बसपा सुप्रीमो मायावती ने विधानसभा के पार्टी प्रत्याशियों को न सिर्फ दलित वोटों पर फोकस करने की सलाह दी बल्कि झूठ बोलकर पार्टी का टिकट हासिल करने वालों को ट्रेलर भी दे दिया। उन्होंने कहा कि वे दलितों की उपेक्षा न करें। उनकी बस्तियों में भी वोट मांगने जरूर जाएं। उन्होंने साफ कर दिया कि बसपा टिकटार्थियों को यह भूल जाना चाहिए कि केवल ‘बहन जी’ के नाम से ही उन्हें दलितों का वोट मिल जाएगा।
उन्होंने कहा कि दलितों की उपेक्षा करने वालों के टिकट काटने में कोई संकोच नहीं किया जाएगा। बसपा के जोनल व मंडल को-ऑर्डिनेटरों, राज्यसभा सांसदों, विधायकों, विधानसभा के प्रभारियों, जिला व विधानसभा क्षेत्र के अध्यक्षों व महासचिवों व बामसेफ पदाधिकारियों की बैठक में मायावती की इस हिदायत को बेहद जमीनी आकलन के रूप में देखा जा सकता है। (मीटिंग के लिए पार्टी कार्यालय पहुंची मायावती।)
बसपा अध्यक्ष ने रविवार को पार्टी के प्रदेश मुख्यालय में विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर तमाम दिशा-निर्देश तो दिए ही, काडर की आशंकाएं भी दूर कीं। हालांकि बसपा सुप्रीमो का सबसे अधिक जोर दलित वोट बैंक को सहेजने पर था।
उन्होंने प्रत्याशियों को सिर्फ दलित बस्तियों की उपेक्षा न करने की ही हिदायत नहीं दी, बल्कि दलित सीटों पर ज्यादा फोकस बढ़ाते हुए सभी विधानसभा क्षेत्रों में कार्यरत भाईचारा कमेटियों की व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से सुरक्षित सीटों तक सीमित करने का भी फरमान सुना दिया। बाकी सीटों के लिए भाईचारा कमेटियां भंग कर दी गई हैं।
माना जा रहा है कि भाजपा के दलित सीटों पर दिनोंदिन बढ़ते फोकस की वजह से मायावती ने दलित वोट बैंक व सुरक्षित सीटों पर बसपा का भी फोकस बढ़ा दिया है। नेताओं को दलित वोटों के लिए सिर्फ उनके नाम के सहारे ही न छोड़े रहने का संदेश दे दिया है।