंद कट्टरपंथियों ने माहौल बिगाड़ रखा है। सियासत करने के लिए वे अयोध्या का मुद्दा उठाते रहते हैं। अगर वे अड़ंगा न लगाएं तो मंदिर निर्माण के लिए नींव का पहला पत्थर भी मुस्लिम ही रखें।

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दूसरों को नहीं दे सकते मस्जिद
असदुद्दीन ओवैसी का कहना है कि एक मौलवी के कहने से मस्जिदें दूसरों को नहीं सौंपी जा सकती हैं। इबादत की जगहों का मालिक अल्लाह होता है। मस्जिदों का प्रबंधन शिया, सुन्नी, बरेलवी, सूफी के हा‌थ में हो सकता है, पर ये मौलिक नहीं है।

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