बाबा विश्वनाथ की नगरी से चलकर महाकाल के दर्शन कराने के लिए रविवार को रवाना हुई काशी महाकाल एक्सप्रेस ट्रेन का सफर यात्रा से अधिक आस्था और भक्ति का सफर जान पड़ता है। माहौल पूरी तरह शिव मंदिर जैसा... ‘ऊं नम: शिवाय’ का जाप और शिव चालीसा का पाठ... मंत्रों की गूंज से मानो काशी और उज्जैन एक हो गए हों। वाराणसी से इंदौर के लिए शुरू हुई इस कॉर्पोरेट ट्रेन में प्रत्येक यात्री को शिव चालीसा बांटी गई। कई यात्री तो चालीसा मिलते ही इसका पाठ करने लगे। यह हर रोज बांटी जाएगी।
पूरी तरह शिवमय है काशी महाकाल एक्सप्रेस... बेहद खास हैं इस कॉर्पोरेट ट्रेन की सुविधाएं, तस्वीरें
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कानपुर के लोगों में दिखा क्रेज: चूंकि रविवार को ट्रेन को हरी झंडी दिखाई गई थी, इसलिए यह प्रयागराज के रास्ते कानपुर गई। लखनऊ वालों को ट्रेन के दीदार नहीं हो सके। ट्रेन शाम 6:47 बजे कानपुर पहुंची तो इसे देखने के लिए भारी हुजूम जमा था। पूजा-पाठ और फोटो सेशन के बाद ट्रेन यहां से 7:25 बजे रवाना हो सकी। स्थानीय सांसद सत्यदेव पचौरी ने ट्रेन को हरी झंडी दिखाई।
130 किमी प्रतिघंटा तक की स्पीड से दौड़ी: लखनऊ से कानपुर के बीच ट्रैक की वजह से भले ही ट्रेन की रफ्तार कम रही, लेकिन कानपुर से रवाना होने के बाद देखते ही देखते इसने 130 किमी प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ ली। अगर रूटीन में ट्रेन की स्पीड ऐसी रहती है तो यह उज्जैन और इंदौर जाने वाले यात्रियों की पहली पसंद बन जाएगी।
हर गतिविधि पर पैनी नजर: ट्रेन की बोगियों में होने वाली हर गतिविधि पर पैनी नजर रखने का इंतजाम किया गया है। दोनों छोरों पर एचडी कैमरे लगे हुए हैं। इससे चोरियों पर भी लगाम लगेगी। शौचालय के पास बने पॉइंट पर पूरी रिकॉर्डिंग की जा रही है, जो एक बॉक्स में है और उससे कोई छेड़छाड़ नहीं कर सकता।
सुविधाएं भी हैं खास
स्टेशन से ट्रेन के बी 4 कोच में पहुंचे। बोगियां थर्ड एसी की अन्य बोगियों से बेहतर मिलीं। सीटें आरामदायक हैं। कुशन अच्छे हैं। हालांकि कुछ फटे हुए हैं। इनका लोहा बाहर निकला हुआ है, जो खतरनाक हो सकता है। हालांकि बोगियों में लाइटिंग, सामान रखने के लिए अतिरिक्त शील्ड्स, ज्यादा चार्जिंग पॉइंट्स, डिस्प्ले बोर्ड्स और ऊपर की बर्थ पर चढ़ने के लिए बढ़िया रैंप बने हुए हैं।
शौचालय में बेबी शीट बोर्ड: ट्रेन के शौचालयों में बेबी शीट बोर्ड लगाए गए हैं। इससे महिलाओं को अपने बच्चों को शौच कराने में मदद मिलेगी। इसके अलावा वॉशिंग की भी अच्छी व्यवस्था है।
20 को लखनऊ होकर गुजरेगी, होगा स्वागत: काशी महाकाल एक्सप्रेस 20 फरवरी से यात्रियों के लिए नियमित रूप से चलनी शुरू होगी। 20 फरवरी को यह लखनऊ के रास्ते इंदौर जाएगी। उस दिन चारबाग में भव्य स्वागत की तैयारी है। इस मौके पर रेलवे के आला अधिकारियों से लेकर प्रदेश सरकार के मंत्रियों के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। लखनऊ से इंदौर का किराया करीब 1700 रुपये है। लोगों ने टिकट बुक करवानी शुरू कर दी है।