बसपा सुप्रीमो मायावती ने यूपी चुनाव के पहले पार्टी पदाधिकारियों को सम्बोधित करते हुए मुद्दे बताए और साथ ही हिदायत भी दी। उन्होंने कहा कि यूपी का विधानसभा चुनाव मोदी सरकार की वादाखिलाफी का जवाब देने और सपा की जनविरोधी सरकार से मुक्ति पाने का मौका है।
मायावती ने प्रत्याशियों, पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं को अनावश्यक विवाद से बचने के लिए चुनाव आचार संहिता का सख्ती से पालन करने की हिदायत दी। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान दादागीरी दिखाने की जरूरत नहीं है। लोग आपको भड़काने की कोशिश करेंगे, लेकिन इससे बचना है। भाषण के दौरान जाति-धर्म व व्यक्ति का उल्लेख नहीं करना है।
वे शनिवार को पार्टी के प्रदेश मुख्यालय पर वरिष्ठ पदाधिकारियों, मुख्य जोनल व मंडल को-ऑर्डिनेटरों, जिलाध्यक्षों तथा प्रत्याशियों की बैठक को संबोधित कर रही थीं। मायावती ने कहा कि मोदी सरकार ने लोकसभा की चुनावी वादाखिलाफी से लोगों का ध्यान बंटाने के लिए नोटबंदी का फैसला किया। इसका खामियाजा भुगतने के डर से भाजपा के नेता किस्म-किस्म की बयानबाजी व हथकंडे अपनाने का प्रयास कर रहे हैं।
विधानसभा चुनाव के दौरान संसद का बजट सत्र आहूत करना ऐसा ही प्रयास है। ये बजट में लोक-लुभावनी घोषणाएं करके प्रदेश की जनता को बहकाना चाहते हैं। इससे सावधान रहने की जरूरत है।
माया ने सपा की पारिवारिक कलह की चर्चा करते हुए कहा कि इस सरकार से आम जनता को मुक्ति पाना जरूरी है। सपा सरकार में प्रदेश जंगलराज, सांप्रदायिक दंगे व तनाव के कारण बदहाल रहा और काफी बदनाम हुआ। सपा के दोनों ही गुटों को मालूम है कि वे सत्ता में नहीं आने वाले हैं, इसीलिए ऑक्सीजन पर चल रही कांग्रेस से किसी भी तरह का समझौता करने को तैयार हैं।