लखनऊ में हुसैनगंज से डीएवी कॉलेज के लिए बन रहे फ्लाईओवर के काम के दौरान बृहस्पतिवार को सेतु निगम और जलकल की लापरवाही से पाइपलाइन टूट गई। इससे ऐशबाग रोड पर व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स के बेसमेंट में बनी आधा दर्जन दुकानों में घुटने भर पानी भर गया। इससे दुकानदारों का लाखों रुपये का सामान बर्बाद हो गया। लापरवाही ने दिवाली से पहले दुकानों का दिवाला निकाल दिया। वहीं लाखों लीटर पीने का पानी बर्बाद चला गया। आसपास के इलाकों में पानी की आपूर्ति भी इससे प्रभावित हुई है।
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सेतु निगम और जलकल की लापरवाही से फटी पाइपलाइन, दुकानों में भरा पानी, तस्वीरें
Sat, 26 Oct 2019 08:02 PM IST
Amulya Rastogi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: Amulya Rastogi
Updated Sat, 26 Oct 2019 08:02 PM IST
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दुकानों में भरा पानी, पानी से सामान खराब हो जाने पर बिलख पड़ी महिला
- फोटो : amar ujala
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दुकानों में भरा पानी
- फोटो : amar ujala
चार घंटे बाद पानी निकालना शुरू किया
प्रदर्शन और बवाल की वजह से जलकल और सेतु निगम की टीमें भी मौके पर नहीं पहुंचीं। इससे काफी देर तक पानी बहने से रोकने और भरे हुए पानी को निकालने की कार्रवाई ही नहीं शुरू हो पाई। हादसे के करीब चार घंटे के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू हो पाया। इसके बाद जलकल की जेट मशीन लगाकर पानी को खींचकर निकाला गया।
सेतु निगम अफसरों को घेरा, मांगा मुआवजा
लखनऊ। नाका परिक्षेत्र व्यापार मंडल के तत्वावधान में व्यापारियों घटना स्थल पर पुलिस की सुुरक्षा में पहुंचे तो उनका घेराव कर लिया गया। व्यापारियाें ने पीड़ित व्यापारी को नुकसान का मुआवजा देने की मांग की। व्यापार मंडल अध्यक्ष पवन मनोचा ने बताया कि मामले की शिकायत डीएम से की उन्होंने व्यापारियों को मुआवजा दिलाने का आश्वासन दिया है। पवन ने बताया कि दिवाली के चलते पुल का कार्य बंद था, लेकिन मनमाने तरीके से खोदाई कर दी जिससे घटना हुई है।
प्रदर्शन और बवाल की वजह से जलकल और सेतु निगम की टीमें भी मौके पर नहीं पहुंचीं। इससे काफी देर तक पानी बहने से रोकने और भरे हुए पानी को निकालने की कार्रवाई ही नहीं शुरू हो पाई। हादसे के करीब चार घंटे के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू हो पाया। इसके बाद जलकल की जेट मशीन लगाकर पानी को खींचकर निकाला गया।
सेतु निगम अफसरों को घेरा, मांगा मुआवजा
लखनऊ। नाका परिक्षेत्र व्यापार मंडल के तत्वावधान में व्यापारियों घटना स्थल पर पुलिस की सुुरक्षा में पहुंचे तो उनका घेराव कर लिया गया। व्यापारियाें ने पीड़ित व्यापारी को नुकसान का मुआवजा देने की मांग की। व्यापार मंडल अध्यक्ष पवन मनोचा ने बताया कि मामले की शिकायत डीएम से की उन्होंने व्यापारियों को मुआवजा दिलाने का आश्वासन दिया है। पवन ने बताया कि दिवाली के चलते पुल का कार्य बंद था, लेकिन मनमाने तरीके से खोदाई कर दी जिससे घटना हुई है।
पाइप लाइन टूटने से हुआ जलभराव
- फोटो : amar ujala
लाखों रुपये का हुआ नुकसान
जिस शॉपिंग सेंटर में पाइप टूटने से पानी भरा, वहां पर व्यापारियों का माल पानी पर तैर रहा था। इससे लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। इसमें ऋतु गुप्ता, अंशु अग्रवाल, अजय पिपलानी, पीयूष अवस्थी, अर्शी मेडिकल स्टोर का माल बरबाद हो गया है। सेतु निगम अफसराें की लापरवाही के कारण इन दुकानों का दिवाली से पहले ही दिवाला निकल गया है।
सेतु निगम के अफसरों की सफाई, 6 मीटर गहराई में थी पाइपलाइन, इसलिए नहीं चला पता
सेतु निगम के अधिकारियों का कहना है कि ड्रिलिंग मशीन से पाइलिंग के लिए खोदाई की जा रही थी। अफसरों का कहना है कि खोदाई से पहले जीपीआर तकनीक से पाइपलाइन की मौजूदगी की जांच की गई थी। इससे वहां किसी लाइन की जानकारी सामने नहीं आई थी। कारण, जीपीआर तकनीक से केवल चार मीटर तक ही मौजूद पाइपलाइन या केबल का पता चलता है। सामान्य रूप से पाइपलाइन भी तीन मीटर गहराई तक डाली जाती हैं। छह मीटर पर पाइपलाइन मौजूद होने की कोई संभावना नहीं थी। इसी वजह से यह हादसा हो गया।
जिस शॉपिंग सेंटर में पाइप टूटने से पानी भरा, वहां पर व्यापारियों का माल पानी पर तैर रहा था। इससे लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। इसमें ऋतु गुप्ता, अंशु अग्रवाल, अजय पिपलानी, पीयूष अवस्थी, अर्शी मेडिकल स्टोर का माल बरबाद हो गया है। सेतु निगम अफसराें की लापरवाही के कारण इन दुकानों का दिवाली से पहले ही दिवाला निकल गया है।
सेतु निगम के अफसरों की सफाई, 6 मीटर गहराई में थी पाइपलाइन, इसलिए नहीं चला पता
सेतु निगम के अधिकारियों का कहना है कि ड्रिलिंग मशीन से पाइलिंग के लिए खोदाई की जा रही थी। अफसरों का कहना है कि खोदाई से पहले जीपीआर तकनीक से पाइपलाइन की मौजूदगी की जांच की गई थी। इससे वहां किसी लाइन की जानकारी सामने नहीं आई थी। कारण, जीपीआर तकनीक से केवल चार मीटर तक ही मौजूद पाइपलाइन या केबल का पता चलता है। सामान्य रूप से पाइपलाइन भी तीन मीटर गहराई तक डाली जाती हैं। छह मीटर पर पाइपलाइन मौजूद होने की कोई संभावना नहीं थी। इसी वजह से यह हादसा हो गया।
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दुकानों में भरा पानी
- फोटो : amar ujala
बीमा से कवर कराया जाएगा नुकसान
सेतु निगम के सीपीएम संदीप गुप्ता ने बताया कि नेशनल इंश्योरेंस कंपनी से पूरे प्रोजेक्ट के साथ थर्ड पार्टी बीमा कराया गया है। इसमें किसी कर्मचारी के साथ कैजुअल्टी होने से लेकर अन्य लोगों के नुकसान की भरपाई भी इसमें की जा सकती है। बीमा कंपनी के सर्वेयर को बुलाया गया है जिससे नुकसान का आकलन हो सके। इसके बाद दुकानदारों को उनके नुकसान की भरपाई कराई जाएगी।
फ्लाईओवर का काम बंद, पाइपलाइन की मरम्मत के बाद होगा शुरू
सेतु निगम के सीपीएम संदीप गुप्ता ने बताया कि फ्लाईओवर का काम तुरंत बंद कर दिया गया है। पाइपलाइन की मरम्मत का काम पूरा हो जाने के बाद ही आगे काम शुरू किया जाएगा। जलकल विभाग से कई बार पाइपलाइन का लेआउट मांगा गया, लेकिन कभी उपलब्ध नहीं कराया जाता है। इससे भी हादसे की आशंका बढ़ जाती है। जीपीआर तकनीक से चार मीटर से अधिक गहराई में पाइपलाइन होने पर पता नहीं चलेगा।
सेतु निगम के सीपीएम संदीप गुप्ता ने बताया कि नेशनल इंश्योरेंस कंपनी से पूरे प्रोजेक्ट के साथ थर्ड पार्टी बीमा कराया गया है। इसमें किसी कर्मचारी के साथ कैजुअल्टी होने से लेकर अन्य लोगों के नुकसान की भरपाई भी इसमें की जा सकती है। बीमा कंपनी के सर्वेयर को बुलाया गया है जिससे नुकसान का आकलन हो सके। इसके बाद दुकानदारों को उनके नुकसान की भरपाई कराई जाएगी।
फ्लाईओवर का काम बंद, पाइपलाइन की मरम्मत के बाद होगा शुरू
सेतु निगम के सीपीएम संदीप गुप्ता ने बताया कि फ्लाईओवर का काम तुरंत बंद कर दिया गया है। पाइपलाइन की मरम्मत का काम पूरा हो जाने के बाद ही आगे काम शुरू किया जाएगा। जलकल विभाग से कई बार पाइपलाइन का लेआउट मांगा गया, लेकिन कभी उपलब्ध नहीं कराया जाता है। इससे भी हादसे की आशंका बढ़ जाती है। जीपीआर तकनीक से चार मीटर से अधिक गहराई में पाइपलाइन होने पर पता नहीं चलेगा।
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पाइप लाइन टूटने से हुआ जलभराव
- फोटो : amar ujala
...और जलकल की दलील
सेतु निगम को काम की अनुमति नहीं थी, पाइपलाइन के बारे में पहले पूछते तो
जलकल के अधिशासी अभियंता राम कैलाश का कहना है कि सेतु निगम ने काम शुरू करने से पहले अनुमति नहीं ली। यहां काम करने के लिए अभी अनुमति नहीं दी गई। बिना बताए ही काम भी शुरू कर दिया। जलकल को खोदाई शुरू करने से पहले पाइपलाइन के बारे में पूछना चाहिए था। पाइपलाइन फटने के बाद पंपिंग स्टेशन और वॉल्व बंद कर आपूर्ति रोक दी गई है। इसकी मरम्मत होने तक आसपास के इलाकों में आंशिक रूप से आपूर्ति प्रभावित रहेगी।
सेतु निगम को काम की अनुमति नहीं थी, पाइपलाइन के बारे में पहले पूछते तो
जलकल के अधिशासी अभियंता राम कैलाश का कहना है कि सेतु निगम ने काम शुरू करने से पहले अनुमति नहीं ली। यहां काम करने के लिए अभी अनुमति नहीं दी गई। बिना बताए ही काम भी शुरू कर दिया। जलकल को खोदाई शुरू करने से पहले पाइपलाइन के बारे में पूछना चाहिए था। पाइपलाइन फटने के बाद पंपिंग स्टेशन और वॉल्व बंद कर आपूर्ति रोक दी गई है। इसकी मरम्मत होने तक आसपास के इलाकों में आंशिक रूप से आपूर्ति प्रभावित रहेगी।